नारी शक्ति की प्रतीक हैं वित्त मंत्री सीतारमण
By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: February 3, 2026 06:14 IST2026-02-03T06:14:31+5:302026-02-03T06:14:31+5:30
मोदी सरकार 3.0 में भी उन्हें वित्त मंत्री ही चुना गया तो यह उनकी बड़ी उपलब्धि है कि वे लगातार हर साल बजट पेश करती हैं.

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किरण चोपड़ा
वैसे तो हर गृहिणी को घर का वित्त मंत्री कहा जाता है, क्योंकि वे घर का बजट अच्छी तरह बनाती हैं, रसोई से लेकर पारिवारिक समारोहों, शादी-विवाह के मौकों पर वे वित्त प्रबंधन बेहतरीन ढंग से कर लेती हैं और अपने लिए कुछ बचा भी लेती हैं. निर्मला सीतारमण का वित्त मंत्री होना न केवल महिला सशक्तिकरण का प्रतीक है, बल्कि यह भी प्रदर्शित होता है कि वर्तमान में महिलाएं पुरुष वर्चस्व वाले क्षेत्रों में भी निपुण हो चुकी हैं. आज महिलाएं नए-नए स्टार्टअप शुरू कर रही हैं. शेयर मार्केट में डील करती हैं. महिलाएं बहुराष्ट्रीय कंपनियों से लेकर निजी कंपनियों तक की सीईओ हैं.
सबसे बड़ी बात यह है कि निर्मला सीतारमण देश की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री हैं. उन्होंने 2019 में पीएम मोदी के नेतृत्व में वित्त मंत्री का कार्यभार संभाला था और इसके बाद जब मोदी सरकार 3.0 में भी उन्हें वित्त मंत्री ही चुना गया तो यह उनकी बड़ी उपलब्धि है कि वे लगातार हर साल बजट पेश करती हैं. उनकी इसी निरंतरता के चलते उन्होंने यह रिकॉर्ड बनाया है,
वरना इससे पहले किसी भी वित्त मंत्री ने लगातार नौ बार बजट पेश नहीं किया. हालांकि मोरारजी देसाई 1959 और 1969 के बीच 10 बार बजट पेश कर चुके हैं लेकिन वे लगातर नहीं थे. इसी कड़ी में चिदंबरम भी हैं जो नौ बजट पेश कर चुके हैं परंतु वो भी अलग-अलग समय में थे और लगातार नहीं थे. लिहाजा, मैडम सीतारमण बधाई की पात्र हैं.
वे एक सादगी लेकिन आकर्षक व्यक्तित्व वाली महिला हैं जो भारतीय आदर्श स्थापित करती हैं. वे चुनौतियों का सामना करना जानती हैं इसीलिए पीएम मोदी ने उन पर भरोसा जताया है. उनके विचार सादे होते हुए भी उच्च हैं. मुझे याद है जब 2019 में कोविड का दौर चल रहा था तो उस कठिन समय में उन्होंने न केवल अर्थव्यवस्था को संभाला,
बल्कि मेडिकल क्षेत्र में जो राहत पैकेज प्रदान किए थे वे भारत को अलग पहचान दिलाने में सफल रहे. महिला वर्ग इसीलिए उनका सम्मान करता है. उन्होंने जो जिम्मेवारी दिखाई और प्रयोग कोविड के दौरान किए, वह सचमुच देश के लिए एक गौरव का पल था. मेरी तरह करोड़ों बहनें होंगी जिन्होंने घर में ‘वित्त मंत्री’ की भूमिका निभाई है. घर के खर्चे और हिसाब-किताब को ऐसे तरीके से सेट रखना कि कोई खर्च फालतू न हो और सब कुछ सुनियोजित भी रहे, यही वित्त प्रबंधन का काम है.
उन्होंने अर्थशास्त्र में एमए किया और इतना ही नहीं दिल्ली के जेएनयू में अर्थशास्त्र से खुद को जोड़े रखा. आर्थिक मामलों की संपूर्ण समझ उनमें थी. उन्होंने कभी किसी से अपनी तुलना नहीं की, बस अपने काम के दम पर, ईमानदारी के बल पर अपनी लाइन बड़ी करने की कोशिश की. उन्होंने जो नया बजट पेश किया है वह आत्मनिर्भर भारत और 2047 के विकसित भारत का एक मजबूत संकल्प है.