परिसीमन 2026: ‘I-YUVA फॉर्मूला’ के साथ संतुलित लोकतंत्र की नई दिशा
By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: April 9, 2026 14:36 IST2026-04-09T14:33:20+5:302026-04-09T14:36:03+5:30
noida Delimitation 2026: सवाल खड़ा हो गया है कि क्या संसदीय सीटों का निर्धारण केवल जनसंख्या के आधार पर होगा।

file photo
noida: लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए वर्ष 2026 में प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया को लेकर बहस तेज हो गई है। इसी बीच आई युवा संस्था ने एक नया मॉडल पेश करते हुए आई युवा फार्मूला लागू करने की वकालत की है। नोएडा के निवासी संस्था के संस्थापक और राजनीतिक विश्लेषक रुद्र प्रताप सिंह ने इसे देश के संघीय ढांचे को सन्तुलित रखने वाला संवैधानिक ब्लूप्रिंट बताया है। गौरतलब है कि देश में आखिरी बार परिसीमन 1970 के दशक में हुआ था, जिसके बाद 1976 में जनसंख्या नियंत्रण के मद्दे नजर इस प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई थी।
यह रोक 2011 के बाद बढ़ाकर 2026 तक कर दी गई थी। अब उसके हटने के साथ यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या संसदीय सीटों का निर्धारण केवल जनसंख्या के आधार पर होगा। इसमें राज्यों के विकास और भौगोलिक परिस्थितियों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। आई युवा के प्रस्तावित फार्मूले में तीन स्तरीय पैमाना सुझाया गया है।
इसके तहत पर्वतीय और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए प्रति छह लाख की आबादी पर एक सांसद, दक्षिण भारतीय राज्यों के लिए 9 लाख पर एक सांसद और मैदानी और अन्य राज्यों के लिए 13 लाख की आबादी पर एक सांसद का प्रावधान किया गया है। 6: 9: 13 के इस अनुपात के जरिए संस्था का दावा है कि देश के विभिन्न हिस्सों के बीच संतुलन स्थापित किया जा सकेगा।
इस मॉडल के अनुसार लोकसभा की कुल सीटों की संख्या बढ़ाकर 1230 करने का प्रस्ताव है। इसमें दक्षिण भारत की हिस्सेदारी करीब 24.8% रहने का अनुमान है जो 1972 के स्तर के करीब है। संस्था का कहना है कि इससे क्षेत्रीय असंतोष कम होगा और सभी राज्यों को न्याय संगत प्रतिनिधित्व मिलेगा। फॉर्मूले में सामाजिक और लैंगिक न्याय पर भी जोर दिया गया है।
प्रस्ताव में संसद में 33% महिला आरक्षण के तहत 406 महिला सांसदों के शामिल होने की बात कही गई है। इसके अलावा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के लिए क्रमशह लगभग 185 और 106 सीटें आरक्षित रखने का सुझाव दिया गया है। आई युवा का मानना है कि इस मॉडल से विकास को राजनीतिक प्रोत्साहन मिलेगा, जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण और मानव विकास में बेहतर प्रदरशन किया है उन्हें इसका लाभ प्रतिनिधित्व के रूप में मिलेगा।
साथ ही सीटों की संख्या बढ़ने से निर्वाचित क्षेत्र छोटे होंगे जिससे जनप्रतिनिधियों और जनता का सीधा संपर्क मजबूत होगा। संस्था ने केंद्र सरकार से अपील की है कि परिसीमन 2026 को केवल जनसंख्या आधारित प्रक्रिया न मानते हुए इसे संघीय न्याय के दृष्टिकोण से देखा जाए ताकि देश के सभी क्षेत्रों और वर्गों को समान भागीदारी मिल सके।