7 हाईस्पीड कॉरिडोर से चमकेगी भारतीय रेल, रेल इतिहास को एक नया मोड़

By अरविंद कुमार | Updated: February 2, 2026 05:40 IST2026-02-02T05:40:50+5:302026-02-02T05:40:50+5:30

योजना में दिल्ली-अमृतसर, दिल्ली-आगरा-कानपुर-लखनऊ-वाराणसी का पटना और कोलकाता तक विस्तार करने के साथ एक अन्य हाईस्पीड रेल लाइन पटना से कटिहार और न्यू जलपाईगुड़ी होते हुए गुवाहाटी तक ले जाने की सिफारिश की गई है.

Indian Railways shine 7 high-speed corridor new turn in railway history blog Arvind Kumar Singh | 7 हाईस्पीड कॉरिडोर से चमकेगी भारतीय रेल, रेल इतिहास को एक नया मोड़

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Highlightsहैदराबाद, बेंगलुरु, मुंबई, चेन्नै, नागपुर को जोड़ने के लिए खाका तैयारा किया गया था.2022 तक बुलेट ट्रेन चलने लगेगी, पर उसमें अभी भी देरी है. फिर भी काम चालू है.देशों में भारत ही ऐसा है, जिसके पास एक भी हाईस्पीड कॉरिडोर नहीं रहा है.

आम बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश के विभिन्न हिस्सों में सात हाईस्पीड रेल कॉरिडोर के ऐलान के साथ रेल इतिहास को एक नया मोड़ दिया है. इन कॉरिडोरों के बनने से भारतीय रेल बेशक बहुत शक्तिमान होगी. मुंबई से पुणे, पुणे से हैदराबाद, हैदराबाद से बेंगलुरु, हैदराबाद से चेन्नई और चेन्नई से बेंगलुरु इसका हिस्सा है. उत्तर में दिल्ली से वाराणसी और वाराणसी से सिलीगुड़ी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर साकार होगा तो उच्च गति के साथ तकनीक में भी भारतीय रेल छलांग लगाने की तैयारी करेगी. हालांकि इसमें भारी संसाधन लगेगा और उच्च तकनीक के साथ कई पहलुओं पर काफी काम करने की जरूरत होगी. अगर गौर करें तो दुनिया के प्रमुख देशों में भारत ही ऐसा है, जिसके पास एक भी हाईस्पीड कॉरिडोर नहीं रहा है.

मोदी सरकार के पहले रेल मंत्री डी.वी.सदानंद गौड़ा ने जरूर 2014 में भारतीय रेल को बुलेट युग में ले जाने का वादा करने के साथ कई घोषणाएं की थीं. 2017 में मुंबई अहमदाबाद हाईस्पीड रेल परियोजना का भूमिपूजन हुआ तो सोचा गया था कि 15 अगस्त, 2022 तक बुलेट ट्रेन चलने लगेगी, पर उसमें अभी भी देरी है. फिर भी काम चालू है.

ये पहली परियोजना साकार होगी तो अन्य इलाकों में भी हाईस्पीड की गति तेज होती दिखेगी. दरअसल इस मुद्दे पर राष्ट्रीय रेल योजना में एक व्यापक खाका खींचा गया था, जिसमें प्रमुख नगरों, वाणिज्यिक और आर्थिक केंद्रों को जोड़ने के लिए कुछ प्रमुख कॉरिडोरों की पहचान भी की गई थी.

योजना में दिल्ली-अमृतसर, दिल्ली-आगरा-कानपुर-लखनऊ-वाराणसी का पटना और कोलकाता तक विस्तार करने के साथ एक अन्य हाईस्पीड रेल लाइन पटना से कटिहार और न्यू जलपाईगुड़ी होते हुए गुवाहाटी तक ले जाने की सिफारिश की गई है. इसी के तहत हैदराबाद, बेंगलुरु, मुंबई, चेन्नै, नागपुर को इससे जोड़ने के लिए एक खाका तैयारा किया गया था.

जैसे मुंबई-नासिक-नागपुर हाईस्पीड कॉरिडोर भी प्रस्तावित था. साथ ही बाद में इनके विस्तार के साथ आपस में इनको जोड़ कर विस्तृत सुविधा प्रदान करना इसका लक्ष्य रहा है. राष्ट्रीय रेल योजना की परिकल्पना थी कि 2026 से 2031 के दौरान कुल 2531 किमी लंबे आरंभिक चार कॉरिडोर बनें जिन पर करीब 504200 करोड़ रु. की लागत परिकल्पित थी.

पर सरकार ने जो सात कॉरिडोर इस बजट में घोषित किए हैं वो अधिक महत्वाकांक्षी और भारी लागत वाले हैं. साथ ही नया डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर दानकुनी से सूरत तक पूर्व से पश्चिम को जोड़ेगा. रेलवे की इस बात के लिए तीखी आलोचना होती है कि आज भी रेलगाड़ियों की औसत गति केवल 51.1 किमी प्रति घंटा है. साधारण पैसेंजर गाड़ी की औसत गति केवल 35.1 किमी प्रति घंटा है.

जबकि माल गाड़ी की औसत गति 23.6 किमी प्रति घंटा है. लेकिन अब ऐसा लगता है कि चंद सालों में भारतीय रेल तेज रफ्तार के सफर में भी एक नया इतिहास रचेगी, क्योंकि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के पूर्वी और पश्चिमी खंडों के साकार होने के कारण बहुत सी मालगाड़ियों को वैकल्पिक मार्ग सुलभ हो जाएगा.

Web Title: Indian Railways shine 7 high-speed corridor new turn in railway history blog Arvind Kumar Singh

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