‘वाइन टूरिज्म’ के पीछे की सामाजिक-पर्यावरणीय कहानी चिंताजनक

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: February 5, 2026 05:50 IST2026-02-05T05:50:57+5:302026-02-05T05:50:57+5:30

महाराष्ट्र के नासिक ज़िले की सह्याद्रि पहाड़ियों में फैले ‘वाइन यार्ड’ आज एक ऐसे पर्यटन मॉडल का प्रतीक बन चुके हैं, जिसे आकर्षक शब्दों में ‘वाइन टूरिज्म’ कहा जाता है.

wine tourism worrying socio-environmental story behind nashik blog Kumar Siddharth | ‘वाइन टूरिज्म’ के पीछे की सामाजिक-पर्यावरणीय कहानी चिंताजनक

file photo

Highlightsनासिक को भारत की ‘वाइन कैपिटल’ कहा जाता है. भारत में 60 प्रतिशत से अधिक वाइनरी महाराष्ट्र में हैं.इनका बड़ा हिस्सा नासिक क्षेत्र में केंद्रित है.

कुमार सिद्धार्थ

प्याज, लहसुन और फूलों समेत सब्जियों के लिए ख्यात नासिक अब वाइन उद्योग को बढ़ावा देने में लगा है, लेकिन क्या यह बाजार के अलावा व्यापक समाज के लिए भी मुनासिब होगा? अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के देशों ने यही गलती तम्बाकू के साथ की थी जहां आम लोग एक किलो खाद्यान्न पर एक सिगरेट को प्राथमिकता देने लगे थे. क्या वाइन उद्योग भी नासिक इलाके में यही करेंगे? महाराष्ट्र के नासिक ज़िले की सह्याद्रि पहाड़ियों में फैले ‘वाइन यार्ड’ आज एक ऐसे पर्यटन मॉडल का प्रतीक बन चुके हैं, जिसे आकर्षक शब्दों में ‘वाइन टूरिज्म’ कहा जाता है.

चमकदार ब्रांडिंग, दूर-दूर तक फैले अंगूर के बागान, टेस्टिंग रूम, कैफे, संगीत, खुले लॉन और फोटो-स्पॉट - यह पूरा परिदृश्य किसी सामान्य पारिवारिक सैरगाह जैसा प्रतीत होता है, लेकिन इस आकर्षक दृश्य के पीछे एक चिंताजनक सामाजिक-सांस्कृतिक तथा पर्यावरणीय कहानी छिपी है, जिसे पर्यटन के उत्साह में अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है.

नासिक को भारत की ‘वाइन कैपिटल’ कहा जाता है. अनुकूल जलवायु, सह्याद्रि की ढलानें और दशकों से विकसित अंगूर की खेती ने यहां वाइन उद्योग को तेजी से पनपने का अवसर दिया है. अनुमान है कि भारत में 60 प्रतिशत से अधिक वाइनरी महाराष्ट्र में हैं और इनका बड़ा हिस्सा नासिक क्षेत्र में केंद्रित है.

नासिक अकेले भारत के कुल अंगूर उत्पादन का लगभग एक तिहाई - करीब 9-11 लाख टन - पैदा करता है. यह उत्पादन लगभग 1.4-1.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फैली खेती से आता है. नासिक के अंगूर तीन प्रमुख तरीकों से उपयोग किए जाते हैं - ताजा फल के रूप में घरेलू बाजार, यूरोप और मध्य-पूर्व के लिए निर्यात और वाइन उद्योग के लिए कच्चा माल.

वाइन में उपयोग होने वाला अंगूर मात्रा में भले ही कुल उत्पादन का 8-12 प्रतिशत हो, लेकिन जल, भूमि और रसायनों की खपत के लिहाज से इसका प्रभाव कहीं अधिक है. अंगूर की खेती में खूब पानी लगता है. ड्रिप सिंचाई के बावजूद एक हेक्टेयर अंगूर के लिए एक मौसम में औसतन 50-60 लाख लीटर पानी की आवश्यकता पड़ती है.

एक लीटर वाइन के उत्पादन में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 600-650 लीटर पानी का उपयोग होता है. नासिक जैसे अर्ध-शुष्क क्षेत्र में यह मांग सीधे भूजल दोहन को बढ़ाती है. पिछले वर्षों में कई इलाकों का भूजल स्तर 10-20 मीटर से गिरकर 25-40 मीटर या उससे भी नीचे चला गया है.

वाइन उद्योग ने भूमि उपयोग के स्वरूप को भी बदला है. मिश्रित खेती और जैव-विविधता वाली जमीनें एक-रूपी अंगूर बागानों में बदल रही हैं. अंगूर की व्यावसायिक खेती में कीटनाशकों और फफूंद नाशकों का नियमित प्रयोग होता है, जिससे मिट्टी और भूजल में रासायनिक अवशेषों का खतरा बढ़ता है.

किण्वन, सफाई और बोतलबंदी से निकलने वाला अपशिष्ट जल पूर्णत: शुद्ध न किया जाए तो आसपास के खेतों व जलस्रोतों पर इसका दुष्प्रभाव पड़ता है. भारतीय समाज में लंबे समय तक शराब को सीमित, निजी और कई बार वर्जित व्यवहार के रूप में देखा गया, लेकिन ‘वाइन पर्यटन’ इस दृष्टि को बदल रहा है. खुले, सुंदर और उत्सवी माहौल में मद्य-सेवन उसे सामान्य और स्वीकार्य बनाता है.

शराब को ‘सभ्य’, ‘सुरक्षित’ और ‘फैमिली-फ्रेंडली’ बताकर प्रस्तुत करना उपभोक्तावादी संस्कृति की सुनियोजित रणनीति है, जिसमें बाजार यह तय करता है कि आधुनिकता का अर्थ क्या होगा. इस मॉडल का मुख्य लक्ष्य शहरी मध्यम वर्ग है जो अनुभव-आधारित उपभोग, स्टेटस और आधुनिकता की आकांक्षाओं से संचालित होता है.

सप्ताहांतों और छुट्टियों में हजारों परिवारों और बच्चों की मौजूदगी इस मॉडल को वैधता देती है और शराब को ‘सामान्य पारिवारिक अनुभव’ के रूप में स्थापित करती है. वाइन परिसरों में सबसे चिंताजनक दृश्य बच्चों की निर्बाध मौजूदगी है.

छोटे बच्चे अपने माता-पिता और अन्य वयस्कों को वाइन-टेस्टिंग करते, बोतलें खरीदते और शराब को उत्सव से जोड़ते देखते हैं. बचपन में देखे गए अनुभव ही मूल्यबोध की नींव रखते हैं. इस तरह शराब एक प्रकार के सांस्कृतिक प्रशिक्षण का हिस्सा बन जाती है, जिसका प्रभाव आने वाले दशकों में दिखाई देगा.  

Web Title: wine tourism worrying socio-environmental story behind nashik blog Kumar Siddharth

स्वास्थ्य से जुड़ीहिंदी खबरोंऔर देश दुनिया खबरोंके लिए यहाँ क्लिक करे.यूट्यूब चैनल यहाँ इब करें और देखें हमारा एक्सक्लूसिव वीडियो कंटेंट. सोशल से जुड़ने के लिए हमारा Facebook Pageलाइक करे