गणतंत्र दिवस पर मेजबानी से जुड़ी ऐतिहासिक उम्मीद
By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: January 26, 2026 06:09 IST2026-01-26T06:09:14+5:302026-01-26T06:09:14+5:30
Republic Day 2026: भारत व्यापारिक संतुलन की स्थिति में है. मगर राष्ट्रपति ट्रम्प यह मानते हैं कि भारत का बढ़ता वैश्विक प्रभाव खतरनाक है, वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका को चुनौती देने में सक्षम हो रहा है,

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Republic Day 2026: हर बार की तरह सामरिक शक्ति, समृद्ध संस्कृति और सभ्यता की दुनिया को झलक दिखाने वाली गणतंत्र दिवस परेड का आयोजन इस बार कुछ अलग संदेश देने जा रहा है. बीते अनेक वर्षों से विदेशी मेहमानों को नए भारत की तस्वीर दिखाने की कोशिश को नए दौर में देश की चिंताओं के साथ भी जोड़ा जा रहा है. यही कारण है कि 77वें गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा मुख्य अतिथि होंगे. सर्वविदित है कि पिछले कुछ समय से अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दोबारा सत्ता में आ जाने से देश को अनेक आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. अमेरिका ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है और वह व्यापार समझौते पर सहमति नहीं बना रहा है.
वह रूस के साथ संबंधों से परेशान होकर भारत की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाने पर उतारू है. बीते ढाई दशक में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन चुका है. उसके साथ भारत व्यापारिक संतुलन की स्थिति में है. मगर राष्ट्रपति ट्रम्प यह मानते हैं कि भारत का बढ़ता वैश्विक प्रभाव खतरनाक है, वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका को चुनौती देने में सक्षम हो रहा है,
इसलिए उसे नियंत्रित करना चाहिए. यह बात चीन और रूस पर लागू होती है, लेकिन चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन उनके नियंत्रण से बाहर हैं. वहीं कई मामलों में भारत की अमेरिका पर निर्भरता है. इसलिए भारत के साथ ही हर प्रकार की जोर आजमाइश हो रही है.
फिर चाहे अर्थव्यवस्था को ‘डेड इकोनॉमी’ बताना या फिर भारतीय अवैध प्रवासियों को हथकड़ी में बांधकर भेजना, हर प्रकार से भारत को नीचा दिखाने का प्रयास हो रहा है. इसी परिदृश्य से निपटने का अब समय आ चुका है. जिसमें समान भुक्तभोगी यूरोप भी नजर आ रहा है. पहले यूक्रेन पर रूसी हमले से मुश्किल और अब ग्रीनलैंड पर कब्जे की बात आरंभ हो रही है.
जिसके विरोध की सजा 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ तय है. इस स्थिति में यूरोप भी अमेरिकी बाजार के विकल्प की तलाश में है. भारत पहले ही न्यूजीलैंड और ब्रिटेन से व्यापार समझौता कर चुका है. अब बारी यूरोपीय यूनियन की है, जो भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. वित्त वर्ष 2023–24 में दोनों के बीच कुल व्यापार 137.4 अरब डॉलर का रहा था.
अब गणतंत्र दिवस समारोह के बाद 27 जनवरी को भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच बैठक होगी, जिसके बाद मुक्त व्यापार समझौते की घोषणा होने की संभावना है. इस आशय के संकेत यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला ने मंगलवार को स्विट्जरलैंड के दावोस में भी दिए थे. इसे ऐतिहासिक व्यापार समझौता माना जा रहा है,
जिससे दो अरब लोगों का बाजार तैयार होकर वैश्विक जीडीपी के लगभग एक-चौथाई के बराबर हो जाएगा. इसलिए इस बार गणतंत्र दिवस पर देश के लिए दीर्घकालीन खुशियां मिलने का अवसर है. मेहमानों की मेजबानी से नई राहें खुलेंगी, जो सालाना आयोजन को पहले से अलग और वर्तमान की आवश्यकता के अनुरूप बनाएगा.