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चीन के खिलाफ भारत का मजबूती से साथ देता अमेरिका

By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: March 17, 2023 15:35 IST

अमेरिका के दो सीनेटरों ने कांग्रेस में अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा बताते हुए एक प्रस्ताव पेश किया है और साथ ही चीन द्वारा वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को बदलने की कोशिश की निंदा की गई है।

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ठळक मुद्देअमेरिका की चीन को दो टूक, कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा हैअमेरिका ने चीन द्वारा वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को बदलने की कोशिश की भी निंदा की हैअमेरिका के इस कदम से चीन की विस्तारवाद की नीति को तगड़ा झटका लगा है

अरुणाचल प्रदेश पर निगाहें गड़ाए चीन को अमेरिका ने दो टूक कहा है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है। इससे जुड़ा एक प्रस्ताव अमेरिका के दो सीनेटरों ने सदन में लाया। इस प्रस्ताव में अरुणाचल को भारत का अभिन्न हिस्सा तो बताया ही गया है, इसके अलावा वास्तविक नियंत्रण रेखा(एलएसी) को बदलने की कोशिश की निंदा की गई।

इस प्रस्ताव का दूरगामी असर हो सकता है और चीन की विस्तारवाद की नीति को तगड़ा झटका लग सकता है। जैसा कि दुनिया देख रही है कि हाल के दिनों में चीन अपनी विस्तारवादी छवि पर चलते हुए उग्र विदेश नीति का पालन करता हुआ दिख रहा है लेकिन अमेरिका भारत की यथास्थिति का समर्थन करता है और यह अपने आप में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत और चीन के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है।

चीन, अरुणाचल प्रदेश के करीब 90 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर अपना दावा करता है। अमेरिका को लगता है कि चीन लगातार हिंद प्रशांत महासागर में आजादी के लिए खतरा बना हुआ है। इसलिए उसे अपने रणनीतिक साझेदारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होना चाहिए, खासकर भारत के साथ। चीन अब एलएसी पर पूर्वी सेक्टर में आक्रामकता दिखा रहा है।

मालूम हो कि चीन की सेना सीमा पर यथास्थिति को बदलने की कोशिश कर रही है, इसके लिए चीन की सेना सीमा पर गांवों को बसा रही है। इसके साथ ही चीनी भाषा में लिखा नया नक्शा जारी किया है, जिसमें अरुणाचल प्रदेश को चीन का हिस्सा बताया गया है। बीते दिनों भारत और चीन की सेनाओं के बीच हिंसक झड़पें भी हुई थीं। इन्हीं सब घटनाओं के बीच अमेरिका का अरुणाचल प्रदेश पर रुख साफ है, वह इसे भारत का अभिन्न अंग मानता है, न कि पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना का। यह पहला मौका है जब सीनेट की तरफ से इस तरह का कोई प्रस्ताव लाकर भारत का साथ देने का वादा किया गया है।

अमेरिका द्वारा इस संबंध में दिए गए एक प्रस्ताव में सीमावर्ती इलाकों में चीन की ओर से किए जा रहे निर्माण, मंदारिन भाषा में स्थानीय शहरों के नक्शों की छपाई, अरुणाचल प्रदेश को अपने क्षेत्र में दिखाने की कोशिश जैसे कदमों की निंदा की गई है और चीनी आक्रामकता के खिलाफ भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की गई है। डोकलाम में भारत और चीन के बीच हुए टकराव के लगभग 6 साल बाद आए अमेरिका के इस स्पष्ट रुख से इस बात की पुष्टि हो गई है कि अमेरिका मैकमोहन रेखा को भारत और चीन के बीच अंतरराष्ट्रीय रेखा के रूप में मान्यता देता है।

चीन ने पिछले साल ही अरुणाचल प्रदेश के 15 इलाकों के नाम बदल दिए थे। भारत सरकार ने इस पर सख्त आपत्ति जताई थी। भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और रहेगा। अंतरराष्ट्रीय मानचित्र में भी अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा माना गया है और अब अमेरिका की ओर से इस तरह का प्रस्ताव लाकर भारत का साथ देने का वादा करना सराहनीय है।

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