कोई इतना अमानवीय और क्रूर कैसे हो सकता है?
By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: April 7, 2026 07:20 IST2026-04-07T07:20:07+5:302026-04-07T07:20:15+5:30
और जब तक ऐसा समाज नहीं बन जाता तब तक अपने बच्चों को यह शिक्षा जरूर दीजिए कि अपनों से भी कैसे सतर्क रहा जाए!

कोई इतना अमानवीय और क्रूर कैसे हो सकता है?
नागपुर में अथर्व नानोरे की हत्या ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि कोई अपराधी भी इतना क्रूर कैसे हो सकता है कि एक बच्चे की हत्या कर दे? केवल 14 साल का अथर्व हनुमान जयंती की शोभायात्रा में गया था. फिर वह घर नहीं लौटा. दो दिन बाद उसकी लाश मिली. सीसीटीवी फुटेज में जहां भी वह दिखा है, खुश दिखा है. इसका मतलब है कि जिनके साथ भी वह था, उन्हें वह जानता-पहचानता था. उसके करीबी ही उसकी मौत बन गए. जरा कल्पना कीजिए उस परिवार का जिसका चिराग दरिंदों ने बुझा दिया.
और यह कोई पहला मामला नहीं है. दरिंदगी हर जगह चल रही है. पूरे देश से इस तरह की दरिंदगी की खबरें आती रहती हैं. अभी हाल ही में दिल्ली में एक ऑटोचालक का किसी से झगड़ा हो गया तो उसने उसके बच्चे को ही उठा कर पटक दिया जिससे बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया. बिहार के जहानाबाद से पांच साल के एक बच्चे की हत्या की खबर आई है. दिल्ली में तो एक पिता ने ही अपने बच्चे की गला रेत कर हत्या कर दी.
पानीपत में एक महिला ने चार छोटी बच्चियों को टब में डुबोकर मार डाला क्योंकि वह खूबसूरत लड़कियों से नफरत करती थी.
लखनऊ में अरनव नाम के पांच साल के बच्चे को सौतेली मां ने मार डाला. ऐसे अपराधों की लंबी फेहरिस्त है. समझ में नहीं आता कि जिन बच्चों को देखकर सभी के मन में प्यार उमड़ता है. उन्हीं बच्चों का कोई कैसे गला काट सकता है? इतनी दरिंदगी आती कहां से है? यदि किसी से झगड़ा है भी तो उसमें किसी बच्चे का क्या कसूर? वह तो समझता भी नहीं है कि झगड़ा होता क्या है?
नफरत होती क्या है? जरा सोचिए कि अथर्व को जो दरिंदे अपने साथ ले गए होंगे, उन दरिंदों पर अथर्व ने कितना भरोसा किया. उसने तो कभी सोचा भी नहीं होगा जिन अपनों के साथ वह शोभायात्रा में जा रहा है, वो अपने नहीं, वो तो दरिंदे हैं! उस मासूम को तो दरिंदगी का मतलब भी नहीं मालूम होगा. निश्चित रूप से कानून तो अपना काम करेगा ही. दरिंदों को सजा भी मिलेगी लेकिन क्या यही पर्याप्त है?
फिर कोई अथर्व किसी दरिंदे का शिकार हो जाएगा! जरूरत इस बात की है कि हम सब एक ऐसे समाज की रचना पर ध्यान दें जहां नफरत का बोलबाला न हो! कम से कम बच्चों के प्रति तो कोई नफरत होनी ही नहीं चाहिए. और जब तक ऐसा समाज नहीं बन जाता तब तक अपने बच्चों को यह शिक्षा जरूर दीजिए कि अपनों से भी कैसे सतर्क रहा जाए! आपका बच्चा कहां जा रहा है, इसका ध्यान जरूर रखिए! अपने आसपास भी ध्यान रखिए कि कोई दरिंदा किसी अथर्व को अपना शिकार न बनाए.