दुनिया पर राज करनेवाला फारस और समोसा-जलेबी

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: March 24, 2026 05:36 IST2026-03-24T05:36:46+5:302026-03-24T05:36:46+5:30

ईसा पूर्व चौथी सदी में सिकंदर ने जब इस साम्राज्य को हराया, तो फारसी सैनिकों के साथ हिंदी सैनिक भी लड़े थे.

Persia and Samosa-Jalebi world's rulers blog Sunil Soni | दुनिया पर राज करनेवाला फारस और समोसा-जलेबी

सांकेतिक फोटो

Highlightsप्राचीन सभ्यता के इस केंद्र को ‘नेस्फ -ए-जहान’ या आधी दुनिया कहते हैं. वंशजों ने जब यूनान पर चढ़ाई की थी, तो हिंद के सैनिक भी लड़ने गए थे. आधुनिक डाक व्यवस्था की नींव भी फारसी साम्राज्य में रखी गई.

सुनील सोनी

2026 के ऑस्कर में जब ‘वन बैटल ऑफ्टर अनदर’ को छह और ‘सिनर्स’ को चार ट्रॉफियां मिलीं, तो यह प्रतीकवाद ही था, क्योंकि दोनों फिल्में श्वेत नाजीवादियों की क्रूरता की शिनाख्त करती हैं, जिन्होंने दुनिया को फिलहाल संकट में डाल रखा है. इस्फहान में जब अमेरिका-इजराइल ने बमबारी की तो उन लोगों की आह निकल गई, जो प्राचीन सभ्यता के इस केंद्र को ‘नेस्फ -ए-जहान’ या आधी दुनिया कहते हैं.

इस्फहान का स्थापत्य, आधुनिक नगरों को मात करने वाली प्राचीन नगररचना, बाग और चौराहे इसे बेमिसाल बनाते हैं. बमबारी से शहर की सांस्कृतिक धरोहर को वैसा ही नुकसान पहुंचा है, जैसा बामियान की बौद्ध प्रतिमाओं को तालिबान ने पहुंचाया था. पारसा से फारस बने देश को ‘ईरान’ कहा  जाना तो 1934 में शुरू हुआ, जब पहलवी वंश के मुखिया रजा शाह पहलवी ने ऐलान किया.

पहलवियों का राज पंजाब तक व्याप्त था, पर फारसी साम्राज्य किसी जमाने में यूनान से सिंधु घाटी तक फैला था. नृतत्वविज्ञान ने जो खोज निकाला है, वह यह कि आर्य कौम ईरान से होकर ही हिंदुस्तान में फैली और जो पारसी ईरान से भागकर भारतीय महाद्वीप में बसे, उनकी प्राचीन अवेस्ता भाषा भी संस्कृत के भाषा परिवार का ही हिस्सा है.

ईसा पूर्व छठी सदी में सायरस महान या जुलकरनैन ने काबुल व सिंधु नदी का दोआबा जीता और फारसी साम्राज्य को यूनान तक बढ़ा दिया. उनके वंशजों ने जब यूनान पर चढ़ाई की थी, तो हिंद के सैनिक भी लड़ने गए थे. ईसा पूर्व चौथी सदी में सिकंदर ने जब इस साम्राज्य को हराया, तो फारसी सैनिकों के साथ हिंदी सैनिक भी लड़े थे.

सड़कों के निर्माण और आधुनिक डाक व्यवस्था की नींव भी फारसी साम्राज्य में रखी गई. जुलकरनैन से दो सदियों के बाद तक डेरेयिस या दारा प्रथम की मौत के बीच फारस की दुनिया की सबसे बड़ी सल्तनत थी. 1935 में ब्रिटिश कवि रॉबर्ट ग्रीव्ज ने ‘द पर्शियन वर्जन’ नाम से कविता लिखी. यह वही कविता है, जो ब्रिटिश फिल्म ‘300’ में गढ़ी गई यूनानी वीरों की ‘फर्जी’ गाथा का खंडन करती है.

कविता में मैराथन की लड़ाई का वर्णन है, जो ईसा पूर्व 490 में फारसियों और यूनानियों के बीच हुआ था. यूनानियों ने लड़ाई के इतिहास को बदलकर उसे लोकतंत्र के लिए बलिदान की गाथा में तब्दील कर दिया, पर वह था चतुराई से बोला गया झूठ. यूरोपीय साम्राज्य ने यह झूठ फैलाया कि यूनान और रोम के अलावा दुनिया में बाकी सब पशुवत कबीले हैं.

दुनिया पर कब्जा करने में फारस के बाशिंदे सबसे खतरनाक हैं. चूंकि फारस समेत समूचे पूरब में इतिहास श्रुति यानी कहानी कहकर या गीत गाकर आगे बढ़ाने की परंपरा थी, जबकि पश्चिम में इतिहास लेखन की. लिपियों में भी दाएं और बाएं से लिखने का फर्क था. पूरब के देशों को यूरोप ने उपनिवेश बनाया, तो उनका लिखा इतिहास भी फैला.

यूनानी वर्णन के उलट नए पुरा साक्ष्य बताते हैं कि जुलकरनैन के बेटे कंबोजिया ने मिस्र पर कब्जा किया, तो कला की धूम मच गई. खास तौर पर स्थापत्य की. उसके बाद दारा ने 44 लाख वर्ग किमी के फारसी साम्राज्य में इंजीनियरिंग, महल, किले, बुर्ज और कलाकृतियों का निर्माण करवाया. मिस्र में नील नदी और लाल सागर के बीच बनी नहर और मिट्टी का सबसे बड़ा दुर्ग ‘बाम गढ़’ इसकी मिसालें हैं.

साम्राज्यों को राज्यों में विभाजित कर उन्हें सड़कों से जोड़ने की राजनीतिक-आर्थिक समझदारी भी. फारसी साम्राज्य के भव्य उद्यान इंजीनियरिंग शैली में बेजोड़ हैं. इनमें से एक ‘कनात’ भूमिगत नहर व्यवस्था है, जो पहाड़ों की तलहटी से पानी को गुरुत्वाकर्षण से मीलों दूर सूखे इलाकों में पहुंचाती थी. ढलानों पर खोदे कुओं से ढलवां सुरंग के जरिये चूंकि पानी बहता, तो भीषण गर्मी भी नहीं सुखा पाती.

नतीजतन, फारस में कभी पानी की कमी नहीं हुई. चारबाग उद्यान को चार नहरों से विभाजित किया गया और दूध, शहद, पानी व मय की पौराणिक प्रतीक नदियों का रूप दिया गया. सटीक ज्यामितीय माप से बनीं ये नहरें इलाके को हमेशा हराभरा रखती थीं. हुमायूं का मकबरा, ताजमहल, निशात बाग भी चारबाग परंपरा के नमूने हैं.

यही नहीं, सिकंदर ने पंजाब तथा बल्ख को जीता, तो फारसी खरोष्ठी लिपि के सिक्के चले. शक, क्षत्रप, पहलवी, कुषाण, औदुंबर राजाओं ने भी इस लिपि को बरकरार रखा. तक्षशिला-पटना से मिले खरोष्ठी साक्ष्यों के साथ कर्नाटक के चित्रदुर्ग में अशोक के शिलालेख में खरोष्ठी लिपि में खुदे 5 अक्षर हैरत में डालते हैं. फारसी इतिहासकार अबुल फजल बेहाकी का ‘संबोसा’ अब हमारा समोसा है और ‘जलेबिया’ यहां आकर जलेबी हो गई है.

Web Title: Persia and Samosa-Jalebi world's rulers blog Sunil Soni

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