ली फॉक का 90 साल का ‘वेताल’, रुडयार्ड किपलिंग और भारत
By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: March 3, 2026 14:34 IST2026-03-03T14:34:13+5:302026-03-03T14:34:50+5:30
वेताल दरअसल ली फॉक की ईजाद थी, जिन्होंने अंग्रेजी में उनका नाम रखा ‘फैंटम : द घोस्ट हू वाॅक्स’ हिंदी में ‘इंद्रजाल कॉमिक्स’ ने इसे कहा : ‘वेताल : चलता-फिरता प्रेत’ और बांग्ला में ‘अरण्यदेव.’ हीरो घोड़ा बन गया ‘तूफान’ और वफादार भेड़िया ‘डेविल’ बांग्ला में बना ‘बाघा.’

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सुनील सोनी
चलता-फिरता प्रेत ‘वेताल’ पिछली 17 फरवरी को 90 साल का हो गया. यूं वेताल अमर है, पर यह उम्र कॉमिक स्ट्रिप से लेकर वीडियो गेम तक के सफर की है. कॉमिक्स की दुनिया में दो ही सुपरहीरो ऐसे हैं, जिनके पास कोई अतींद्रिय शक्ति यानी सुपर पॉवर नहीं है. पहला वेताल और दूसरा बैटमैन. वेताल ही दुनिया का पहला सुपरहीरो था, जिसने शरीर से चिपकी हुई बैंगनी रंग की पोशाक पहनी, पहचान छिपाने के लिए नकाब लगाया और आंखों में ऐसा मास्क लगाया, जिसमें पुतलियां नहीं दिखतीं. उस पोशाक के ऊपर पहनी पैंट की तरह ही ‘सुपरमैन’ और ‘बैटमैन’ ने भी बाद में वह अंडरपैंट पहनी, जिसे लेकर जब-तब मजाक या मीम बनते रहे हैं. यही वजह थी कि जैक स्नाइडर ने हेनरी कैविल को सुपरमैन बनाया, तो नई पोशाक से वह अंडरपैंट गायब थी.
वेताल दरअसल ली फॉक की ईजाद थी, जिन्होंने अंग्रेजी में उनका नाम रखा ‘फैंटम : द घोस्ट हू वाॅक्स’ हिंदी में ‘इंद्रजाल कॉमिक्स’ ने इसे कहा : ‘वेताल : चलता-फिरता प्रेत’ और बांग्ला में ‘अरण्यदेव.’ हीरो घोड़ा बन गया ‘तूफान’ और वफादार भेड़िया ‘डेविल’ बांग्ला में बना ‘बाघा.’ कोई जमाना था, जब दुनिया में वेताल के 10 करोड़ प्रशंसक थे. आंकड़ा कम होने के बावजूद अब भी यह संख्या बनी हुई है.
दुनियाभर में ‘फैंटम सोसाइटीज’ हैं, जो वेताल के सम्मोहन से छूटने नहीं देतीं. यही कारण है कि 21वीं सदी का वेताल भी बुराई के खिलाफ लड़ रहा है और 22वीं पीढ़ी में ‘किट वॉकर’ पुरखों की बुराई के खिलाफ लड़ाई को आगे बढ़ा रहा है. 17 फरवरी 1936 को अमेरिका में ‘न्यूयॉर्क इवनिंग जर्नल’ में पहली फैंटम कॉमिक स्ट्रिप छपी.
ली फाॅक ने कथा लिखी और रे मूर ने उसे रूप दिया. इस स्ट्रिप में ही वह दम था, जिसने फैंटम को दुनियाभर में इतना मशहूर कर दिया कि कोई देश नहीं होगा, जिसके अखबारों में यह स्ट्रिप न छपी हो. स्ट्रिप ने ही उसे भारी लोकप्रियता दी. यह दिलचस्प मेल है कि रुडयार्ड किपलिंग की भारत पर आधारित ‘द जंगल बुक’ के मोगली, वघीरा, बल्लू और शेरखान के किरदार ‘वेताल’ की कहानियों में मिलते हैं.
