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राजनयिकों के परिवार बांग्लादेश से वापस बुलाने के मायने

By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: January 21, 2026 05:53 IST

फिलहाल भारत की सूची में केवल पाकिस्तान, इराक, सूडान और अफगानिस्तान ही ऐसे देश थे जिन्हें नॉन फैमिली कैटेगरी में रखा गया था.

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ठळक मुद्देबांग्लादेश को इस तरह की श्रेणी में रखा है.बांग्लादेश को नॉन फैमिली कैटेगरी में रख रखा है. मौजूद लोगों को बंधक बना लिया था.

एक अहम फैसला लेते हुए भारत ने अपने राजनयिकों के परिवारों को आनन-फानन में वापस बुला लिया है. इसके लिए भारत ने बांग्लादेश को ‘नॉन फैमिली’ कैटेगरी में डाला. इसका अर्थ है कि ये ऐसी जगह है जहां राजनयिक अपने परिवार के साथ नहीं रह सकते. तत्काल प्रभाव से ढाका, चटगांव, खुलना, सिलहट और राजशाही में स्थित भारतीय उच्चायोगों में कार्यरत अधिकारियों के परिवारों को भारत बुला लिया गया. निश्चय ही यह भारतीय अधिकारियों के लिए भी बहुत कठिन रहा होगा क्योंकि कई बच्चे स्कूल में थे. मगर यह समझना होगा कि कोई भी देश इस तरह का निर्णय बहुत विषम परिस्थितियों में ही करता है.

जब तक राजनयिकों के परिवारों के लिए खतरे का स्तर चरम पर नहीं होता है तब तक इस तरह के फैसलों से सरकारें बचती हैं क्योंकि इससे देशों के आपसी संबंध और खराब होते हैं. मगर भारत ने यह निर्णय लिया है तो निश्चय ही बहुत सोच-समझ कर लिया होगा. फिलहाल भारत की सूची में केवल पाकिस्तान, इराक, सूडान और अफगानिस्तान ही ऐसे देश थे जिन्हें नॉन फैमिली कैटेगरी में रखा गया था.

वैसे जानकारी के लिए बता दें कि केवल भारत ही ऐसा देश नहीं है जिसने बांग्लादेश को इस तरह की श्रेणी में रखा है. अमेरिका ने तो पिछले दस साल से बांग्लादेश को नॉन फैमिली कैटेगरी में रख रखा है. दरअसल 1 जुलाई, 2016 को ढाका के होली आर्टिसन कैफे में घुसकर इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों ने बेकरी में मौजूद लोगों को बंधक बना लिया था.

सुरक्षाबलों ने हालांकि  आतंकवादियों को मार गिराया था लेकिन इस आतंकवादी हमले में 20 विदेशी नागरिकों की मौत हो गई थी. इसके बाद कई देशों ने राजनयिकों के परिवारों को बांग्लादेश से वापस बुला लिया. तब से अमेरिका सहित कई देशों ने अपने राजनयिकों को बांग्लादेश परिवार ले जाने की इजाजत नहीं दी है.

बांग्लादेश ने अमेरिका को मनाने की बहुत कोशिशें कीं लेकिन वह नहीं माना. अब भारत ने इस तरह का फैसला लिया है तो निश्चय ही परिवारों को लेकर पुख्ता खुफिया जानकारी जरूर रही होगी अन्यथा भारत इस तरह का कदम नहीं उठाता. दिसंबर 2025 में जिन कट्टरपंथियों ने भारतीय उच्चायोग की तरफ मार्च करना शुरू किया था और जो उनकी मंशा थी,

उसे देखते हुए भारत ने बांग्लादेश के राजदूत को तलब करके अपनी चिंता का इजहार कर दिया था लेकिन हकीकत यह है कि मो. यूनुस की सरकार भारत के खिलाफ विष फैलाने में लगी हुई है इसलिए पुख्ता सुरक्षा की उम्मीद करना बेमानी है. हाल के दिनों में कट्टरपंथियों ने कई ऐसे बांग्लादेशियों को ही मार दिया है जो हिंदू थे.

ऐसे हालात में कोई देश अपने राजनयिकों के परिवारों को असुरक्षित कैसे छोड़ सकता है? बांग्लादेश को परिस्थिति समझनी होगी अन्यथा उसका भी हश्र पाकिस्तान जैसा ही होने वाला है जहां एक बड़ा तबका रोटी के लिए भी तरस रहा है. 

टॅग्स :S JaishankarBangladeshनरेंद्र मोदीपाकिस्ताननेपालश्रीलंकाSri Lanka
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