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अवधेश कुमार का ब्लॉग: PoK पर असाधारण बयान के मायने

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 14, 2020 12:38 IST

पिछले वर्ष विदेश मंत्नी एस. जयशंकर ने भी कहा था कि एक दिन पाक अधिकृत कश्मीर हमारा होगा. गृह मंत्नी अमित शाह का लोकसभा में पिछले वर्ष छह अगस्त का भावनाओं के उफान में दिया गया वह बयान टेलीविजन पर अक्सर दिखता है कि क्या बात करते हो, जान दे देंगे उसके लिए. वे बता रहे थे कि जब मैं जम्मू-कश्मीर की बात करता हूं तो उसमें पाक अधिकृत कश्मीर तथा गिलगित बाल्टिस्तान भी शामिल है.

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थलसेना अध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणो का यह बयान काफी महत्वपूर्ण है कि अगर संसद चाहे तो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को वापस लेने के लिए भारतीय सेना तैयार है. यह एक असाधारण वक्तव्य है. सेना प्रमुख अगर कह रहे हैं कि सेना तैयार है तो इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता.

पाकिस्तान में इस बयान से खलबली मच गई है. पिछले वर्ष विदेश मंत्नी एस. जयशंकर ने भी कहा था कि एक दिन पाक अधिकृत कश्मीर हमारा होगा. गृह मंत्नी अमित शाह का लोकसभा में पिछले वर्ष छह अगस्त का भावनाओं के उफान में दिया गया वह बयान टेलीविजन पर अक्सर दिखता है कि क्या बात करते हो, जान दे देंगे उसके लिए. वे बता रहे थे कि जब मैं जम्मू-कश्मीर की बात करता हूं तो उसमें पाक अधिकृत कश्मीर तथा गिलगित बाल्टिस्तान भी शामिल है.

इस तरह से तीन प्रमुख लोगों के बयान हमारे सामने हैं. किंतु इसमें सबसे महत्वपूर्ण बयान जनरल नरवणो का ही माना जाएगा. आखिर गिलगित बाल्टिस्तान सहित पाक अधिकृत कश्मीर को भारत का भाग बनाने के लिए दो ही स्थितियां हो सकती हैं. वहां के लोग विद्रोह करके भारत में विलय कर लें या फिर सेना कार्रवाई करे. पहली स्थिति में भी सेना की भूमिका होगी क्योंकि विद्रोह के बावजूद पाकिस्तान की सेना हर हाल में उसे पाकिस्तान का भाग बनाए रखने की कोशिश करेगी. भारत में सेना कोई कार्रवाई राजनीतिक नेतृत्व के आदेश पर ही करती है.

इसीलिए जनरल नरवणो ने कहा कि संसद का प्रस्ताव है कि जम्मू-कश्मीर का पूरा क्षेत्न हमारा है, जिसमें पाक अधिकृत कश्मीर भी शामिल है. अगर संसद चाहती है कि उस इलाके पर भी हमारा नियंत्नण हो और हमें यह आदेश मिलता है तो उसके मुताबिक कार्रवाई की जाएगी.

पी.वी. नरसिंह राव सरकार के दौरान फरवरी, 1994 में संसद ने संकल्प प्रस्ताव पारित कर पाक अधिकृत कश्मीर को जम्मू-कश्मीर का क्षेत्न बताते हुए भारत का हिस्सा करार दिया था. तो इसका अर्थ क्या माना जाए? क्या वाकई सेना के अंदर इसकी तैयारी चल रही है? क्या सरकार की ओर से सेना को कुछ संकेत दिया गया है? जब एस. जयशंकर ने बयान दिया तब भी माना गया कि भारत सरकार के अंदर इस पर गहराई से विचार कर कुछ नीति निर्धारित हुई है और अब सेना प्रमुख के बयान के बाद उस पर मुहर लगती दिख रही है.

हालांकि अब पूरा मामला पहले से कहीं ज्यादा जटिल है. गिलगित-बाल्टिस्तान की सीमा चीन और अफगानिस्तान से लगती है और यह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के मुख्य मार्ग पर स्थित है. भारत ने यह कहते हुए चीन से लगातार विरोध जताया है कि वह हमारा क्षेत्न है. भारत को किसी भी कार्रवाई से पहले चीन की संभावित भूमिका पर भी विचार करना होगा.

टॅग्स :पाकिस्तानएलओसी
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