ब्रिटेन की बादशाहत क्यों याद आ गई?, लेकिन जंग की सनक ले डूबी

By विकास मिश्रा | Updated: March 17, 2026 05:32 IST2026-03-17T05:32:10+5:302026-03-17T05:32:10+5:30

भारत से गए हुए इस साल 79 वर्ष हो जाएंगे. जिस ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत पर कब्जे की शुरुआत की, अब तो वह कंपनी भी भारतीय मूल के संजीव गुप्ता खरीद चुके हैं.

Why did you remember British Empire sun never set British rule but madness war brought down blog vikas mishra | ब्रिटेन की बादशाहत क्यों याद आ गई?, लेकिन जंग की सनक ले डूबी

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Highlightsभारतीय मूल के ऋषि सुनक वहां के पीएम भी बन गए.ब्रिटेन के काल में हुआ करता था.किसी न किसी दिन सब काल के गाल में समा जाते हैं.

वक्त बड़ा बलवान होता है और बहुत बेरहम भी होता है. वह बुलंदियों के शिखर पर पहुंचाता है तो लुढ़काने में भी देर नहीं करता. भारतीय संस्कृति में कहावत है कि अहंकार तो रावण का भी नहीं टिका! मुझे उस देश की बादशाहत का अचानक खयाल हो आया है जिसने  हम भारतीयों पर करीब 200 साल तक राज किया और जुल्म की ऐसी इबारत लिखी जिसका जिक्र होते ही हमारा खून आज भी खौलने लगता है! जिसने हमें लूटकर अपना घर भरा. हमारा कोहिनूर हीरा आज भी उसी के ताज में जड़ा हुआ है. आपके मन में स्वाभाविक तौर पर यह सवाल पैदा हो सकता है कि अभी इस वक्त ब्रिटेन का ख्याल मन में आने का कारण क्या है? उसे तो भारत से गए हुए इस साल 79 वर्ष हो जाएंगे. जिस ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत पर कब्जे की शुरुआत की, अब तो वह कंपनी भी भारतीय मूल के संजीव गुप्ता खरीद चुके हैं.

भारतीय मूल के ऋषि सुनक वहां के पीएम भी बन गए. उसकी याद क्यों आना जिसे विकास की राह पर बहुत पीछे छोड़कर हम बहुत आगे निकल चुके हैं? तो बस यूं समझ लीजिए कि मौजूदा दौर के फड़फड़ाते पन्नों ने ब्रिटेन की याद दिला दी है. माैजूदा दौर के ये पन्ने बादशाहत के मिजाज से ही रक्तरंजित हो रहे हैं. जैसा कि ब्रिटेन के काल में हुआ करता था.

ब्रिटेन के अत्याचार की विभीषिका को अपने भीतर समेटने के लिए अंडमान निकोबार के सेल्यूलर जेल में मैं कई बार गया हूं. हर बार पीड़ा से लथपथ लौटा हूं. यही पीड़ा मुझे मौजूदा दौर के जंगों के बीच ले जाकर खड़ी कर देती है. बस सुकून केवल इस उम्मीद में समाहित रहती है कि किसी की भी बादशाहत स्थाई नहीं होती! किसी न किसी दिन सब काल के गाल में समा जाते हैं.

कहते हैं कि पर्शियन साम्राज्य विश्व का पहला सुपर पाॅवर साम्राज्य था जिसकी सरहद मिश्र से लेकर सिंधु नदी तक था. आपको याद दिला दें कि साइरस द ग्रेट ने ईरान में इसकी स्थापना की थी. जी हां, वही ईरान जो मौजूदा दौर के सुपर पाॅवर अमेरिका से लड़ रहा है. एटोमन  साम्राज्य के बारे में आपने पढ़ा ही होगा जिसने करीब 600 वर्षों से अधिक समय तक राज किया.

तेरहवीं से चौदहवीं शताब्दी के बीच चंगेज खान का मंगोल साम्राज्य एशिया से यूरोप तक फैला था. फिर रूसी साम्राज्य, चीन के चिंग राजवंश सहित बहुत से साम्राज्यों को याद कीजिए! आज किसी का भी वजूद नहीं बचा है! हां, तो मैं चर्चा कर रहा था ब्रिटिश साम्राज्य की जिसके बारे में  कहा जाता था कि उसके राज में सूरज कभी अस्त नहीं होता.

