विज्ञान में महिलाएं: विकसित भारत की उत्प्रेरक शक्ति

By योगेश कुमार गोयल | Updated: February 28, 2026 05:26 IST2026-02-28T05:26:37+5:302026-02-28T05:26:37+5:30

थीम ‘विज्ञान में महिलाएं : विकसित भारत को उत्प्रेरित करना’ सीधे तौर पर राष्ट्र के भविष्य को आधी आबादी की मेधा से जोड़ती है.

Women in Science Catalyzing Force Developed India national science day 28 feb blog Yogesh Kumar Goyal | विज्ञान में महिलाएं: विकसित भारत की उत्प्रेरक शक्ति

विज्ञान में महिलाएं: विकसित भारत की उत्प्रेरक शक्ति

Highlightsविकसित भारत@2047 के संकल्प को सिद्ध करने में भारतीय महिला वैज्ञानिकों की भूमिका निर्णायक रही है.भारत की सामरिक सुरक्षा के कवच को बुनने में महिलाओं का मस्तिष्क किसी से कमतर नहीं है.विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित के क्षेत्र में अपना भविष्य देख रही हैं.

भारत में प्रत्येक वर्ष 28 फरवरी को मनाया जाने वाला ‘राष्ट्रीय विज्ञान दिवस’ उस बौद्धिक सामर्थ्य का उत्सव है, जिसने वैश्विक पटल पर भारतीय मेधा का लोहा मनवाया. यह दिन 1928 की उस महान खोज ‘रमन प्रभाव’ की स्मृति को जीवंत करता है, जिसके लिए सर सी.वी. रमन को 1930 में भौतिकी का नोबल पुरस्कार मिला था. आज जब हम वर्ष 2026 में यह दिवस मना रहे हैं तो इसका स्वर और भी प्रखर है क्योंकि इसकी थीम ‘विज्ञान में महिलाएं : विकसित भारत को उत्प्रेरित करना’ सीधे तौर पर राष्ट्र के भविष्य को आधी आबादी की मेधा से जोड़ती है.

यह विषय इस सत्य को उद्घाटित करता है कि भारत की वैज्ञानिक यात्रा तब तक अपनी पूर्णता को प्राप्त नहीं कर सकती, जब तक इसमें आधी आबादी की मेधा और नेतृत्व का पूर्ण समावेश न हो. विकसित भारत@2047 के संकल्प को सिद्ध करने में भारतीय महिला वैज्ञानिकों की भूमिका निर्णायक रही है.

आज जब हम चंद्रयान-3 की दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग की बात करते हैं तो ऋतु करिधाल श्रीवास्तव का नाम सम्मान से लिया जाता है, जिन्होंने ‘मार्स ऑर्बिटर मिशन’ और चंद्रयान में मिशन डायरेक्टर के रूप में अपनी तकनीकी सूझबूझ का लोहा मनवाया. इसी प्रकार, ‘मिसाइल वुमन ऑफ इंडिया’ के नाम से विख्यात टेसी थॉमस ने ‘अग्नि-4’ और ‘अग्नि-5’ जैसी मिसाइल प्रणालियों का नेतृत्व कर यह सिद्ध कर दिया कि भारत की सामरिक सुरक्षा के कवच को बुनने में महिलाओं का मस्तिष्क किसी से कमतर नहीं है.

अंतरिक्ष के क्षेत्र में मुथैया वनिता (चंद्रयान-2 की प्रोजेक्ट डायरेक्टर) और ललितांबिका (गगनयान मिशन की महत्वपूर्ण सूत्रधार) जैसी हस्तियां इस बात का प्रमाण हैं कि इसरो की ‘कम लागत, उच्च विश्वसनीयता’ वाली सफलता के पीछे महिला नेतृत्व की सूक्ष्म दृष्टि और धैर्य है. ये नाम उन लाखों युवा लड़कियों के लिए प्रेरणापुंज हैं जो विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित के क्षेत्र में अपना भविष्य देख रही हैं.

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की सार्थकता इसी में है कि हम विज्ञान को केवल प्रयोगशालाओं के बंद कमरों से निकालकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाएं. नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति इसी वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तर्कशीलता को प्राथमिक स्तर से ही विकसित करने पर बल देती है. अटल इनोवेशन मिशन और स्टार्टअप इंडिया जैसे कार्यक्रमों ने देश में एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार किया है,

जहां ‘डीप-टेक’ और ‘स्पेस-टेक’ में नए प्रयोग हो रहे हैं. आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब है और गौरव की बात यह है कि इनमें से बड़ी संख्या में स्टार्टअप्स का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं. यह विज्ञान के साथ ‘नारी शक्ति’ का संगम ही है, जो भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के सपने को सच करेगा.

महिलाओं की वैज्ञानिक भागीदारी को बढ़ावा देना केवल लैंगिक समानता का विषय नहीं है बल्कि यह राष्ट्र की समग्र प्रगति के लिए अनिवार्य आवश्यकता है. जब एक महिला वैज्ञानिक नवाचार करती है तो वह पूरे समाज के दृष्टिकोण को बदलती है. विकसित भारत का मार्ग प्रयोगशालाओं के परीक्षणों, डेटा की शुद्धता और तर्क की शक्ति से होकर गुजरता है. सी.वी. रमन की वह प्रकाश-किरण आज एक मशाल बन चुकी है, जो विकसित भारत के पथ को आलोकित कर रही है.

Web Title: Women in Science Catalyzing Force Developed India national science day 28 feb blog Yogesh Kumar Goyal

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