पीयूष पांडे का ब्लॉग: मुंह छिपाने का नया दौर
By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: April 11, 2020 14:47 IST2020-04-11T14:47:37+5:302020-04-11T14:47:37+5:30
युवाओं के लिए अलग, बच्चों-बूढ़ों के लिए अलग मास्क होंगे. महिलाएं मास्क बेचने वाले से कहेंगी- भइया, गुलाबी रंग का वो मास्क दिखाओ, जिसमें काली पट्टियां हों, कपड़ा सिल्क का हो, नाक के पास थोड़ा टाइट और ठुड्डी पर ढीला हो.

पीयूष पांडे का ब्लॉग: मुंह छिपाने का नया दौर
कहावत है- मुंह छिपाए घूमना. अर्थात जिसने कुछ गलत काम किया हो वो समाज में अपना चेहरा दिखाने से घबराता है. लेकिन, आजकल जिसे देखिए मुंह छिपाए घूम रहा है. आम आदमी, डॉक्टर, उपद्रवी, पुलिस, चोर सब. एक मास्क ने विकट कंफ्यूजन फैला दिया है. जिसे जो समझो, वह कुछ और ही निकलता है.
कुछ दिन पहले तक घर में मुंह ढंककर कोई घुस आए तो उसे न केवल चोर समझा जाता था, बल्कि सवाल-जवाब से पहले थोड़ी बहुत ठुकाई-पिटाई संभव थी. आजकल हर घर में दो-चार लोग मुंह छिपाए घूम रहे हैं. मुंह ढंकना कोरोना फैशन है. मुङो यकीन है कि एक-दो महीने और कोरोना-कोरोना हुआ तो कपड़े बनाने वाली तमाम कंपनियां मास्क बनाने लगेंगी. फैशन डिजाइनर मास्क डिजाइनर बन जाएंगे.
युवाओं के लिए अलग, बच्चों-बूढ़ों के लिए अलग मास्क होंगे. महिलाएं मास्क बेचने वाले से कहेंगी- भइया, गुलाबी रंग का वो मास्क दिखाओ, जिसमें काली पट्टियां हों, कपड़ा सिल्क का हो, नाक के पास थोड़ा टाइट और ठुड्डी पर ढीला हो. जिस तरह बिना टेस्टिंग के कोरोना मरीज की पुष्टि नहीं हो सकती, वैसे ही बिना विज्ञापन के प्रोडक्ट लॉन्चिंग नहीं होती. इसलिए दीपिका-आलिया-कटरीना-शाहरुख-सलमान सब मुंह ढंककर अलग-अलग कंपनियों के मास्क का विज्ञापन करेंगे.
लेकिन मुङो ब्रांडेड चोरों की चिंता ज्यादा है, क्योंकि चोरी उनका कर्मसिद्ध अधिकार है और मुंह ढंकना उनकी आइडेंटिटी से जुड़ा मसला है. लेकिन, इस संकटकाल में उनकी चिंता की किसी को चिंता नहीं है. वरना चोरी कौन नहीं कर रहा? मास्क बेचने वाला 100 रुपए का मास्क 300 में बेच रहा है.
कालाबाजारियों ने सैनेटाइजर मार्केट से उसी तरह गायब कर दिया है, जिस तरह अंग्रेजों ने कोहिनूर गायब कर दिया. निजी एंबुलेंस वाले टैक्सी सर्विस का काम कर रहे हैं. सरकारी बाबुओं के लिए तो हर आपातकाल एक ठेके के समान होता है, जिसमें कमीशन पाना उनका जन्मसिद्ध अधिकार है. लेकिन, चोर बेचारा क्या करे? आज के मुश्किल वक्त में चोर ही चोरी नहीं कर पा रहा, बाकी कई लोग खुलेआम चोरी कर रहे हैं.
मैंने एक सर्टिफाइड चोर से इस बाबत पूछा तो बोला- ‘भइया, अपने ही सिक्के खोटे निकलें तो क्या शिकायत करना. हमारे कई जेबतराश साथी अब बड़े वोटतराश हैं. लेकिन, जब उन्होंने ही हमारे विषय में नहीं सोचा तो सरकार से क्या गिला-शिकवा.’सच में, सरकार से कोई गिला-शिकवा ठीक नहीं. आप भी मुंह ढंकिए और लॉकडाउन में सो जाइए.