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Artificial Intelligence: अपराधों की रोकथाम में एआई की मदद लेना समय की मांग?

By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: December 18, 2024 05:38 IST

Artificial Intelligence: एआई में पुलिस बलों द्वारा अपराध को रोकने, जांच करने और यहां तक कि हल करने के तरीके को बदलने की क्षमता है.

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ठळक मुद्देइक्का-दुक्का मामलों में ही नहीं बल्कि जहां भी जरूरी हो, इनका इस्तेमाल करना चाहिए.देशों की पुलिस ने अपराधों की जांच में इसकी मदद लेना शुरू कर दिया है.68 प्रतिशत हत्याओं और 58 प्रतिशत हिंसक अपराधों का मामला सुलझाया.

Artificial Intelligence: बीड़ जिले की केज तहसील के मस्साजोग गांव के सरपंच संतोष देशमुख की हत्या का मामला शीतसत्र के पहले ही दिन विधान परिषद में उठाए जाने पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि इस प्रकरण के आराेपी किसी भी दल के करीबी हाें, उन पर कार्रवाई की जाएगी. साथ ही इस मामले की जांच में आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लेने की घाेषणा भी उन्हाेंने की. वस्तुत: आज के अत्याधुनिक तकनीकी के जमाने में ऐसा करना समय की मांग है. सिर्फ इक्का-दुक्का मामलों में ही नहीं बल्कि जहां भी जरूरी हो, इनका इस्तेमाल करना चाहिए. एआई में पुलिस बलों द्वारा अपराध को रोकने, जांच करने और यहां तक कि हल करने के तरीके को बदलने की क्षमता है.

दर्ज किए गए अपराधों के बीच पैटर्न और लिंक को मानव की तुलना में अधिक तेजी से और अधिक सटीक रूप से पहचान कर एआई बड़ी मात्रा में डेटा को तेजी से छांट सकता है और उसका विश्लेषण भी कर सकता है. इसीलिए कई देशों की पुलिस ने अपराधों की जांच में इसकी मदद लेना शुरू कर दिया है.

अमेरिका के मियामी में एआई से पहले पुलिस विभाग केवल 45 प्रतिशत हत्याओं और 38 प्रतिशत से कम हिंसक अपराधों में संदिग्धों को गिरफ्तार करने में सक्षम था, लेकिन 2023 में तकनीक का उपयोग शुरू करने के बाद उसने उस वर्ष हुई 68 प्रतिशत हत्याओं और 58 प्रतिशत हिंसक अपराधों का मामला सुलझाया.

एफबीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार संयुक्त राज्य अमेरिका में हिंसक अपराध दर और संपत्ति अपराध दर में क्रमशः 3.3 प्रतिशत और 6.3 प्रतिशत की गिरावट आई है. ऐसी कई प्रौद्योगिकियां हैं जो पुलिस को अपराध कम करने में मदद कर सकती हैं  और एआई उनमें से एक है. दुनिया भर की कंपनियां और शहर अपराध की रोकथाम और पता लगाने के लिए एआई में निवेश कर रहे हैं.

अर्जेंटीना भी अमेरिका की तरह भविष्य में होने वाले अपराधों की भविष्यवाणी करने और उन्हें रोकने में मदद करने के लिए एआई का उपयोग करने की योजना बना रहा है. हालांकि अपराधी भी अब अपने आपराधिक कृत्यों को अंजाम देने में एआई की मदद ले रहे हैं, लेकिन इससे निपटने के लिए भी पुलिस प्रशासन के पास एआई की मदद लेने के सिवा कोई चारा नहीं है. इसलिए अब किसी एक-दो राज्य में ही नहीं बल्कि पूरे देश में अपराधों को सुलझाने और उनकी रोकथाम के लिए भी एआई व अन्य अत्याधुनिक तकनीकों की मदद लेनी चाहिए.  

टॅग्स :आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसमहाराष्ट्रदेवेंद्र फड़नवीस
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