बच्चों की सुरक्षा है सम्मिलित जिम्मेदारी
By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: February 25, 2026 07:06 IST2026-02-25T07:06:18+5:302026-02-25T07:06:48+5:30
बच्चों को शिक्षा और सुविधाओं के मामले में न केवल दिल्ली सरकार बल्कि राज्य सरकारें भी बहुत कुछ कर रही हैं.

बच्चों की सुरक्षा है सम्मिलित जिम्मेदारी
किरण चोपड़ा
यह तथ्य हर कोई जानता है कि आज के बच्चे आने वाले कल का सुंदर भविष्य हैं और इन्हीं के मजबूत वर्तमान के दम पर हम एक शानदार भारत की तस्वीर देखते हैं लेकिन अहम बात यह है कि इन्हीं बच्चों की सुरक्षा हम सबकी बहुत बड़ी जिम्मेदारी बन जाती है. घर-परिवार-समाज में बच्चों को ज्यादा से ज्यादा महत्व दिया जा रहा है. बच्चों को शिक्षा और सुविधाओं के मामले में न केवल दिल्ली सरकार बल्कि राज्य सरकारें भी बहुत कुछ कर रही हैं. लेकिन मुश्किल उस समय आती है जब बड़ी संख्या में बच्चों के लापता होने की खबरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगती हैं.
पिछले दिनों दिल्ली पुलिस ने बाकायदा एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित करके लोगों को वायरल हो रही खबरों से सावधान रहने की अपील करते हुए तथ्य भी प्रस्तुत किया. फैक्ट चेक यही है कि चुनौतियां गंभीर हैं और अपने बच्चों पर हमें खुद नजर रखनी होगी और उनकी सुरक्षा खुद करनी होगी.
पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि बच्चों के लापता केस में कहीं कोई नेटवर्क तो नहीं? यह सच है कि दिल्ली में लापता बच्चों की समस्या एक गंभीर और संवेदनशील सामाजिक मुद्दा है. देश की राजधानी होने के कारण दिल्ली में हर वर्ष बड़ी संख्या में बच्चों के गुम होने की घटनाएं दर्ज की जाती हैं. पुलिस की जिम्मेदारी बढ़ रही है और वह बहुत कुछ कर भी रही है. देखा जाए तो लापता बच्चों के मामलों के पीछे कई कारण होते हैं.
इनमें मानव तस्करी, बाल श्रम, भीख मंगवाने वाले गिरोह, घरेलू हिंसा, पारिवारिक कलह, गरीबी और सोशल मीडिया के माध्यम से फुसलाकर ले जाना शामिल है. कई मामलों में बच्चों को नौकरी, मॉडलिंग या बेहतर जीवन का झांसा देकर दिल्ली जैसे महानगरों में लाया जाता है और फिर उनका शोषण किया जाता है. कुछ बच्चे घर में डांट-फटकार या अत्यधिक दबाव के कारण स्वयं भी घर छोड़ देते हैं.
इसलिए पारिवारिक वातावरण प्रेम से भरपूर होना चाहिए. बहरहाल दिल्ली पुलिस ने लापता बच्चों को खोजने के लिए कई विशेष अभियान चलाए हैं. ‘ऑपरेशन मुस्कान’ और ‘ऑपरेशन मिलाप’ जैसे अभियानों के माध्यम से हजारों बच्चों को खोजकर उनके परिवारों से मिलाया गया है. पुलिस द्वारा विशेष किशोर इकाइयां बनाई गई हैं जो केवल बच्चों से संबंधित मामलों पर काम करती हैं.
इसके अलावा, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है क्योंकि ये स्थान बच्चों के गायब होने के प्रमुख केंद्र माने जाते हैं.
हमें यह मानना होगा कि लापता बच्चों की समस्या केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है. जब तक सरकार, पुलिस, परिवार और समाज मिलकर प्रयास नहीं करेंगे, तब तक इस गंभीर समस्या का पूर्ण समाधान संभव नहीं है.