‘युवा आबादी’ के लाभ को भुनाने की चुनौती?, 20 से 29 वर्ष के 6.3 करोड़ स्नातकों में से 1.1 करोड़ बेरोजगार?

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: April 2, 2026 05:36 IST2026-04-02T05:36:38+5:302026-04-02T05:36:38+5:30

स्नातक होने के एक वर्ष के भीतर केवल सात फीसदी युवाओं को ही स्थायी वेतन वाली नौकरी मिल पाती है. यह धारणा लंबे समय तक बनी रही कि शिक्षा ही बेरोजगारी से मुक्ति का रास्ता है.

young india yuva bharat challenge capitalizing benefits young population 63 million graduates aged 20 to 29, about 11 million are unemployed blog Kumar Siddharth | ‘युवा आबादी’ के लाभ को भुनाने की चुनौती?, 20 से 29 वर्ष के 6.3 करोड़ स्नातकों में से 1.1 करोड़ बेरोजगार?

file photo

Highlightsशिक्षा, रोजगार और श्रम बाजार से जुड़े कई अहम रुझानों को रेखांकित किया है.संकट का दस्तावेजी‍करण है, जिसमें आज का शिक्षित युवा जूझ रहा है. नौकरी नहीं मिलना युवाओं में निराशा और असंतोष को जन्म देता है.

कुमार सिद्धार्थ

भारत आज दुनिया के सबसे युवा देशों में गिना जाता है. यह तथ्य अक्सर गर्व के साथ दोहराया जाता है कि देश की बड़ी आबादी कार्यशील आयु वर्ग में है और यही भारत के विकास की सबसे बड़ी ताकत है. लेकिन जब यही युवा, खासकर शिक्षित युवा, रोजगार के लिए भटकते नजर आते हैं, तब यह ‘जनसांख्यिकीय लाभ’ एक कठिन प्रश्न बनकर सामने खड़ा हो जाता है. हाल ही में जारी ‘भारत में कामकाज की स्थिति-2026’  रिपोर्ट ने इस जटिल वास्तविकता को ठोस तथ्यों के साथ सामने रखा है और देश के युवाओं के शिक्षा, रोजगार और श्रम बाजार से जुड़े कई अहम रुझानों को रेखांकित किया है.

अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी द्वारा जारी रिपोर्ट केवल तथ्‍यों का संकलन नहीं, बल्कि उस संकट का दस्तावेजी‍करण है, जिसमें आज का शिक्षित युवा जूझ रहा है. उसके पास उपाधियां हैं, आकांक्षाएं हैं, सपने हैं, लेकिन अवसर सीमित हैं. पिछले चार दशकों में भारत में उच्च शिक्षा का दायरा तेजी से बढ़ा है. विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है.

इस रिपोर्ट के अनुसार, उच्च शिक्षा में नामांकन दर अब 28 फीसदी तक पहुंच चुकी है और इसमें लड़कियों की भागीदारी खासतौर पर बढ़ी है. हालांकि पुरुषों के नामांकन में गिरावट दर्ज की गई है. यह वर्ष 2017 के 38 फीसदी से घटकर वर्ष 2024 के अंत तक 34 फीसदी रह गई है. इसके पीछे मुख्य वजह यह है कि युवा वयस्‍क अपने परिवार की जरूरत को पूरा करने के लिए कमाने के अवसर तलाशने लगते हैं.

यह बदलाव सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है. यह संकेत देता है कि शिक्षा अब समाज के व्यापक वर्गों तक पहुंच रही है. लेकिन इस प्रगति के साथ एक गहरी विडंबना भी जुड़ी है- शिक्षा बढ़ तो रही है, लेकिन रोजगार के अवसर उसी अनुपात में नहीं बढ़ पा रहे हैं. रिपोर्ट बताती है कि 20 से 29 वर्ष के 6.3 करोड़ स्नातकों में से लगभग 1.1 करोड़ बेरोजगार हैं.

यह युवा रोजगार की वास्‍तविकता है, जो वर्षों की पढ़ाई के बाद भी रोजगार से वंचित हैं. रिपोर्ट बताती है कि युवाओं को जो नौकरियां मिलती भी हैं, वह अक्सर अस्थायी, कम वेतन वाली या कौशल के अनुरूप नहीं होतीं. स्नातक होने के एक वर्ष के भीतर केवल सात फीसदी युवाओं को ही स्थायी वेतन वाली नौकरी मिल पाती है. यह धारणा लंबे समय तक बनी रही कि शिक्षा ही बेरोजगारी से मुक्ति का रास्ता है.

लेकिन आज स्थिति उलट दिखती है. रिपोर्ट के अनुसार, 15 से 25 वर्ष के स्नातकों में बेरोजगारी दर लगभग 40 फीसदी है, जबकि 25 से 29 वर्ष के युवाओं में यह करीब 20 फीसदी है. यह स्थिति एक संकेत है कि शिक्षा और रोजगार के बीच का संबंध कमजोर हो गया है. डिग्री/उपाधि होने के बावजूद नौकरी नहीं मिलना युवाओं में निराशा और असंतोष को जन्म देता है.

