World Cancer Day 2026: स्वास्थ्य तंत्र की अग्निपरीक्षा बनता कैंसर
By योगेश कुमार गोयल | Updated: February 4, 2026 06:05 IST2026-02-04T06:05:34+5:302026-02-04T06:05:34+5:30
World Cancer Day 2026: वर्ष 2005 में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिवर्ष 4 फरवरी को ‘विश्व कैंसर दिवस’ मनाने का निर्णय लिया गया ताकि लोगों को इस भयानक बीमारी से होने वाले नुकसान के बारे में बताया जा सके.

सांकेतिक फोटो
World Cancer Day 2026: लोगों को कैंसर होने के संभावित कारणों के प्रति जागरूक करने, प्राथमिक स्तर पर कैंसर की पहचान करने और इसके शीघ्र निदान तथा रोकथाम के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 4 फरवरी को ‘विश्व कैंसर दिवस’ मनाया जाता है. कैंसर आज न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में ऐसी भयानक बीमारी बन चुका है कि तमाम प्रयासों के बावजूद मरीजों की संख्या में आशातीत कमी नहीं आ रही और लाखों लोग इसके कारण प्रतिवर्ष मारे जा रहे हैं.
इसी कारण वर्ष 2005 में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिवर्ष 4 फरवरी को ‘विश्व कैंसर दिवस’ मनाने का निर्णय लिया गया ताकि लोगों को इस भयानक बीमारी से होने वाले नुकसान के बारे में बताया जा सके और ज्यादा से ज्यादा जागरूक किया जा सके. कैंसर आज वैश्विक स्तर पर असमय मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल हो चुका है और इसकी भयावहता लगातार बढ़ रही है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन और ग्लोबोकैन की रिपोर्टों के अनुसार दुनियाभर में हर वर्ष लगभग एक करोड़ लोगों की मृत्यु कैंसर के कारण होती है. भारत में स्थिति और भी चिंताजनक है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2020 में 7.7 लाख, 2021 में 7.89 लाख और 2022 में 8.08 लाख लोगों की जान कैंसर ने ली.
डब्ल्यूएचओ का स्पष्ट आकलन है कि यदि समय रहते रोकथाम, जांच और जीवनशैली में सुधार नहीं किया गया तो भारत में कैंसर की स्थिति आने वाले वर्षों में विस्फोटक रूप ले सकती है. भारत में कैंसर असमय मृत्यु का चौथा सबसे बड़ा कारण है. वर्ष 2024 में 15.33 लाख नए मामले सामने आए,
जो पिछले दस वर्षों में 36 प्रतिशत वृद्धि को दर्शाते हैं. प्रति एक लाख आबादी पर औसतन 100 कैंसर रोगी हैं, जिनमें से 70 प्रतिशत मरीज ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं. हर साल लगभग 1.43 लाख ओरल कैंसर और 80 हजार फेफड़ों के कैंसर के नए मामले दर्ज होते हैं. चिंताजनक तथ्य यह भी है कि 48 प्रतिशत स्तन कैंसर पीड़ित महिलाएं 50 वर्ष से कम उम्र की हैं.
दुनियाभर में कैंसर से लड़ने और इस पर विजय पाने के चिकित्सीय उपाय हो रहे हैं और अब चिकित्सा के क्षेत्र में शोधकर्ताओं के प्रयासों के चलते कैंसर का शुरुआती स्टेज में इलाज संभव है. यह बीमारी किसी भी व्यक्ति को किसी भी उम्र में हो सकती है लेकिन यदि सही समय पर इसका पता लगा लिया जाए तो इसका सौ फीसदी उपचार भी संभव है.
अब यह पहले की भांति पूर्ण रूप से लाइलाज बीमारी नहीं रही. लोग इस बीमारी, इसके लक्षणों और इसके भयावह खतरे के प्रति जागरूक रहें, इसीलिए कैंसर और इसके कारणों के प्रति लोगों को जागरूक करना बेहद जरूरी है.