कैंसर जैसी बीमारियों का सस्ता होना ही चाहिए इलाज

By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: February 17, 2026 05:16 IST2026-02-17T05:16:46+5:302026-02-17T05:16:46+5:30

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कैंसर के इलाज को किफायती बनाने के लिए 17 जीवन रक्षक दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (मूल सीमा शुल्क) को पूरी तरह से समाप्त कर दिया था, जिससे इन दवाओं की कीमतें और कम होंगी.

cancer Treatment diseases like be affordable 56th meeting recommended 33 life-saving drugs GST cancer medicines | कैंसर जैसी बीमारियों का सस्ता होना ही चाहिए इलाज

सांकेतिक फोटो

Highlightsकैंसर की दवाएं भी शामिल हैं.परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम हुआ है.शाॅर्ट एक्टिंग इन्सुलिन की कीमतें आसमान पर हैं.

हाल ही में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों में किए गए बदलाव से कैंसर उपचार को अधिक किफायती और सुलभ बनाने की दिशा में जिस महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव का संकेत मिला है, वह निश्चित रूप से कैंसरग्रस्त मरीजों और उनके परिवारों को भारी राहत देते वाला है. एम्स के शोधकर्ताओं ने संभावना जताई है कि जीएसटी दरों में सुधार से कैंसर का इलाज सस्ता हो सकेगा. उल्लेखनीय है कि पिछले साल सितंबर में जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में 33 जीवनरक्षक दवाओं को पूरी तरह जीएसटी से मुक्त करने की सिफारिश की गई थी, जिनमें कैंसर की दवाएं भी शामिल हैं.

इन दवाओं पर पहले 12 प्रतिशत टैक्स लगता था, जिसे अब शून्य कर दिया गया है. इसके अलावा दुर्लभ बीमारियों और कैंसर की तीन अहम दवाओं पर जीएसटी पांच प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया गया. एम्स के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन में कहा गया है कि इन कदमों से मरीजों और उनके परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम हुआ है.

इसके अलावा इस महीने की शुरुआत में पेश किए गए बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कैंसर के इलाज को किफायती बनाने के लिए 17 जीवन रक्षक दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (मूल सीमा शुल्क) को पूरी तरह से समाप्त कर दिया था, जिससे इन दवाओं की कीमतें और कम होंगी.

इनमें कैंसर के अलावा डायबिटीज सहित कई अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण दवाएं शामिल हैं. डायबिटीज की दवाओं के बारे में तो एक चौंकाने वाला तथ्य यह है कि लांग एक्टिंग इन्सुलिन की कीमतें कम हैं लेकिन शाॅर्ट एक्टिंग इन्सुलिन की कीमतें आसमान पर हैं.

कीमतों में बड़े अंतर का कारण उत्पादन लागत नहीं है बल्कि पेटेंट, बाजार में चंद कंपनियों का दबदबा और महंगी डिलीवरी डिवाइस (पेन) का उपयोग है. दरअसल कैंसर, डायबिटीज जैसी बीमारियां अब बेहद आम हो चली हैं और लंबे समय तक चलने वाला इनका महंगा इलाज आर्थिक रूप से आम आदमी की कमर तोड़ कर रख देता है.

कैंसर के इलाज में तो आम तौर पर एक मरीज को सालाना तीन से साढ़े तीन लाख रुपए तक खर्च करने पड़ते हैं, जबकि डायबिटीज की दवाओं और जांच में भी हर साल 50 हजार रु. या उससे अधिक का खर्च आ सकता है.  140 करोड़ की आबादी वाले भारत देश में लगभग दस करोड़ लोगों को डायबिटीज है,

जबकि कैंसर के 14 लाख नए मामले हर साल सामने आ जाते हैं. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इलाज में भारी-भरकम खर्च से कितने लोगों को परेशानी होती होगी. उम्मीद की जानी चाहिए कि महत्वपूर्ण जीवन रक्षक दवाओं में जीएसटी खत्म किए जाने से इन बीमारियों से जूझने वालों को काफी आर्थिक राहत मिल सकेगी.  

Web Title: cancer Treatment diseases like be affordable 56th meeting recommended 33 life-saving drugs GST cancer medicines

स्वास्थ्य से जुड़ीहिंदी खबरोंऔर देश दुनिया खबरोंके लिए यहाँ क्लिक करे.यूट्यूब चैनल यहाँ इब करें और देखें हमारा एक्सक्लूसिव वीडियो कंटेंट. सोशल से जुड़ने के लिए हमारा Facebook Pageलाइक करे