Noida International Airport: 31 साल लगे जमीन पर उतरने में?, पीएम मोदी ने पूरा किया, पायलट शशांक शेखर सिंह का सपना?
By राजेंद्र कुमार | Updated: March 28, 2026 14:26 IST2026-03-28T14:24:35+5:302026-03-28T14:26:07+5:30
Noida International Airport: शेखर सिंह ने यह बताया था कि पहली बार वर्ष 1995 में उन्होंने नोएडा में एयरपोर्ट बनाए जाने का जिक्र तत्कालीन मुलायम सिंह यादव से किया था, तो उन्होंने (मुलायम सिंह) केंद्र सरकार को नोएडा में एयरपोर्ट बनाने के लिए एक पत्र लिख कर भेजा था.

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नोएडाः शशांक शेखर सिंह ने एक पायलट के तौर पर करीब 45 साल पहले अपने करियर की शुरू की थी. उन्हे सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री वीपी सिंह के आधिकारिक विमान पायलट के रूप में प्रतिनियुक्ति पर लाया गया था. शेखर सिंह आर्मी की सेवा करने के बाद स्टेट पायलट बने थे. उन्हे हर किस्म के किस्म के छोटे प्लेन और हेलीकॉप्टर चलाने में महारत हासिल थी. सूबे के मुख्यमंत्री रहे वीपी सिंह, वीर बहादुर सिंह, एनडी तिवारी, मुलायम सिंह यादव, कल्याण सिंह, राम प्रकाश गुप्ता और मायावती को प्लेन और हेलीकॉप्टर से प्रदेश के तमाम जिलों और दिल्ली ले जाने का कार्य उन्होंने वर्षों तक किया
यूपी में सिविल एविएशन महकमे के निदेशक बनने और प्रदेश का कैबिनेट सचिव बनाने के बाद भी उन्होंने मुख्यमंत्रियों को लखनऊ से दिल्ली और प्रदेश के किसी भी जिले में प्लेन और हेलीकॉप्टर चलाते हुए ले जाने का कार्य हमेशा ही किया.सूबे के तमाम मुख्यमंत्रियों के प्लेन और हेलीकॉप्टर को उड़ाने के चलते उनका नाम लिम्बा बुक में शामिल किया गया था. इन्ही शेखर सिंह का एक ख्वाब था कि यूपी के नोएडा (गौतमबुद्ध नगर) में एक एयरपोर्ट बने. अपने इस ख्वाब का जिक्र वह हम पत्रकारों से मेल मुलाकातों के दौरान करते रहते थे.
ऐसे शुरू हुआ था नोएडा में एयरपोर्ट बनाने का सफर
शेखर सिंह ने यह बताया था कि पहली बार वर्ष 1995 में उन्होंने नोएडा में एयरपोर्ट बनाए जाने का जिक्र तत्कालीन मुलायम सिंह यादव से किया था, तो उन्होंने (मुलायम सिंह) केंद्र सरकार को नोएडा में एयरपोर्ट बनाने के लिए एक पत्र लिख कर भेजा था. यह पत्र शशांक शेखर सिंह ने तैयार किया था और मुलायम सिंह ने उस पर साइन किया था.
इस पत्र को भेजे जाने के कुछ माह बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन हो गया और यह मामला ठंडा पड गया. इस बीच राज्य में मायावती की सरकार आई तो शशांक शेखर सिंह अपने कुछ मित्रों के जरिए मायावती के खेम में पहुंच गए. उन्होने मायावती को दिल्ली से आगरा तक यमुना एक्सप्रेस वे बनाए जाने के अपने एक प्रस्ताव के बारे में बताया.
उन्हें समझाया कि एक्सप्रेसवे के निर्माण पर सरकार को एक रुपया भी खर्च नहीं करना होगा. प्राइवेट सेक्टर इसे तैयार करेगा, बदले में उसे जमीन उपलब्ध करानी होगी. मायावती को यह प्रस्ताव ठीक लगा और उन्होने इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति जता दी. तो इस एक्सप्रेस वे के निर्माण को लेकर कागजी कार्रवाई शुरू हुई, इसी बीच भाजपा के सहयोग से चल रही मायावती की सरकार सत्ता से बाहर हो गई.
पहले कल्याण सिंह और उसके बाद राम प्रकाश गुप्ता यूपी के सीएम बने.इन दोनों मुख्यमंत्रियों ने मायावती के किसी भी प्रोजेक्ट पर कोई ध्यान नहीं दिया, लेकिन जैसे ही सूबे के सीएम ही कुर्सी पर राजनाथ सिंह विराजमान हुए तो शेखर सिंह के प्रयासों से नोएडा में एयरपोर्ट बनाने और यमुना एक्सप्रेसवे के प्रस्तावों ने गति पकड़ ली.
मुख्यमंत्री की हैसियत से उन्होंने वर्ष 2001 में नोएडा में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाए जाने का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा. यह प्रस्ताव केंद्र सरकार में लंबे समय तक ठंडे बस्ते में पड़ा रहा. इसे उस समय दिल्ली एयरपोर्ट से कम दूरी का हवाला देकर मामला फिर लटका दिया गया. इसके बाद वर्ष 2002 में फिर सूबे में मायावती की सरकार बनी.
इस सरकार में शेखर सिंह ने प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास और सिविल एविएशन की हैसियत से केंद्र सरकार को पत्र भेज कर इंटरनेशनल एयरपोर्ट एंड एविएशन हब बनाए जाने का नया प्रस्ताव भेजा. मुख्यमंत्री मायावती के इस प्रस्ताव पर भी केंद्र सरकार ने चुप्पी साध ली. लेकिन शेखर सिंह ने हार नहीं मानी.
