Rafale Deal Confirmed: राफेल विमान खरीद में तकनीक हस्तांतरण से भविष्य में होगा लाभ
By प्रमोद भार्गव | Updated: February 14, 2026 05:49 IST2026-02-14T05:49:13+5:302026-02-14T05:49:13+5:30
Rafale Deal Confirmed: विमानों की यह खरीद भारत व फ्रांस की सरकारों के बीच अंतर्देशीय समझौते के तहत की जाएगी.

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Rafale Deal Confirmed: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा खरीद परिषद् (डीएसी) ने वायुसेना के लिए फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की 3.25 लाख करोड़ रुपए की खरीद को मंजूरी दी है. यह बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान अपना करिश्माई अंदाज आपरेशन सिंदूर में पाकिस्तानी ठिकानों पर बमबारी करके दिखा चुका है. वायुसेना की मारक एवं प्रतिरोधी क्षमता में वृद्धि की दृष्टि से राफेल की भूमिका को अहम माना गया है. विमानों की यह खरीद भारत व फ्रांस की सरकारों के बीच अंतर्देशीय समझौते के तहत की जाएगी.
इस खरीद में 96 विमानों का निर्माण प्रोद्यौगिकी हस्तांतरण के अंतर्गत भारत में होगा. जबकि 18 विमान फ्रांस से उड़ान की तैयार स्थिति में आएंगे. इन विमानों के 60 फीसदी कलपुर्जे स्वदेशी होंगे. भारत के इस सबसे बड़े रक्षा सौदे पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की उपस्थिति में हस्ताक्षर भारत में होंगे. मैक्रों 17 फरवरी को तीन दिन के दौरे पर भारत आ रहे हैं.
इस खरीद के बाद भारत के पास 176 राफेल हो जाएंगे. भारत के लिए यह खरीद अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि हमारी वायुसेना के पास लड़ाकू विमानों की स्क्वाड्रन संख्या 30 रह गई है, जबकि उसकी स्वीकृत संख्या 42 है. मिग-21 विमानों का बेड़ा पुराना हो जाने के कारण सेवा से हटा लिया गया है. ऐसे में वायुसेना की लड़ाकू क्षमता को मजबूत बनाने के लिए यह सौदा जरूरी था.
हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते हस्तक्षेप के बीच इन विमानों को खासतौर पर भारतीय नौसेना के लिए डिजाइन किया गया है. राफेल विमानों की इस खरीद में फ्रांस सरकार की ओर से नौसेना के लिए हथियार, सिम्युलेटर, कलपुर्जे, सहायक उपकरण, स्पेयर पार्ट्स और पायलटों को प्रशिक्षण भी दिया जाना शामिल है.
फ्रांसीसी एयरोस्पेस कंपनी दसॉल्ट एविएशन द्वारा निर्मित ये राफेल विमान भारतीय नौसेना की परिचालन आवश्यकताओं पर पूरी तरह से खरा उतरा तब कहीं जाकर इसकी खरीद को मंजूरी दी गई है. आत्मनिर्भर भारत पर सरकार की दृढ़ इच्छा के अनुरूप इस समझौते में स्वदेशी हथियारों के एकीकरण के लिए प्रौद्योगिकी स्थानांतरण की प्रक्रिया भी शामिल है.
अब भारत में विमान इंजन, सेंसर और हथियारों के लिए रख-रखाव और पूरी जांच करके मरम्मत की सुविधाएं देना भी जरूरी है. यानी कालांतर में स्वदेशी रोजगार भी भारत में बढ़ेंगे. यह लड़ाकू विमान नौसेना की जरूरतों के हिसाब से ही विकसित किया गया है. इसमें वे सभी आधुनिकतम समुद्री प्रणालियां संलग्न हैं,
जिनसे समुद्र में दुश्मन और उसके समुद्री जल में भीतर चलने वाले उपकरणों का सुराग लगाया जा सकता है. इसमें युद्धपोतों के अलावा पनडुब्बियों का पता लगाने के लिए भी उच्च तकनीकी क्षमता के रडार लगे हुए हैं. इन विमानों को नौसेना के विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर तैनात किया जाएगा. यह विमान पुराने विमान मिग-29 का ठोस विकल्प साबित होगा.
ऐसे विमानों की तलाश में भारत लंबे समय से था, क्योंकि हिंद महासागर क्षेत्र में चीन नाजायज वर्चस्व बढ़ाने में लगा है. चीन हिंद महासागर में अंतरराष्ट्रीय नियमों का लगातार उल्लंघन कर रहा है. जबकि फ्रांस की मंशा इस सागर को खुले और समावेशी क्षेत्र के रूप में सुरक्षित बनाए रखना है. एक तरह से इन विमानों के सौदे को चीन की मनमानी के विरुद्ध भारत और फ्रांस की साझा रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.