मुंबईः मुंबई में हुए बीएमसी चुनाव ने शहर की राजनीति पूरी तरह पलट दी। कई सालों से जिस BMC पर ठाकरे परिवार का असर माना जाता था, इस बार वो टूट गया और BJP + एकनाथ शिंदे की शिवसेना वाली महायुति ने साफ़ बढ़त के साथ जीत हासिल कर ली। महायुति को कुल 227 में से 118 सीटें मिलीं। इसमें BJP को 89 सीटें और शिंदे वाली शिवसेना को 29 सीटें मिलीं। मतलब लोगों ने इस बार “काम-काज और नतीजे” को ज़्यादा महत्व दिया। इस जीत के पीछे सबसे ज़्यादा चर्चा देवेंद्र फडणवीस और अमित सटाम की जोड़ी की है, जिसे “राम–लक्ष्मण” की जोड़ी कहा जा रहा है।
सीएम देवेंद्र फडणवीस ने जनता के सामने अपने अनुभव और मुंबई को आगे ले जाने का विजन सामने रखा वहीं अमित साटम ने ग्राउंड पर प्लानिंग और डेटा आधारित कैंपेनिंग से वोट में बदल दिया। कैंपेन में फडणवीस ने विकास वाले मुद्दों पर जोर दिया—जैसे कोस्टल रोड, मेट्रो का विस्तार, अटल सेतु और नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट और लोगों को ये दिखाने की कोशिश की कि आगे की मुंबई कैसी होगी।
यह विजन उन वोटर्स को पसंद आई जो सिर्फ भाषण नहीं, असली काम देखना चाहते हैं। साटम अगस्त 2025 में मुंबई BJP अध्यक्ष बने और जल्दी ही पार्टी की पूरी टीम को साफ- सुरक्षित मुंबई के नारे के साथ मैदान में उतार दिया। उनकी प्लानिंग और लोगों तक पहुंच का असर ये हुआ कि वोटिंग करीब 65% तक पहुंच गई और “मोदी–फडणवीस” मॉडल को समर्थन मिला।
दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) और MNS ने चुनाव को “मराठी अस्मिता” के मुद्दे पर खड़ा करने की कोशिश की और BJP को बाहरी बताने का नैरेटिव बनाया। लेकिन फडणवीस–साटम टीम ने जवाब में कहा कि मराठी गर्व और भारतीय पहचान अलग नहीं हैं और उन्होंने “सबको साथ लेकर विकास” वाली लाइन पकड़ी।
जीत के बाद BJP ने ₹74,400 करोड़ वाले BMC बजट की योजना बताई है जिसमें स्मार्ट-सिटी सुधार, किफायती घर, पारदर्शी कामकाज और इंफ्रास्ट्रक्चर अपडेट जैसे मुद्दे आगे रखे गए हैं। मैसेज साफ है: मुंबई के लोग अब “ठहराव” नहीं, “आगे बढ़ना” चाहते हैं।
लेखक- राकेश कुमार सिंह, चेयरमैन- भारत उत्थान संघ, महाराणा प्रताप फाउंडेशन, खाना चाहिए फाउंडेशन