जो हमको है पसंद तुम वही बात कहोगे...!

By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: March 14, 2026 07:06 IST2026-03-14T07:06:11+5:302026-03-14T07:06:11+5:30

न्यायालय के आदेश की अवहेलना करने के लिए वे नए-नए नियम तलाश रहे हैं कि जो देश ट्रम्प की धमकी को भाव नहीं दे रहे हैं, उन्हें कैसे परेशान किया जाए.

Jo hamko Hai pasand tum Wohi Baat Karenge usa donald trump pm narendra modi | जो हमको है पसंद तुम वही बात कहोगे...!

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Highlightsधमकी भरे अंदाज में कह रहे हैं...जो हमको है पसंद, तुम वही बात कहोगे!कमाल है कि उन पर न्यायालय की अवमानना का कोई मुकदमा नहीं चला!अमेरिकी व्यापार कानून की धारा का इन देशों ने उल्लंघन किया है?

मुकेश की आवाज में फिल्म सफर का ये गाना आपने जरूर सुना होगा...जो तुमको हो पसंद वही बात कहेंगे...तुम दिन को अगर रात कहो रात कहेंगे! मौजूदा दौर में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पूरी दुनिया से यही चाहत रख रहे हैं. उन्हें लगता है कि दुनिया को उनके लिए कोरस गाना चाहिए. वे धमकी भरे अंदाज में कह रहे हैं...जो हमको है पसंद, तुम वही बात कहोगे!

और पसंद की बातें न की तो फिर अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहो! अमेरिकी न्याय व्यवस्था ने कह दिया कि ट्रम्प ने दुनिया पर जो टैरिफ लगाया था, वह असंवैधानिक है तो वे अमेरिकी न्यायाधीशों को  बेइज्जत करने से नहीं चूके. और कमाल है कि उन पर न्यायालय की अवमानना का कोई मुकदमा नहीं चला!

बल्कि न्यायालय के आदेश की अवहेलना करने के लिए वे नए-नए नियम तलाश रहे हैं कि जो देश ट्रम्प की धमकी को भाव नहीं दे रहे हैं, उन्हें कैसे परेशान किया जाए. भारत भी उन्हीं देशों में शामिल है. अब वे भारत, चीन और बांग्लादेश समेत 16 बड़े व्यापारिक साझेदारों के खिलाफ जांच कर रहे हैं कि क्या अमेरिकी व्यापार कानून की धारा का इन देशों ने उल्लंघन किया है?

यदि किया है तो अलग से टैरिफ लगाया जा सकता है. सवाल यह है कि ट्रम्प चाहते क्या हैं और उनके चाहने से क्या हो जाएगा? हकीकत तो यह है कि अमेरिका ने कभी भी नहीं चाहा कि भारत उन्नति करे. उसने तो हमेशा ही पाकिस्तान का साथ दिया और ऐसा कोई मौका नहीं छोड़ा जिससे भारत आहत होता हो!

मगर भारत पर क्या फर्क पड़ा? मौके-बे-मौके हम थोड़ा-बहुत परेशान जरूर हुए लेकिन हमारी रफ्तार को अमेरिका का स्पीड ब्रेकर कम नहीं कर पाया. जब भारत ने परमाणु विस्फोट किया तो हर तरफ से भारत को घेरने की कोशिश की गई लेकिन भारत अटल खड़ा रहा. इस बार भी भारत को झुकाने की ट्रम्प ने बहुत कोशिश की लेकिन भारत इस बार भी अडिग है.

यह ट्रम्प को मतिभ्रम है कि वे भारत को घुटनों पर ला देंगे. वे झूठ पर झूठ इसीलिए परोसते हैं ताकि भारत तैश में आकर कुछ बोले और वे भारत के खिलाफ कुछ कदम उठा सकें लेकिन भारत की शानदार कूटनीति उन्हें यह अवसर ही नहीं दे रही है. ट्रम्प को यह राग अलापना बंद करना होगा कि...जो हमको है पसंद, तुम वही बात कहोगे!

जब 1971 में भारत ने अमेरिकी धौंस को तरजीह नहीं दी और पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए तो आज के दौर में धौंस के कोई मायने ही नहीं है. हम न केवल आर्थिक दृष्टि से मजबूत हैं बल्कि सामरिक और कौशल की दृष्टि से भी बहुत ताकतवर हैं. ट्रम्प की हां में हां पाकिस्तान मिलाता रहेगा लेकिन भारत से इस तरह की उम्मीद भी ट्रम्प को नहीं करनी चाहिए.

क्या ट्रम्प को यह याद दिलाने की जरूरत है कि ईरान से युद्ध के पहले वे चिंघाड़ रहे थे कि रूस से भारत ने तेल खरीदा तो उसकी खैर नहीं और अब ईरान ने युद्ध में औकात बता दी है तो उन्हें लगता है कि भारत का रूस से तेल खरीदना जरूरी है ताकि दुनिया के दूसरे देशों में, खास कर  यूरोप में तेल की कमी न हो जाए! एक कहावत है कि बड़ा आदमी वही होता है जो बड़ा दिल रखता है.

ट्रम्प चाहते हैं कि दुनिया कंगाल हो जाए और अमेरिका मालामाल रहे! ऐसी सोच से कोई बड़ा नहीं होता. क्या ट्रम्प को यह याद दिलाने की जरूरत है कि एक वक्त ऐसा था जब ब्रिटेन करीब-करीब पूरी दुनिया पर राज कर रहा था लेकिन आज उसकी हालत क्या है? क्या अमेरिका को ट्रम्प उसी राह पर ले जा रहे हैं? इस सवाल का जवाब हालांकि वक्त देगा लेकिन बहुत सारे अमेरिकियों को यह आशंका सताने लगी है. 

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