अमित शाह का अब नशे पर करारा प्रहार

By विजय दर्डा | Updated: February 23, 2026 05:49 IST2026-02-23T05:49:11+5:302026-02-23T05:49:11+5:30

नक्सलवाद के अंत का लक्ष्य करीब-करीब पूरा, अब ड्रग्स के सौदागरों के खात्मे का अभियान.

Amit Shah now launches scathing attack drug abuse goal ending Naxalism almost achieved campaign eliminate drug dealers underway blog Dr Vijay Darda | अमित शाह का अब नशे पर करारा प्रहार

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Highlightsकगार पर पहुंचा कर नजीर पेश की है कि नेतृत्वकर्ता में दम हो तो कुछ भी असंभव नहीं है.ड्रग्स कार्टेल की अब बिल्कुल ही खैर नहीं! इस देश में उनके लिए कोई जगह नहीं!प्रभावशाली नेताओं की जान ली, क्या वाकई इतनी जल्दी खत्म होना संभव है?

ड्रग्स कार्टेल को नेस्तनाबूद करना आसान काम नहीं लेकिन लक्ष्य के प्रति दृढ़ता हो तो कुछ भी असंभव नहीं. अभी हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात हुई. मैंने उनसे कहा कि आपने एक निश्चित अवधि में नक्सलवाद को खात्मे की कगार पर पहुंचा कर नजीर पेश की है कि नेतृत्वकर्ता में दम हो तो कुछ भी असंभव नहीं है.

अब आपसे गुजारिश है कि देश को नशे के सौदागरों से मुक्ति दिलाइए. ड्रग्स कार्टेल का खात्मा करिए! यह आसान काम नहीं है लेकिन आप में यह करिश्मा करने का दम है. उन्होंने अपनी खुशनुमा मुस्कान के साथ बस इतना कहा कि देखते जाइए, ड्रग्स कार्टेल की अब बिल्कुल ही खैर नहीं! इस देश में उनके लिए कोई जगह नहीं!

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर वैसे तो हमेशा ही विश्वास का भाव रहा है लेकिन जिस तरह से उन्होंने नक्सलवाद को खात्मे की कगार पर पहुंचा दिया है, उसने उनकी दृढ़ता, साहस और लक्ष्य के प्रति एकाग्रता का सबको मुरीद बना दिया है. उन्होंने मार्च 2026 तक नक्सलियों के खात्मे की घोषणा की थी तो सबको शंका थी कि 55 साल से भी ज्यादा पुराना यह रक्तरंजित रोग, जिसने न जाने कितने नेताओं, पुलिस अधिकारियों और प्रभावशाली नेताओं की जान ली, क्या वाकई इतनी जल्दी खत्म होना संभव है?

मगर अमित शाह दृढ़ थे कि खात्मा तय कर लिया है तो फिर लक्ष्य पूरा होगा! दरअसल उन्होंने जब घोषणा की थी, उसके काफी पहले से संबंधित राज्यों के साथ व्यूह रचना की जा रही थी. तैयारी लीकप्रूफ थी. लक्ष्य स्पष्ट था. योग्य अधिकारियों को तैनात किया जा चुका था. संसाधनों में कोई कमी नहीं रखी गई.

भूले-भटकों के लिए एक हाथ में स्नेह भरा स्पर्श था तो कट्टरता दिखाने वालों के लिए आग उगलती बंदूकें थीं. सफल नेतृत्वकर्ता का यही अंदाज होता है! निश्चित रूप से अब बारी ड्रग्स के सौदागरों की है और केंद्रीय स्तर पर सघन व्यूह रचना के साथ काम चल भी रहा है. आम धारणा यही है कि  अमित शाह घोषणा से ज्यादा परिणामों में विश्वास करने वाले नेता हैं.

जब थोड़ी सी जानकारी सामने आती है तो ढेर सारा काम हो चुका होता है. अभी मैं गोवा में था. वहां के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत और फिर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और दोनों राज्यों के आला पुलिस अधिकारियों से मैं बात कर रहा था तो पता चला कि ड्रग्स कार्टेल के खिलाफ कितनी सघन तैयारी चल रही है.

शायद कम ही लोगों को पता होगा कि केंद्र सरकार ने 15 अगस्त 2020 को नशामुक्त भारत अभियान की घोषणा की थी. ऐसा नहीं कि अचानक घोषणा कर दी गई हो! उसके पहले 2018 में एक सर्वेक्षण किया गया जिसकी रिपोर्ट 2019 में आई.  निष्कर्ष चौंकाने वाले थे. पता चला कि 16 करोड़ लोग शराब का सेवन करते हैं जिनमें से 5.7 करोड़ से ज्यादा लोग गंभीर स्थिति में हैं.