मायावती का प्रयास
वर्ष 2007 में मायावती पूर्ण बहुमत से साथ फिर यूपी की सत्ता पर काबिज हुई. तब तक केंद्र सरकार ने वर्ष 2002 में भेजे गए मायावती के प्रस्ताव पर कोई कार्रवाई नहीं की थी. केंद्र सरकार के इस रुख से खफा होकर मायावती ने केंद्र पर इंटरनेशनल एयरपोर्ट एंड एविएशन हब बनाए जाने के प्रस्ताव पर रोड़ा अटकाने का आरोप लगाया.
तब शेखर सिंह ने यह कहा था कि गौतमबुद्ध नगर जिले के जेवर गांव में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट हब परियोजना में हो रही देरी के लिए केंद्र की मंजूरी न मिलने के कारण हो रही है. वर्ष 2002 में यह दावा किया गया था कि जेवर में 3,500 करोड़ रुपए की लगात का प्रस्तावित ताज इंटरनेशनल एयरपोर्ट हब भारत का सबसे बेहतरीन और अत्याधुनिक हवाईअड्डा होगा,
जहां यात्रियों को तमाम तरह की सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी. तब यूपी के आधारभूत एवं औद्योगिक विकास विभाग की सचिव अर्चना अग्रवाल ने यह दावा किया था कि केंद्र से प्रस्तावित एयरपोर्ट की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है और केंद्र से हरी झंडी मिलने के बाद ही इस परियोजना के लिए बोली प्रक्रिया शुरू की जाएगी.
तब नोएडा में एयरपोर्ट हब के लिए तकनीकी परीक्षण भी किया गया था और उसकी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी गई थी. राज्य सरकार की ओर से एक प्रतिनिधि को भी केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय को यह बताने के लिए भेजा गया था कि उक्त परियोजना परियोजना की अनुमति के लिए मंत्रियों की बैठक बुलाई जाए.
तब शेखर सिंह ने यह दावा भी किया था कि देश में एविएशन सेक्टर 21 फीसदी की दर से विकास कर रहा है. ऐसे में ताज इंटरनेशनल एयरपोर्ट हब के निर्माण से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी. उन्होने बताया था कि उक्त परियोजना को केंद्र सरकार की अनुमति पाने में सबसे बड़ी अड़चन यह है कि नियमानुसार, 150 किलोमीटर के अंदर दूसरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट नहीं हो सकता है.
चूंकि नई दिल्ली में इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहले से ही मौजूद है, इसलिए ताज इंटरनेशनल एयरपोर्ट हब के निर्माण की अनुमति वर्षों से यूपी सरकार को नहीं दी जा रही है. हालांकि केंद्र सरकार इस नियम में छूट दे सकती है, क्योंकि उसने मुंबई के पास नवी मुंबई में प्रस्तावित एक अन्य एयरपोर्ट को अनुमति दे चुकी है. उनके इस कथन के बाद भी मायावती और अखिलेश यादव की सरकार में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट हब बनाए जाने की अनुमति नहीं मिली.
योगी सरकार में हुआ फैसला
वर्ष 2017 में यूपी में योगी आदित्यनाथ की सरकार आ गई. इस सरकार में कई सालों से लंबित पड़े ताज इंटरनेशनल एयरपोर्ट हब के प्रस्ताव की याद आयी. फिर आनन फानन में मई 2018 में इस प्रस्ताव को सैद्धान्तिक मंजूरी मिली गई.तय हुआ कि उक्त परियोजना को चार चरणों में विकसित किया जाएगा और इसकी कुल 29,560 करोड़ रुपए आएगी.
सूबे के सीनियर अफसरों के अनुसार, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का पहला चरण 11,200 करोड़ रुपए के निवेश से तैयार हुआ है. इसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर विकसित किया गया है. यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे 1,334 हेक्टेयर में फैला यह एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर के दबाव को कम करने के साथ-साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश को सीधे अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी से जोड़ने वाला है.
इसका टर्मिनल-वन करीब 1.38 लाख वर्ग मीटर में फैला है और इसकी शुरुआती क्षमता सालाना 1.2 करोड़ यात्रियों की होगी. भविष्य में इसे बढ़ाकर 7 करोड़ यात्रियों तक ले जाने की योजना है, जो इसे देश के सबसे बड़े एविएशन हब्स में शामिल कर सकती है. एयरपोर्ट का 3,900 मीटर लंबा रनवे बड़े विमानों के संचालन के लिए सक्षम है और आधुनिक नेविगेशन सिस्टम से लैस है.
इस एयरपोर्ट को आधुनिक, डिजिटल और ऊर्जा दक्ष तकनीकों के साथ विकसित किया जा रहा है.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज इस जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन किया तो उत्तर प्रदेश पांच अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे वाला देश का पहला राज्य बन गया. इसके साथ ही शशांक शेखर सिंह का देखा हुआ ख्वाब भी पूरा हो गया.
तो शेखर सिंह का ये कहा फिर याद आ गया कि नोएडा में जब इंटरनेशनल एयरपोर्ट हब शुरू होगा तो नोएडा और उसके आसपास के जिलों की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी. कुछ ऐसा ही दावा आज फिर नोएडा में किया गया. कुल मिलाकर पीएम मोदी ने एविएशन सेक्टर के जानकार पायलट शशांक शेखर सिंह के निधन के 13 साल बाद उनका एक सपना पूरा किया. यह देखकर अच्छा लगा.