सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मः बात तो तभी बनेगी जब सख्ती बरती जाएगी...!
By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: February 12, 2026 05:48 IST2026-02-12T05:48:28+5:302026-02-12T05:48:28+5:30
Social Media Platform: सोशल मीडिया पर गंदगी भरे कंटेंट की उपलब्धता का सवाल है तो यह प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है.

सांकेतिक फोटो
Social Media Platform:सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सर्फिंग करते हुए अचानक कोई रील आपके सामने आती है. कोई बड़ा अभिनेता किसी प्रोडक्ट के बारे में बोल रहा होता है. सामान्य तौर पर लगता है कि ये विज्ञापन हो सकता है लेकिन तभी कुछ शब्द आपको चौंकाते हैं! नहीं! ऐसा नहीं हो सकता! मगर जो बोला जा रहा है, वह सच लगता है. आप यदि सतर्क व्यक्ति हैं तो जांच पड़ताल करते हैं और आप सुनिश्चित हो जाते हैं कि यह तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई से तैयार किया गया मसाला है. मगर हर कोई इसकी जांच नहीं कर पाता है.
आप किसी संत का प्रवचन सुनते हैं और आपको विश्वास नहीं होता कि कोई संत इस तरह की बात करेगा! जांच करते हैं तो फिर एआई की करतूत ही सामने आती है. आप विश्व के कुछ बड़े नेताओं को किसी गाने पर डांस करते हुए देख रहे होते हैं लेकिन वो सरासर झूठ होता है. आपके सामने कोई रील आती है और उसमें इतनी गंदगी भरी होती है कि आप खुद शर्मिंदा हो जाते हैं कि ये क्या देख रहे हैं?
आप कई हैरतअंगेज वीडियो देखकर स्तब्ध रह जाते हैं कि क्या वास्तव में ऐसा हो सकता है? दरअसल ऐसे वीडियोज एआई के माध्यम से तैयार किए जाते हैं और उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर डाल दिया जाता है. यह वास्तव में डीपफेक होता है. चूंकि लाखों की संख्या में ऐसे वीडियोज को व्यूज मिलते हैं तो कमाई भी होती है. यानी भ्रम के नाम पर पैसा कमाया जाता है.
इन सारी हरकतों पर अंकुश लगाने के लिए भारत सरकार ने आईटी नियम 2021 में बदलाव किया है. अब ऐसे वीडियोज को जानकारी मिलने के केवल तीन घंटे के भीतर हटाना होगा. इतना ही नहीं, वीडियो के दस प्रतिशत हिस्से पर यह जानकारी भी चस्पा करनी होगी कि यह एआई जेनरेटेड है ताकि इससे भ्रम न फैले.
अब सवाल यह है कि आईटी नियम तो पहले भी थे, फिर ऐसी चीजें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कैसे परोसी जाती रहीं? मतलब साफ है कि नियम तो बन गए लेकिन उन्हें लागू करा पाने में हमारी मशीनरी सफल नहीं हो पा रही है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इतने शक्तिशाली हो चुके हैं कि वे नियम कायदों की परवाह ही नहीं करते हैं.
उन्हें लगता है कि जेन-जी उनके कब्जे में है इसलिए कोई सरकार उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकती. उनके इस भ्रम को सरकार का सख्त रवैया ही तोड़ सकता है. सरकार ने जो नए नियम बनाए हैं, वे 20 फरवरी से लागू हो जाएंगे. देखना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पहले की तरह ही निरंकुश बने रहते हैं या फिर उनकी नकेल कसी जाएगी.
अभी तो यह हाल है कि यदि कोई आपका नकली अकाउंट बना ले तो उसे रोकने के लिए इतनी मशक्कत करनी पड़ती है कि आदमी परेशान हो जाता है. जहां तक सोशल मीडिया पर गंदगी भरे कंटेंट की उपलब्धता का सवाल है तो यह प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है. इस पर भी सरकार की सख्ती बहुत जरूरी है. नियम कारगर तभी होंगे जब सख्ती बरती जाएगी अन्यथा नियमों की भीड़ में एक और नियम खो जाएगा.