World TB Day: टीबीमुक्त भारत की ओर बढ़ते कदम
By योगेश कुमार गोयल | Updated: March 24, 2026 05:37 IST2026-03-24T05:37:35+5:302026-03-24T05:37:35+5:30
World TB Day: विश्वभर में होने वाली मौतों के शीर्ष 10 कारणों में से एक तथा एकल संक्रामक कारक से होने वाली मौतों में सबसे प्रमुख है.

सांकेतिक फोटो
World TB Day: तपेदिक, जिसे हम टीबी, क्षय रोग या ट्यूबरकुलोसिस के नाम से जानते हैं, आज भी मानव सभ्यता के समक्ष एक गंभीर चुनौती बना हुआ है. हर वर्ष 24 मार्च को मनाया जाने वाला ‘विश्व टीबी दिवस’ न केवल इस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर है बल्कि यह वैश्विक समुदाय को एकजुट होकर इस संक्रामक रोग के उन्मूलन का संकल्प लेने की प्रेरणा भी देता है. वर्ष 2026 की थीम ‘हां! हम टीबी को खत्म कर सकते हैं: देशों के नेतृत्व में, लोगों की शक्ति से’ इस दिशा में सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता को रेखांकित करती है. टीबी एक जीवाणु जनित रोग है, जो मुख्यतः फेफड़ों को प्रभावित करता है और संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से फैलता है. यह रोग भले ही इलाज योग्य और रोके जाने योग्य हो लेकिन आज भी विश्व स्तर पर यह मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक टीबी दुनिया में मृत्यु के सबसे घातक और संक्रामक कारकों में से एक है. यह विश्वभर में होने वाली मौतों के शीर्ष 10 कारणों में से एक तथा एकल संक्रामक कारक से होने वाली मौतों में सबसे प्रमुख है. टीबी के कारण प्रतिवर्ष दुनियाभर में करीब 15 लाख लोग मौत की नींद सो जाते हैं. इतिहास के पन्नों में झांकें तो टीबी का अस्तित्व हजारों वर्षों पुराना है.
प्राचीन यूनान में इसे ‘फथिसिस’, रोम में ‘टैब’ और मध्यकाल में ‘स्क्रोफुला’ कहा जाता था. वर्ष 1882 में जर्मन वैज्ञानिक डॉ. रॉबर्ट कोच द्वारा टीबी के जीवाणु माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस की खोज ने इस रोग की पहचान और उपचार की दिशा में क्रांतिकारी परिवर्तन किया. इसी ऐतिहासिक उपलब्धि की स्मृति में 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस मनाया जाता है.
यदि वर्तमान परिदृश्य की बात करें तो विश्व स्वास्थ्य संगठन की ‘वैश्विक क्षय रोग (टीबी) रिपोर्ट 2025’ भारत के लिए उम्मीद की एक नई किरण लेकर आई है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत में टीबी के मामलों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है. वर्ष 2015 में जहां प्रति लाख जनसंख्या पर 237 मामले थे.
वहीं रिपोर्ट के मुताबिक 2024 तक यह घटकर 187 प्रति लाख रह जाने का अनुमान है यानी लगभग 21 प्रतिशत की कमी, जो वैश्विक औसत से लगभग दोगुनी गति है. यह उपलब्धि इसका प्रमाण है कि भारत टीबी उन्मूलन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.