खुशियां इतनी तेज आवाज में न मनाएं कि कोई गम में डूब जाए?, 12 से 35 वर्ष की आयु के 1 अरब से अधिक लोगों पर तेज संगीत?

By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: February 25, 2026 05:25 IST2026-02-25T05:25:56+5:302026-02-25T05:25:56+5:30

पिछले साल भी जनवरी माह में हरियाणा के बेरी में एक घर में लड़का पैदा होने की खुशी में डीजे बजाया गया, लेकिन जैसे ही डीजे बजा, नवजात की मौत हो गई थी.

Chandrapur DJ music kills unborn baby Rajura town Don't celebrate so loudly that someone drowns in sorrow Loud music affects over a billion people aged 12 to 35 | खुशियां इतनी तेज आवाज में न मनाएं कि कोई गम में डूब जाए?, 12 से 35 वर्ष की आयु के 1 अरब से अधिक लोगों पर तेज संगीत?

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Highlights आवाज से 13 वर्षीय एक किशोर नाचते-नाचते बेहोश होकर गिर पड़ा और उसकी मौत हो गई थी.बलरामपुर में डीजे की तेज आवाज से एक 40 वर्षीय युवक के सिर की नस फट जाने से मौत हो गई थी. तेज आवाज का सीधा असर हाई ब्लड प्रेशर, एंग्जाइटी और अनिद्रा के रूप में पड़ता है.

चंद्रपुर जिले के राजुरा शहर में डीजे की आवाज से गर्भस्थ शिशु की मौत होने की घटना यह सोचने को बाध्य कर रही है कि ऐसे तरीकों से खुशी मनाने का क्या फायदा जो किसी के लिए मातम का कारण बन जाए! राजुरा में घर के सामने से गुजर रही बारात में बज रहे तेज डीजे की कर्कश आवाज के बाद गर्भवती महिला की तबियत बिगड़ गई और अस्पताल जाने पर पता चला कि गर्भस्थ शिशु की मौत हो चुकी है. पिछले साल भी जनवरी माह में हरियाणा के बेरी में एक घर में लड़का पैदा होने की खुशी में डीजे बजाया गया, लेकिन जैसे ही डीजे बजा, नवजात की मौत हो गई थी.

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में साल भर पहले  डीजे की तेज आवाज से 13 वर्षीय एक किशोर नाचते-नाचते बेहोश होकर गिर पड़ा और उसकी मौत हो गई थी. छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में डीजे की तेज आवाज से एक 40 वर्षीय युवक के सिर की नस फट जाने से मौत हो गई थी.

ऐसी खबरें कई बार आ चुकी हैं कि शादी-विवाह या किसी अन्य समारोह में डीजे बजने के दौरान अचानक कोई गिर पड़ा और उसकी तत्काल मौत हो गई. विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि तेज आवाज का सीधा असर हाई ब्लड प्रेशर, एंग्जाइटी और अनिद्रा के रूप में पड़ता है.

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक 12 से 35 वर्ष की आयु के एक अरब से अधिक लोगों पर तेज संगीत और लंबे समय तक तेज शोर के संपर्क में रहने से सुनने की क्षमता कम होने का खतरा मंडरा रहा है. वर्ष 2023 में यूरोपियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित एक शोध के अनुसार लगातार तेज संगीत और ध्वनि प्रदूषण से हार्ट अटैक का खतरा 20 प्रतिशत तक बढ़ जाता है.

हम इंसानों के लिए 70 डेसिबल या उससे कम की आवाज ही सुरक्षित मानी जाती है. 85 डेसिबल से ऊपर की ध्वनि लंबे समय तक सुनने पर हृदय की धड़कनें असामान्य हो सकती हैं और 120 डेसिबल तक की आवाज कान की झिल्ली को भी फाड़ सकती है. ऐसे में जाहिर है कि 100 से 110 डेसिबल के बीच बजने वाले डीजे हमारे शरीर पर कैसा असर डालते होंगे.

तेज आवाज से जहां मानसिक तनाव पैदा होता है, मन में चिड़चिड़ाहट आती है, सिरदर्द होता है, वहीं यह बहरापन भी ला सकता है. जानवरों के लिए तो डीजे जैसा तेज संगीत और भी खतरनाक होता है क्योंकि कुत्ते-बिल्लियों और पक्षियों की सुनने की क्षमता इंसानों से कई गुना अधिक संवेदनशील होती है.

इसीलिए डीजे या पटाखों की आवाज से वे बेहद तनाव में आ जाते हैं और कई बार तो उन्हें दौरे तक पड़ जाते हैं. इसलिए अगली बार जब हमारा तेज आवाज के जरिये खुशी मनाने का मन करे तो ध्यान रखें कि किसी के लिए यह गम का कारण भी बन सकता है.   

Web Title: Chandrapur DJ music kills unborn baby Rajura town Don't celebrate so loudly that someone drowns in sorrow Loud music affects over a billion people aged 12 to 35

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