और यह सही भी था क्योंकि उसके कुछ उपनिवेश में सूरज डूबता था तो अन्य उपनिवेश में सूरज उग चुका होता था. इसे इतिहास का सबसे बड़ा साम्राज्य इसलिए भी कहा जाता है कि इसका फैलाव पृथ्वी के करीब एक चौथाई भूभाग पर था. 16वीं से 20वीं शताब्दी के बीच, करीब 400 वर्षों तक इसका वजूद रहा.

विभिन्न कालखंडों में अमेरिका से लेकर अफ्रीका, एशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड सहित दुनिया के 56 देशों पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ब्रिटिश साम्राज्य का नियंत्रण रहा. यदि हम व्यापार की बात करें तो करीब सौ साल तक विश्व व्यापार भी ब्रिटिश साम्राज्य के कब्जे में था. तब स्टर्लिंग पौंड की तूती बोला करती थी.

संदर्भ के लिए याद कर लीजिए कि आज जो ब्रिटेन अमेरिका का पिछलग्गू बना हुआ है, उसने मौजूदा दौर के महाबली अमेरिका के कुछ हिस्सों पर भी राज किया था. वर्जिनिया का जैम्सटाउन अमेरिका में ब्रिटेन का पहला स्थाई उपनिवेश बना था. वैसे दुनियाभर की बात करें तो ऐसा कहा जा सकता है कि ब्रिटिश साम्राज्य की प्रयोगशाला वास्तव में आयरलैंड बना जहां उसने यह तकनीक विकसित की कि दूसरे देशों को कैसे गुलाम बनाया जाए ! सजा और प्रताड़ना के ऐसे तरीके विकसित किए जिसकी कल्पना क्रूर से क्रूर व्यक्ति भी नहीं कर सकता.

ब्रिटिश साम्राज्य की क्रूरता के ढेर सारे नमूने अंडमान निकोबार से लेकर मॉरीशस तक में आप चित्रों के माध्यम से देख सकते हैं. तो फिर इतने शक्तिशाली और खूंखार साम्राज्य का पतन कैसे हुआ? सबसे बड़ा कारण यह था कि ब्रिटेन को अपनी बादशाहत का गुमान हो चला था और उसे लग रहा था कि दुनिया की कोई ताकत उसे हरा नहीं सकती.

और यह बात उस समय सच भी थी. 1914 से 1918 के बीच प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन ने मित्र राष्ट्रों का नेतृत्व किया. अपनी विशाल नौसेना के साथ उसने भारत के दस लाख सैनिकों और दूसरे उपनिवेशों के संसाधनों का भरपूर उपयोग किया.  जर्मनी और उसके सहयोगियों को उसने पराजित भी किया लेकिन उस जंग ने आर्थिक रूप से ब्रिटेन की कमर तोड़ दी.

फिर आया 1939 से 1945 के बीच का द्वितीय विश्व युद्ध. विंस्टन चर्चिल तब गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे थे. युद्ध के दौरान उन्होंने भारत से करीब 25 लाख सैनिकों का उपयोग किया, उपनिवेश के दूसरे देशों से संसाधन जुटाए. दूसरे विश्व युद्ध में अमेरिका, सोवियत संघ, फ्रांस और चीन भी ब्रिटेन के साथ थे.

यह समूह जंग जीत गया लेकिन ब्रिटेन की माली हालत इतनी खराब हो गई कि साम्राज्य को टिकाए रखना उसके लिए मुश्किल हो गया. 1947 में उसे भारत पर से अपना राज छोड़ना पड़ा. इस तरह ब्रिटिश साम्राज्य का अंत हो गया. बादशाहत मिट्टी में मिल गई. और वक्त का कमाल देखिए कि अमेरिका बादशाह बन गया. पूरी दुनिया में उसकी तूती बोलती है.

वक्त की यह कहानी पढ़ते हुए क्या आपके जेहन में वाकई अमेरिका का खयाल आ रहा है? यदि हां तो यह आपकी सोच है. मैंने तो आपको केवल वक्त के दस्तूर की याद दिलाई है. वक्त पर किसी का राज नहीं. वक्त सब पर राज करता है.

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