साइबर क्राइम के खिलाफ खुला मोर्चा, ठगी से आजादी का गृह मंत्री ने किया ऐलान 

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: February 26, 2026 14:18 IST2026-02-26T14:17:49+5:302026-02-26T14:18:22+5:30

बैंकों, कानूनी एजेंसियों और अन्य भागीदारों के साथ मिलकर साइबर-फ्रॉड की घटना को रोकने और समय पर उसकी पहचान करने में बड़ी सफलता प्राप्त की है। 

amit shah Open front against cyber crime Home Minister declares freedom from fraud blog Vikram Upadhyay | साइबर क्राइम के खिलाफ खुला मोर्चा, ठगी से आजादी का गृह मंत्री ने किया ऐलान 

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Highlightsगृहमंत्रालय पर इस व्यवस्था की जिम्मेदारी है और अमित शाह इसको लेकर बेहद संवेदनशील हैं।दुनिया भर में साइबर अपराध बढ़ रहे हो तो भारत में यह थोड़ी गिरावट भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

विक्रम उपाध्याय

भारत को पूरी दुनिया का ग्रोथ इंजन माना जा रहा है। विश्व की तमाम बड़ी कंपनियां अपनी पूंजी और टेक्नोलॉजी लेकर भारत में आ रही हैं, ऐसे में जरूरी है कि उन्हें एक सुरक्षित माहौल और लीगल फ्रेमवर्क उपलब्ध कराया जाए। साइबर सिक्योरिटी भी इसी फ्रेमवर्क का हिस्सा है, क्योंकि पूरा ग्लोबल बिज़नेस ही क्लाउड डेटा स्टोरेज और ऑनलाइन मैनेजमेंट पर आधारित है। भारत की साइबर सिक्योरिटी मोदी सरकार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है। गृहमंत्रालय पर इस व्यवस्था की जिम्मेदारी है और अमित शाह इसको लेकर बेहद संवेदनशील हैं।

फ्रॉड इकॉनमी के कई टूल्स और तरीके ईजाद हो गए हैं, इनमें डिजिटल गिरफ्तारियां, नकली इन्वेस्टमेंट एप्प और बैंक ओटीपी जैसे तरीके आम हो गए हैं। इसके अलावा भी कई हाई टेक तरीके साइबर फ्रॉड के लिए इस्तेमाल किये जा रहे हैं। गृहमंत्री अमित शाह ने हाल ही में मीडिया को यह जानकारी दी कि 2024–2025 के दौरान, इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर ने बैंकों, कानूनी एजेंसियों और अन्य भागीदारों के साथ मिलकर साइबर-फ्रॉड की घटना को रोकने और समय पर उसकी पहचान करने में बड़ी सफलता प्राप्त की है। 

एक तरफ वैश्विक साइबर फ्रॉड में बढ़ोतरी हो रही है, वही भारत में कमी आई है। सरकारी आकड़े के अनुसार 2024 में जहां ₹22,849 करोड़ रुपये की साइबर-फ्रॉड की रिपोर्ट दर्ज हुईं वहीं 2025 में ₹22,504 करोड़ रुपये के फ्रॉड की घटना सामने आई। हालांकि यह 1.55% की मामूली गिरावट है, पर जब दुनिया भर में साइबर अपराध बढ़ रहे हो तो भारत में यह थोड़ी गिरावट भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

विश्व में साइबर फ्रॉड की घटनाओं में वृद्धि दर 10 प्रतिशत से अधिक है। कुछ समय पहले डिजिटल अरेस्ट की खबरों की बाढ़ आ गई थी। साइबर अपराधी डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों से लाखों करोड़ों रुपये ठग रहे थे। यह पूरे समाज के लिए चिंता की बात थी। सरकार के लिए भी यह एक बड़ी चुनौती बन कर खड़ी हो गई।

गृह मंत्रालय ने इस चुनौती से पार पाने के लिए एक व्यापक योजना बनाई। मंत्रालय के तहत गठित इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर, जिसे I4C के नाम से भी जानते हैं, ने तमाम कानून लागू करने वाली एजेंसियों, थ्रेट एनालिटिक्स, सस्पेक्ट रजिस्ट्री और समन्वय  प्लेटफॉर्म से चलने वाले, राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को साथ लेकर एक डेटा आधारित ऑपरेशन चलाया और इस डिजिटल अरेस्ट स्कैम नेटवर्क को काफी हद तक खत्म कर दिया। पिछले साल के मुकाबले 2025 में डिजिटल अरेस्ट के केस में 86 प्रतिशत की कमी आ गई और वित्तीय नुकसान भी 66.4 प्रतिशत कम हुआ।

2023 और 2024 में डिजिटल अरेस्ट जैसे फ्रॉड की संख्या अचानक 465 प्रतिशत बढ़ गई थी। गृहमंत्री अमित शाह ने साइबर क्राइम से आजादी का नया नारा दिया है, जैसे उन्होंने नक्सलवाद से आजादी का नारा दिया था। उन्होंने भारत की साइबर सिक्योरिटी को अंतरराष्ट्रीय पैरामीटर के बराबर करने का प्रयास किया है।

