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विनीत नारायण का ब्लॉग: इस चुनाव से क्या बदलेगा?

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: April 22, 2019 07:20 IST

लोकसभा चुनाव 2019: सरकार जिसकी भी बने, चुनौतियां दोनों के सामने बड़ी होंगी. मान लें कि भाजपा की सरकार बनती है तो क्या हिंदुत्व के एजेंडे को इसी आक्रामकता से, बिना सनातन मूल्यों की परवाह किए, बिना सांस्कृतिक परंपराओं का निर्वहन किए, सब पर थोपा जाएगा, जैसा पिछले पांच वर्षो में थोपा गया?

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यूं तो हर चुनाव नए अनुभव कराता है और सबक सिखाता है, पर इस बार का चुनाव कुछ अलग ढंग का है. एक तरफ नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हिंदू, मुसलमान व पाकिस्तान के नाम पर चुनाव लड़ा जा रहा है और दूसरी तरफ किसान, मजदूर, बेरोजगारी और विकास के नाम पर. रोचक बात यह है कि 2014 के लोकसभा चुनाव को भाजपा ने गुजरात मॉडल, भ्रष्टाचारमुक्त शासन और विकास के मुद्दे पर लड़ा था. पता नहीं इस बार क्यों वह इन किसी भी मुद्दों पर बात नहीं कर रही है. बीच चुनाव में यह बताना असंभव है कि इस कांटे की टक्कर में ऊंट किस करवट बैठेगा. क्या विपक्षी गठबंधन की सरकार बनेगी या भाजपा की? 

सरकार जिसकी भी बने, चुनौतियां दोनों के सामने बड़ी होंगी. मान लें कि भाजपा की सरकार बनती है तो क्या हिंदुत्व के एजेंडे को इसी आक्रामकता से, बिना सनातन मूल्यों की परवाह किए, बिना सांस्कृतिक परंपराओं का निर्वहन किए, सब पर थोपा जाएगा, जैसा पिछले पांच वर्षो में थोपा गया?

भाजपा व संघ दोनों ही हिंदू धर्म के लिए समर्पित होने का दावा करते हैं पर हिंदू धर्म के मूल सिद्धांतों से परहेज करते हैं जिसके फलस्वरूप भारत का विघटन भी हो सकता है. इसलिए संघ और भाजपा को इस विषय में अपना नजरिया क्रांतिकारी रूप में बदलना होगा. जहां तक गठबंधन की बात है. देशभर में हुए चुनावों से ये तस्वीर साफ हुई है कि विपक्ष की सरकार भी बन सकती है.

अगर ऐसा होता है तो गठबंधन के साथी दलों को यह तय करना होगा कि उनकी एकजुटता अगले लोकसभा चुनाव तक कायम रहे और आम जनता की उम्मीद पूरी कर पाए. आम जनता की अपेक्षाएं बहुत मामूली होती हैं, उसे तो केवल सड़क, बिजली, पानी, रोजगार, फसल का वाजिब दाम और महंगाई पर नियंत्नण से मतलब है. अगर ये सब गठबंधन की सरकार आम जनता को दे पाती है, तभी उसका चुनाव जीतना सार्थक माना जाएगा. पर इससे ज्यादा महत्वपूर्ण होगा, उन लोकतांत्रिक संस्थाओं और मूल्यों का पुनस्र्थापन, जिन पर पिछले पांच वर्षो में कुठाराघात किया गया है. 

लोकतंत्न की खूबसूरती इस बात में है कि मतभेदों का सम्मान किया जाए, समाज के हर वर्ग को अपनी बात कहने की आजादी हो, चुनाव जीतने के बाद, जो दल सरकार बनाए, वो विपक्ष के दलों को  कोसकर अपमानित न करे, बल्कि उसके सहयोग से सरकार चलाए.

टॅग्स :लोकसभा चुनावभारतीय जनता पार्टी (बीजेपी)कांग्रेसआरएसएस
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