अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बजाय संकट के साथी रूस पर ही भरोसा करने में भलाई

By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: March 5, 2026 06:36 IST2026-03-05T06:36:11+5:302026-03-05T06:36:11+5:30

जनवरी माह में केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा में बताया था कि देश के पास आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में गुफाओं, रिफाइनरियों और भंडारण सुविधाओं में रखा इतना कच्चा तेल है कि वह घरेलू मांग को 74 दिनों तक पूरा कर सकता है.

iran war better trust Russia our partner in crisis, rather than US President Donald Trump | अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बजाय संकट के साथी रूस पर ही भरोसा करने में भलाई

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Highlightsअब अगर कीमतें बढ़ रही हैं तो उसका भार भी उन कंपनियों को ही वहन करना चाहिए.अमेरिका के लिए ईरान नासूर साबित नहीं होगा और कुछ ही दिनों में यह युद्ध खत्म हो जाएगा.ट्रम्प दुनिया को युद्ध की आग में झोंक रहे हैं, उसका खामियाजा भारत क्यों भुगते?

ऐसे समय में, जबकि ईरान पर इजराइल-अमेरिका के भीषण हमलों और ईरान के जवाबी हमलों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें लगभग नौ प्रतिशत चढ़ गई हैं, भारत में कीमतों का स्थिर रहना बहुत बड़ी राहत के समान है. पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में देश में निकट भविष्य में भी बढ़ोत्तरी नहीं होने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि हमारे यहां कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार है.

विगत जनवरी माह में केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा में बताया था कि देश के पास आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में गुफाओं, रिफाइनरियों और भंडारण सुविधाओं में रखा इतना कच्चा तेल है कि वह घरेलू मांग को 74 दिनों तक पूरा कर सकता है.

इसके अलावा चूंकि पिछले वर्षों में तेल कंपनियों को कम दाम पर रूसी तेल मिलने के दौरान अतिरिक्त लाभ कमाने का मौका मिला है (क्योंकि उस दौरान तेल कंपनियों ने सस्ती दरों पर तेल मिलने का फायदा उपभोक्ताओं को नहीं दिया), इसलिए अब अगर कीमतें बढ़ रही हैं तो उसका भार भी उन कंपनियों को ही वहन करना चाहिए.

हालांकि युद्ध अगर लंबा खिंचा तो देर-सबेर उपभोक्ताओं पर भी कुछ न कुछ भार पड़ेगा ही, लेकिन अभी तो उम्मीद यही जताई जा रही है कि रूस के लिए सिरदर्द बन चुके यूक्रेन युद्ध की तरह अमेरिका के लिए ईरान नासूर साबित नहीं होगा और कुछ ही दिनों में यह युद्ध खत्म हो जाएगा.

लेकिन इस तेल संकट का एक बड़ा सबक यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सनक के आगे झुककर हमें अपने पुराने मित्र रूस का साथ हर्गिज नहीं छोड़ना चाहिए. पिछले दिनों हुई ट्रेड डील के बाद ट्रम्प डींग हांक रहे हैं कि भारत अब रूस से तेल आयात नहीं करेगा, वरना वे यह डील रद्द कर देंगे. लेकिन जिस तरह से ट्रम्प दुनिया को युद्ध की आग में झोंक रहे हैं, उसका खामियाजा भारत क्यों भुगते?

हम अपनी  ऊर्जा जरूरतें कहां से पूरी करें, इसमें जबरन दखलंदाजी करने वाले  ट्रम्प होते कौन हैं? राहत की बात है कि अमेरिकी धौंस के बावजूद, वर्तमान संकट के समय भी रूस ने कहा है कि ऊर्जा आपूर्ति में लगातार बाधा आने पर वह भारत की ऊर्जा जरूरतों की मांग पूरी करेगा. इसलिए उम्मीद की जानी चाहिए कि अमेरिका-इजराइल और ईरान की जंग में स्थित अगर ज्यादा बिगड़ी, तब भी ऊर्जा संकट के समय में रूस  हमारा साथ देगा, जिससे परिस्थिति बेकाबू नहीं होने पाएगी.

Web Title: iran war better trust Russia our partner in crisis, rather than US President Donald Trump

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