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रोबोट सेना से लड़ा जाने वाला युद्ध दुनिया को कहां ले जाएगा? 

By प्रमोद भार्गव | Updated: March 16, 2026 05:34 IST

इजराइल पहले ही एक ऐसी ‘रुक रोबोट’ सेना तैयार कर चुका है, जो न केवल युद्ध लड़ेगी, बल्कि सीमा पर इंसानी सैनिकों की जगह भी ले लेगी.

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ठळक मुद्देसैनिक की दक्षता की परख फिलहाल कारखानों और बंदरगाहों पर की जा रही है.अमेरिका ही नहीं रूस, चीन और भारत भी ऐसे सैनिक बनाने में जुटे हैं. दुनिया को ऐसे स्व-नियंत्रित रोबोट सैनिकों को सौंपने जा रही है.

मनुष्य की सोच असीम संभावनाओं से जुड़ी है. कल्पना से शुरू होने वाले विचार सच्चाई के धरातल पर आकार लेते हैं, तो आंखें हैरान रह जाती हैं. सैन्य प्रौद्योगिकी की दुनिया में दिखाई जाने वाली फिल्मी कहानियां अब मानव जीवन की ठोस सच्चाई में बदलती दिख रही हैं. अमेरिकी टेक कंपनी ‘फाउंडेशन’ ने दुनिया का पहला आदमी जैसा ह्यूमनोइड कृत्रिम बुद्धि से संचालित रोबोट सैनिक ‘फैंटम एमके-1’ तैयार कर लिया है. स्टील से बना यह सैनिक रोबोट एम-16 राइफल, रिवॉल्वर और शॉटगन जैसे हथियार चलाने में दक्ष है. इस सैनिक की दक्षता की परख फिलहाल कारखानों और बंदरगाहों पर की जा रही है.

अमेरिका ही नहीं रूस, चीन और भारत भी ऐसे सैनिक बनाने में जुटे हैं. भारत का डीआरडीओ ये रोबोट बना रहा है. इजराइल ऐसे सैनिक बना चुका है. हालांकि सैनिक के रूप में अभी उनका युद्ध के मैदान में परीक्षण होना शेष है. यह एक नए शीत युद्ध और नई तकनीक की होड़ की शुरुआत है, जो दुनिया को ऐसे स्व-नियंत्रित रोबोट सैनिकों को सौंपने जा रही है,

जो कृत्रिम बुद्धि से विस्फोटक निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं. इजराइल पहले ही एक ऐसी ‘रुक रोबोट’ सेना तैयार कर चुका है, जो न केवल युद्ध लड़ेगी, बल्कि सीमा पर इंसानी सैनिकों की जगह भी ले लेगी. इजराइल की विख्यात रक्षा कंपनी इल्बिट रोबो टीम ने इस सेना को तैयार किया है. रोबो टीम के सीईओ इलाजलेवी के मुताबिक अब तक आकाश में ड्रोन और हवाई रोबोट के जरिए होने वाले सभी काम अब धरती पर भी हो सकेंगे. मानव रहित रुक रोबोट के अंदर स्वयं ही खतरों को भांपकर फैसला लेने की क्षमता विकसित कर दी गई है.

कृत्रिम बौद्धिक क्षमता से परिपूर्ण ये रोबोट जंग के मैदान में खराब होने पर इसके पुर्जे साथ चलने वाले रोबोट सैनिक बदल देंगे. इसकी इस विशेषता से रोबोट सैनिक एकाएक निष्क्रिय नहीं होंगे. 200 किलोग्राम वजन वाले इस रोबोट की दौड़ने की क्षमता 30 किलोमीटर प्रतिघंटा है. इसकी कीमत डेढ़ लाख डाॅलर से लेकर तीन लाख डाॅलर तक है.

मतलब भविष्य के युद्ध रोबोट थल सेना लड़ेगी. ये सैनिक डर और थकान से मुक्त होंगे. रोबो सैनिक की सेवा देने की उम्र 25 साल रहेगी. ये इतने चपल होंगे कि जवाबी कार्रवाई के लिए ये तुरंत 360 डिग्री घूमकर दुश्मन पर अचूक निशाना साधने में सक्षम होंगे. ये रोबोट सीढ़ियां चढ़ने व उतरने, बम-धमाकों व गोलाबारी के दौरान लगने वाले झटकों को भी सहन करने में सक्षम होंगे.

ये लड़ाकू रोबोट पानी के नीचे 20 मीटर की गहराई तक काम करने में दक्ष होंगे. पानी के भीतर से ही ये ग्रेनेड को निर्धारित लक्ष्य पर दागकर वहां से तुरंत लौट सकते हैं. भारत सरकार भी इस कोशिश में है कि तीनों सेनाओं में कृत्रिम बुद्धि (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से निर्मित रोबोटिक हथियारों की संख्या बढ़ा दी जाए.

इस नाते एक महत्वाकांक्षी रक्षा परियोजना की शुरुआत की गई है. हवाई यानों को भी रोबोटिक हथियारों से सक्षम बनाया जाएगा. यह परियोजना जब क्रियान्वित हो जाएगी तब भारत की थल, जल और वायु सेनाएं युद्ध लड़ने के लिए नई तकनीक से सक्षम हो जाएंगी.

रोबोट कारखानों में मजदूरी के काम से लेकर शिक्षक, टीवी एंकर, नर्स  के बाद अब सैनिक की भूमिका में अवतरित होने जा रहा है.इसलिए सवाल उठ रहे हैं कि कहीं भविष्य में यह मशीनी रोबोट मनुष्य पर ही भारी न पड़ जाए!

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