दूसरे स्थान पर भांग है जिसका सेवन करीब 3.1 करोड़ लोग करते हैं. करीब 25 लाख लोग गंभीर लत से पीड़ित हैं. लगभग  2.26 करोड़ लोग अफीम खाते हैं जिनमें 77 लाख लोग गंभीर हालत में हैं. करीब 8.5 लाख लोग नसों में इंजेक्शन के माध्यम से नशीली दवाएं लेते हैं.  उत्तर प्रदेश, पंजाब, दिल्ली, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों में ऐसे लोगों की संख्या ज्यादा है.

इतना ही नहीं सूंघ कर नशा करने वालों की संख्या भी काफी है. इस रिपोर्ट के आधार पर ही योजना बनी और नशे के सौदागरों की नकेल कसने का काम प्रारंभ हुआ.आपको याद होगा कि पिछले साल सितंबर में राष्ट्रीय नारकोटिक्स टास्क फोर्स के दूसरे राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह  ने बड़ा स्पष्ट ब्यौरा दिया था.

उन्होंने टास्क फोर्स से कहा था कि भारत में ड्रग्स कार्टेल के तीन चरण हैं. पहला जो विदेश में बैठा है और सीमा से ड्रग्स अंदर भेजता है. दूसरा जो देश के भीतर है और विभिन्न राज्यों तक ड्रग्स पहुंचाता है और तीसरा जो स्थानीय स्तर पर ड्रग्स की पुड़िया चौक-चौराहों तक पहुंचाता है. तीनों कार्टेल पर एक साथ पूरी शक्ति के साथ आघात करने की जरूरत है. और यह आघात  पूरी शक्ति के साथ चल रहा है.

हमारी खुफिया एजेंसियां बेहतरीन काम कर रही हैं. आप जानकर आश्चर्यचकित रह जाएंगे कि भारत की जेलों में करीब 16 हजार ड्रग्स तस्कर बंद हैं. ये तस्कर बांग्लादेश, फिलीपींस, घाना, म्यांमार, मलेशिया और नाइजीरिया जैसे देशों से हैं. इन्हें डिपोर्ट करने का काम प्रारंभ हो चुका है. जो ड्रग्स तस्कर विदेशों में बैठे हैं, उनके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया भी चल रही है.

मगर सबसे बड़ा अभियान तो इस बात को लेकर चल रहा है कि बॉर्डर से ड्रग्स की तस्करी भारत में हो ही नहीं पाए! निश्चित रूप से यह आसान काम नहीं है क्योंकि ड्रग्स कार्टेल का नेटवर्क बड़ा पुख्ता है. ड्रग्स के धंधे में अथाह पैसा है जिसका उपयोग प्रलोभन से लेकर धमकी देने या जान लेने तक में किया जाता है.

पंजाब और राजस्थान बॉर्डर से लेकर गुजरात में समुद्री सीमा तक ड्रग्स तस्करों की मदद पाकिस्तानी आर्मी और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई कर रही है. ड्रग्स भेजने के लिए तस्करों को ड्रोन भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं! दूसरा बड़ा रास्ता है गुजरात का समुद्र तट. खासकर हेरोइन नाम का नशा कंटेनर में छुपा कर तस्करी करने के कई प्रकरण सामने आ चुके हैं.

पांच साल पहले गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर ऐसे ही एक कंटेनर में छिपा कर लाई गई 21 हजार करोड़ की हेरोइन पकड़ी गई थी. इसके अलावा बिहार और उत्तरप्रदेश में नेपाल के रास्ते तो पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में म्यांमार और बांग्लादेश के रास्ते ड्रग्स की तस्करी हो रही है. और ये सारे ड्रग्स तस्कर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं.

मैक्सिको, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, थाईलैंड, फिलीपींस, नेपाल, म्यांमार से लेकर नाइजीरिया और घाना तक के ड्रग्स कार्टेल एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं. वे एक-दूसरे के नेटवर्क का उपयोग भी करते हैं. ऐसी स्थिति में लड़ाई निश्चय ही बहुत बड़ी है. मगर नरेंद्र मोदी का नेतृत्व और अमित शाह की दृढ़ता पर भरोसा किया जाना चाहिए कि जिस तरह भारत ने नक्सलवाद के खिलाफ जंग जीती है.

ड्रग्स कार्टेल को भी नेस्तनाबूद करने में हम सफल होंगे. अमित शाह जी, देश आपके साथ है. एक बात और कहना चाहता हूं कि ड्रग्स के खिलाफ इस लड़ाई में सबसे बड़ी भूमिका हमारे युवा, हमारे शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता निभा सकते हैं. कार्रवाई तो पुलिस करेगी लेकिन ये सभी लोग खुफिया सूचना के सूत्र तो बन ही सकते हैं. यह मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि ड्रग्स के सौदागरों का जाल गांव-गांव तक फैला है और हमारे युवाओं को ही वो शिकार बना रहे हैं.  

Web Title: Amit Shah now launches scathing attack drug abuse goal ending Naxalism almost achieved campaign eliminate drug dealers underway blog Dr Vijay Darda

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