आज के युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल बेरोजगारी नहीं, बल्कि ‘अधूरा रोजगार’ भी है. बड़ी संख्या में युवा ऐसे काम कर रहे हैं, जो उनकी शिक्षा और कौशल के अनुरूप नहीं हैं. कई इंजीनियर डिलीवरी का काम कर रहे हैं, स्नातक डाटा एंट्री या अस्थायी अनुबंधों पर निर्भर हैं. यह केवल व्यक्तिगत हानि नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संसाधनों की भी बर्बादी है.

जिस शिक्षा पर इतना निवेश किया गया, वह अपेक्षित उत्पादकता में परिवर्तित नहीं हो पा रही है. रिपोर्ट इस ओर भी इंगित करती है कि केवल शिक्षा का विस्तार पर्याप्त नहीं है, उसकी गुणवत्ता और उपयोगिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. सन् 2010 से 2021 के बीच प्रति लाख युवाओं पर कॉलेजों की संख्या 29 से बढ़कर 45 हो गई है.

औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) की संख्या में भी लगभग 300 फीसदी की वृद्धि हुई है. इसके बावजूद क्षेत्रीय असमानताएं बनी हुई हैं और शिक्षकों की कमी एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आई है. निर्धारित मानकों के मुकाबले निजी और सरकारी कॉलेजों में शिक्षक-छात्र अनुपात काफी अधिक है. लेकिन इन संस्थानों से निकलने वाले युवाओं के पास वह कौशल नहीं है जिसकी मांग उद्योगों में है.

यह स्थिति बताती है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था अभी भी ‘डिग्री केंद्रित’ है, न कि ‘कौशल केंद्रित’. देश के पास सीमित वक्‍त है, जिसमें वह अपने जनसांख्यिकीय लाभ को आर्थिक विकास में बदल सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2030 के बाद कामकाजी आयु वर्ग की आबादी का अनुपात घटने लगेगा. इसके मायने हैं कि आने वाले कुछ वर्षों में रोजगार सृजन को गति देना आवश्यक है.

यदि यह अवसर चूक गया तो बड़ी संख्या में बेरोजगार और असंतुष्ट युवा सामाजिक और आर्थिक संकट का कारण बन सकते हैं. इस गंभीर समस्या का समाधान केवल एक क्षेत्र में सुधार से संभव नहीं है. इसके लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाना होगा. पहला, शिक्षा और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना होगा. पाठ्यक्रमों को वास्तविक जरूरतों के अनुरूप बनाना जरूरी है.

दूसरा, कौशल विकास को प्राथमिकता देनी होगी. प्रशिक्षण कार्यक्रमों की गुणवत्ता सुधारनी होगी. तीसरा, रोजगार सृजन को नीति के केंद्र में रखना होगा. केवल विकास दर बढ़ाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि रोजगार आधारित विकास की दिशा में कदम उठाने होंगे. चौथा, उद्यमिता विकास को बढ़ावा देना होगा. युवाओं को केवल नौकरी तलाशने के बजाय रोजगार सृजक बनने के लिए प्रोत्साहित करना होगा.

पांचवां, क्षेत्रीय और सामाजिक असमानताओं को कम करने के लिए लक्षित नीतियां बनानी होंगी. भारत के युवाओं के सामने आज जो स्थिति है, वह केवल आर्थिक समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक और मनोवैज्ञानिक संकट भी है. यह समझना जरूरी है कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन और रोजगार के लिए तैयारी का साधन है.

यदि यह तैयारी अधूरी रह जाती है तो उसका परिणाम बेरोजगारी, असंतोष और सामाजिक असंतुलन के रूप में सामने आता है. इसी कारण शिक्षा के माध्यम से जो उम्मीदें पैदा होती हैं, जब वे पूरी नहीं होतीं, तो उसका असर पूरे समाज पर पड़ता है. रिपोर्ट इस महत्‍वपूर्ण बात को रेखांकित करती है कि यदि शिक्षा और रोजगार के बीच की खाई को समय रहते नहीं भरा गया,

तो देश का सबसे बड़ा संसाधन ही उसकी सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है. अब आवश्यकता है कि इस मुद्दे को केवल तथ्‍यों के स्तर पर नहीं, बल्कि नीति और क्रियान्वयन के स्तर पर गंभीरता से लिया जाए, क्योंकि यह केवल रोजगार का प्रश्न नहीं है, यह देश के भविष्य का प्रश्न है.

Web Title: young india yuva bharat challenge capitalizing benefits young population 63 million graduates aged 20 to 29, about 11 million are unemployed blog Kumar Siddharth

कारोबार से जुड़ीहिंदी खबरोंऔर देश दुनिया खबरोंके लिए यहाँ क्लिक करे.यूट्यूब चैनल यहाँ इब करें और देखें हमारा एक्सक्लूसिव वीडियो कंटेंट. सोशल से जुड़ने के लिए हमारा Facebook Pageलाइक करे