फॉक को यूरोप की पौराणिक कथाएं पसंद थीं, पर फैंटम बनाने की बारी आई, तो उन्होंने किपलिंग से प्रेरणा ली. किपलिंग की कहानियां पहली बार 1893-94 में छपी थीं, जिनमें उनके पिता जॉन लॉकवुड किपलिंग के हस्तचित्र थे. किपलिंग की कहानी में मध्य प्रांत के ‘सिवनी’ कस्बे का उल्लेख आता है,
जहां ‘पिंडारी ठगों’ का सफाया कर रहे उनके दोस्त कलेक्टर विलियम स्लीमन ने भेड़ियों के बीच पले बच्चे को पाया था. फॉक को पिंडारियों की यह कहानी इतनी पसंद आई कि उन्होंने सभी वेतालों का सामना जिस खलनायक से करवाया है, वे ‘सिंह ब्रदरहुड’ के नाम से जाने जाते हैं. हालांकि, इंद्रजाल कॉमिक्स ने उसे भारतीय होने से बचाने के लिए ‘सिंगा’ कर दिया,
जैसे कि जगह के नाम को बंगाल को बंगल्ला, बेंगाला या डेनकाली कर दिया गया. फाॅक को रॉबिनहुड भी बहुत पसंद थे, इसलिए वेताल की चिपकी हुई पोशाक की कल्पना भी वहीं से आई, जबकि पुतलीविहीन आंखें प्राचीन यूनानी मूर्तियों से ली गईं. कार्टूनिस्ट भी रहे फॉक ने 5 रंगमंचों के लिए 300 नाटकों का आयोजन किया, जिसमें से 100 उनके निर्देशन में भी थे.
उनके लिखे 12 नाटकों में दो संगीत नाटकों में से एक उनके प्रिय कॉमिक पात्र ‘मैंड्रेक : द मैजिशियन’ पर आधारित है. भारत में ‘द इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया’ ने 24 फरवरी 1952 को ली फाक और विल्सन मैककॉय की क्लासिक फैंटम कहानी ‘द रोप पीपल’ को कॉमिक स्ट्रिप के रूप में छापना शुरू किया, पर 1964 में ‘इंद्रजाल कॉमिक्स’ ने ‘मैंड्रेक’ और ‘फैंटम’ को कई भाषाओं (बांग्ला, मराठी, कन्नड़, तमिल, गुजराती, मलयालम) में कॉमिक्स के रूप में छापना शुरू किया, जिससे धूम मच गई.
हिंदी में पहली कॉमिक्स का नाम ‘वेताल की मेखला’ थी. हालांकि वाराणसी का ‘आज’ इसे ‘वन भैरव’ नाम से हिंदी में स्ट्रिप के रूप में छापता था. लोकप्रियता के कारण 70-80 के दशक में यह साप्ताहिक रूप से लाखों की संख्या में छपने लगी. यह हाल था कि तब वेताल के प्रतीक और लाॅलीपाॅप दुकानों में बिका करते थे. इंद्रजाल कॉमिक्स के कुल 803 अंक प्रकाशित हुए,
जिनमें से 414 अंक हिंदी या अंग्रेजी वेताल के थे. भारत में ‘अमर चित्रकथा’ से ‘कॉमिक्स मैन’ के रूप में प्रसिद्ध अनंत पै भी शुरुआती दौर में इंद्रजाल कॉमिक्स के प्रकाशन में शामिल रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया, स्कैंडिनेविया, स्वीडन, पापुआ न्यू गिनी में यह अब भी बेहद लोकप्रिय है. अब तो इसका वीडियो गेम और टीवी सीरीज भी है. वेताल के पास अब अत्याधुनिक हथियार और उपकरण भी आ गए हैं.