सत्ता में साथ रहे हों या नहीं दादा ‘मित्र’ थे और बने रहे!
By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 29, 2026 09:54 IST2026-01-29T05:50:28+5:302026-01-29T09:54:36+5:30
Ajit Pawar Plane Crash Live updates: राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से महाराष्ट्र में कार्य करते समय मुझे उनकी कार्यशैली का प्रत्यक्ष रूप से अनुभव करने का अवसर मिला. भूमि अधिग्रहण सहित कई प्रकार की अड़चनें आईं.

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Ajit Pawar Plane Crash Live updates: राजनीतिक पदों और भूमिकाओं से परे हमने एक-दूसरे के प्रति व्यक्तिगत मित्रता को सहेजा. अजित दादा और मेरी मित्रता राजनीतिक मतभेदों से कहीं ऊपर थी. हमने कई वर्षों तक विधानसभा में साथ-साथ काम किया. एक-दूसरे पर राजनीतिक टीका-टिप्पणी भी की, लेकिन हमारी मित्रता में कभी अंतर नहीं आया. जनहित के किसी मुद्दे पर मैंने कोई अनुरोध किया हो और अजित दादा ने उसे स्वीकार न किया हो, ऐसा कभी नहीं हुआ. और, दादा ने जनहित से जुड़ा कोई मुद्दा मेरे सामने रखा हो और मैंने उसे सकारात्मक तरीके से सुलझाने का प्रयास न किया हो, ऐसा भी कभी नहीं हुआ. हमारी मित्रता राजनीति से परे थी. पश्चिम महाराष्ट्र के विकसित सहकारी क्षेत्र से जो बड़े राजनीतिक नेता उभरकर सामने आए, उनमें अजित दादा का नाम अत्यंत महत्वपूर्ण है.
करीब चार दशकों तक वे राजनीति और सार्वजनिक जीवन में निरंतर सक्रिय रहे. राज्य के विभिन्न विभागों के मंत्री के रूप में उन्होंने जिम्मेदारियां संभालीं. महाराष्ट्र का विकास उनके जीवन का प्रमुख लक्ष्य था. सामान्यतः राजनीतिक नेताओं को लोगों और कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलना पड़ता है, लगातार मीठा बोलना पड़ता है. कई लोगों को लगता है कि स्पष्ट रूप से बोलने से गलत संदेश जा सकता है,
लेकिन अजित दादा इस प्रवृत्ति के अपवाद थे. वे जितने कुशल प्रशासक थे, उतने ही स्पष्ट वक्ता भी थे. मुझे उनका यह स्वभाव बहुत पसंद था. यदि उनकी राय अनुकूल होती तो वे बिना लाग-लपेट के कह देते. कोई काम संभव न हो तो भी स्पष्ट रूप से बता देते. लेकिन जिस काम के लिए वे सहमति दे देते, उसे अंजाम तक पहुंचाने की जिम्मेदारी स्वयं उठाते थे.
यह मैंने कई बार अनुभव किया है. उनके इन नेतृत्व गुणों के कारण शासन-प्रशासन में उनके प्रति गहरा विश्वास था. प्रशासन पर मजबूत पकड़ रखते हुए जनता के हित में सही निर्णय लेने की उनकी क्षमता समय-समय पर प्रमाणित हुई. साथ ही, उनका जनता से सरोकार भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता था.
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से महाराष्ट्र में कार्य करते समय मुझे उनकी कार्यशैली का प्रत्यक्ष रूप से अनुभव करने का अवसर मिला. भूमि अधिग्रहण सहित कई प्रकार की अड़चनें आईं, लेकिन महाराष्ट्र के विकास को केंद्र में रखते हुए उन्होंने इन सभी कार्यों को पूरी ताकत से समर्थन दिया. राजनीति में कभी साथ मिलता है, कभी नहीं. कभी पार्टियां एक दूसरे का साथ देती हैं, कभी नहीं देतीं.
लेकिन हमारी मित्रता इन बातों पर आधारित नहीं थी. इसलिए सत्ता में साथ हों या न हों, हमारे संबंध हमेशा एक जैसे बने रहे, अंतिम क्षण तक कायम रहे. राजनीतिक पदों और जिम्मेदारियों से परे, व्यक्तिगत स्तर की मित्रता को हमने हमेशा संजोए रखा. मेरे लिए यही बात सबसे अधिक मायने रखती है.
अजित दादा राजनीति में भी और राजनीति से अलग भी मेरे अत्यंत अच्छे मित्र थे. उन्होंने वरिष्ठ नेता शरद पवार की विरासत को बखूबी आगे बढ़ाया. महाराष्ट्र को खुशहाल, समृद्ध और संपन्न बनाने की क्षमता उनमें थी. हमने एक दमदार, दिलदार और असाधारण निर्णय क्षमता वाले नेता को खो दिया है. उनका यूं अचानक चले जाना मेरे लिए अपूरणीय क्षति है.