मूक महामारी बनती किडनी की बीमारियां?, दुनिया में 85 करोड़ से अधिक लोग प्रभावित?

By योगेश कुमार गोयल | Updated: March 12, 2026 05:32 IST2026-03-12T05:32:24+5:302026-03-12T05:32:24+5:30

अध्ययनों के अनुसार दुनिया में 85 करोड़ से अधिक लोग किसी न किसी प्रकार की किडनी बीमारी से प्रभावित हैं और हर 10 में से एक व्यक्ति को क्रॉनिक किडनी डिजीज का खतरा है.

Kidney diseases becoming silent epidemic More than 850 million people affected worldwide blog Yogesh Kumar Goyal | मूक महामारी बनती किडनी की बीमारियां?, दुनिया में 85 करोड़ से अधिक लोग प्रभावित?

सांकेतिक फोटो

Highlightsलाखों लोग गुर्दे की बीमारी से जुड़ी जटिलताओं के कारण असमय मृत्यु का शिकार होते हैं.बीमारी का पता नहीं चलता, जब तक कि गुर्दों को गंभीर क्षति न पहुंच जाए.बीमारी को शुरुआती चरण में ही नियंत्रित किया जा सकता है.  

मानव शरीर की जटिल संरचना में गुर्दे (किडनी) ऐसे मौन प्रहरी हैं, जो शरीर के भीतर निरंतर संतुलन बनाए रखने का कार्य करते हैं. वे रक्त से विषैले अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालते हैं, शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखते हैं, रक्तचाप को नियंत्रित करने वाले हार्मोन बनाते हैं और लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

इतनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले ये अंग तब तक चुपचाप काम करते रहते हैं, जब तक कि इनमें गंभीर क्षति न हो जाए. यही कारण है कि गुर्दे की बीमारी को अक्सर ‘साइलेंट किलर’ या ‘मूक महामारी’ कहा जाता है. आज विश्व स्तर पर गुर्दे की बीमारियां तेजी से बढ़ती हुई स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल हो चुकी हैं.

विभिन्न अध्ययनों के अनुसार दुनिया में 85 करोड़ से अधिक लोग किसी न किसी प्रकार की किडनी बीमारी से प्रभावित हैं और हर 10 में से एक व्यक्ति को क्रॉनिक किडनी डिजीज का खतरा है. चिंता की बात यह है कि अधिकांश लोगों को तब तक अपनी बीमारी का पता नहीं चलता, जब तक कि गुर्दों को गंभीर क्षति न पहुंच जाए.

हर वर्ष लाखों लोग गुर्दे की बीमारी से जुड़ी जटिलताओं के कारण असमय मृत्यु का शिकार होते हैं. इन्हीं चुनौतियों के प्रति वैश्विक स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल मार्च के दूसरे गुरुवार को ‘विश्व किडनी दिवस’ मनाया जाता है, जो इस वर्ष 12 मार्च को ‘सभी के लिए गुर्दा स्वास्थ्य: लोगों की देखभाल, ग्रह की रक्षा’ विषय के साथ मनाया जा रहा है.

यह विषय न केवल किडनी स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल देता है बल्कि यह भी बताता है कि मानव स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्वास्थ्य एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं. इस दिवस की शुरुआत वर्ष 2006 में इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी (आईएसएन) और इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ किडनी फाउंडेशंस (आईएफकेएफ) की संयुक्त पहल के रूप में हुई थी,

जिसका उद्देश्य दुनियाभर में किडनी रोगों के बढ़ते बोझ को कम करना, लोगों को समय पर जांच के लिए प्रेरित करना और स्वास्थ्य प्रणालियों को बेहतर उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित करना था. गुर्दे की बीमारी का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि यह अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के धीरे-धीरे विकसित होती है.

शुरुआती चरणों में व्यक्ति को सामान्य रूप से कोई परेशानी महसूस नहीं होती लेकिन भीतर ही भीतर गुर्दों की कार्यक्षमता कम होती रहती है. यही कारण है कि विशेषज्ञ समय-समय पर किडनी की जांच कराने पर विशेष जोर देते हैं. साधारण रक्त और मूत्र परीक्षणों के माध्यम से गुर्दों की कार्यप्रणाली का आकलन किया जा सकता है और बीमारी को शुरुआती चरण में ही नियंत्रित किया जा सकता है.  

Web Title: Kidney diseases becoming silent epidemic More than 850 million people affected worldwide blog Yogesh Kumar Goyal

स्वास्थ्य से जुड़ीहिंदी खबरोंऔर देश दुनिया खबरोंके लिए यहाँ क्लिक करे.यूट्यूब चैनल यहाँ इब करें और देखें हमारा एक्सक्लूसिव वीडियो कंटेंट. सोशल से जुड़ने के लिए हमारा Facebook Pageलाइक करे