विकसित देशों की तरह भारत में भी साइबर सपोर्ट स्ट्रक्चर पक्का करने की कोशिश की गई है। इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन द्वारा जारी ग्लोबल साइबरसिक्योरिटी इंडेक्स 2024 के अनुसार भारत ने 100 में से 98.49 के शानदार स्कोर के साथ सबसे ऊंचा टियर 1 स्टेटस  हासिल किया, जो यह बताता है कि मोदी सरकार और खास कर गृह मंत्रालय कानूनी, टेक्निकल, ऑर्गेनाइज़ेशनल और कैपेसिटी-बिल्डिंग पिलर के क्षेत्र में साइबरसिक्योरिटी के प्रति कितने समर्पित हैं। इस समय देश के लगभग सभी जिलों में पुलिस के अलग साइबर सेल स्थापित कर दिए गए हैं।

आकड़ों के आधार पर देखें तो देश में इस समय कुल 459 विशेष साइबरक्राइम पुलिस स्टेशन स्थापित हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने साइबर अपराध से जुड़े सभी मामलों के बीच समन्वय के लिए एक नोडल पॉइंट के रूप में इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर बनाया है, जिसे I4C भी कहा जाता है।

इस I4C में शामिल गृह मंत्रालय के अधिकारियों को शामिल कर मेवात, जामताड़ा, अहमदाबाद, हैदराबाद, चंडीगढ़, विशाखापत्तनम और गुवाहाटी जैसी जगहों पर साइबरक्राइम हॉटस्पॉट को कवर करने के लिए सात जॉइंट साइबर कोऑर्डिनेशन टीमें बनाई गई हैं, जिन्हें जेसीसीटी कहा जाता है। इसके अलावा गृह मंत्रालय के सहयोग से 33 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में साइबर फोरेंसिक- लैब भी बनाए गए हैं। 

गृहमंत्री ने साइबरक्राइम की शिकायतों को क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम के दायरे में लाने के लिए ई एफआईआर का प्रावधान शुरू किया है, क्योंकि नेशनल साइबर क्राइम रेपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज किए जाने के बाद भी लोगों को कोइ खास मदद नहीं मिल पा रही थी। ठग लिए गए पैसे वापस पाने और अपराधियों को सज़ा दिलाने में भी दिक्कतें आती थीं।

अमित शाह ने निर्देश दिया कि साइबर फ्रॉड के लिए ई ज़ीरो एफआईआर दर्ज किया जाए। अब फाइनेंशियल साइबरक्राइम की शिकायत अपने आप इलेक्ट्रॉनिक तरीके से पहले ज़ीरो एफआईआर में और फिर नियमित एफआईआर में बदल जाती है। केंद्र सरकार की पहल पर गैर-कानूनी डिजिटल लेंडिंग ऐप्स को भी हटाया गया है। गूगल एवं एप्पल प्ले स्टोर से कई संदिग्ध ऐप्स को डिलीट कराया जा चुका  है।

इसके अलावा ऑफशोर बेटिंग व गैंबलिंग कंटेंट के 5,000 से ज़्यादा मामलों की पहचान की गई और उन्हें हटाने की कारवाई की जा रही है। स्कैम इंडिकेटर्स को समय-समय पर मेटा, गूगल, टेलीग्राम, एप्पल और भारतीय बैंकों व फिनटेक कंपनियों के साथ भी सांझा किया जा रहा है। एक विशेष ऑपरेशन के जरिए कंबोडिया, चीन, ताइवान, पाकिस्तान और नेपाल के साथ क्रॉस-बॉर्डर नेटवर्क को भी पकड़ा गया है।

म्यूल अकाउंट मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क भी गृह मंत्रालय के निशाने पर है। म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल क्राइम से आने वाले पैसे को तेज़ी से भेजने के लिए किया जाता है। सितंबर 2025 में जहां 42 प्रतिशत म्यूल अकाउंट्स एक हफ़्ते से ज़्यादा समय तक एक्टिव रहे और क्राइम की कमाई को रूट किया, वहीं जनवरी 2026 में सिर्फ़ 3 प्रतिशत ही म्यूल अकाउंट्स ही एक हफ़्ते से ज़्यादा समय तक एक्टिव रह सके। 

साइबर क्राइम के खिलाफ़ सबसे बड़ा हथियार जागरूकता है। इस समय पूरे भारत में तेज़ी से और 360-डिग्री अप्रोच के साथ जागरूकता कैंपेन चलाया जा रह है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुद अपने “मन की बात” कार्यक्रम में डिजिटल अरेस्ट स्कैम के खिलाफ अभियान का नेतृत्व किया। उन्होंने नया डिजिटल सेफ्टी मंत्र दिया - रुको-सोचो- फिर कार्रवाई करो।

अलग अलग टीवी चैनलों के अलावा अलग-अलग भागीदारों और राज्यों की पुलिस द्वारा भी यह अभियान चलाया जा रहा है। खासकर डिजिटल अरेस्ट और इन्वेस्टमेंट स्कैम के प्रति लोगों को सचेत किया जा रहा है। टी-20 वर्ल्ड कप मैच के दौरान भी इस विषय पर टीवी विज्ञापन चल रहे हैं। साइबरक्राइम से ठगी, अब दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के बराबर बन गई है।

इस समय हर 39 सेकंड में एक साइबर अपराध हो रहा है। जाहिर है यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बहुत बड़ी चुनौती है। एक अनुमान के अनुसार साइबरक्राइम के जरिए लूट की राशि 2026 में 15 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो सकती है, लेकिन भारत, इससे खुद को बचाने में पूरी तरह से तैयार नजर आ रहा है। कम से कम गृहमंत्री की बातों से यही झलकता है।

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