India-US deal: बर्फ पिघली लेकिन विश्वसनीयता का संकट खत्म नहीं!

By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: February 4, 2026 06:03 IST2026-02-04T06:03:26+5:302026-02-04T06:03:26+5:30

India-US deal: डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत पर पहले 26 प्रतिशत टैरिफ लगाया था और फिर रूस से तेल खरीदने के कारण अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था.

India-US deal snow melted but credibility crisis did not end | India-US deal: बर्फ पिघली लेकिन विश्वसनीयता का संकट खत्म नहीं!

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Highlightsअब कुल 18 प्रतिशत टैरिफ की घोषणा हुई है.तनावपूर्ण स्थिति पैदा हुई है, उसे दूर किया जाए.चित भी हमारी और पट भी हमारी वाली नीति के प्रबल समर्थक हैं.

India-US deal: इस बात का अंदाजा तो हो रहा था कि यूरोपीय यूनियन के साथ भारत के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट ने अमेरिका को काफी हद तक चिंता में डाल दिया है. यूरोपीय यूनियन ने जिस तरह से अमेरिका को कई मसलों पर झटका दिया, उससे साफ हो चुका है कि दोनों के बीच दूरी बढ़ रही है. उधर ब्रिटेन ने चीन के साथ गलबहियां की हैं और भारत के साथ पहले ही राह पकड़ चुका है. इधर भारत ने भी रवैया स्पष्ट कर दिया था कि वह अमेरिकी दबाव में झुकने को तैयार नहीं है. इन सारी परिस्थितियों ने ट्रम्प को थोड़ी नरमी की राह पर लाने में प्रमुख भूमिका निभाई और अंतत: उन्होंने भारत पर लगाए गए टैरिफ में भारी कटौती की. ट्रम्प ने भारत पर पहले 26 प्रतिशत टैरिफ लगाया था और फिर रूस से तेल खरीदने के कारण अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था.

अब कुल 18 प्रतिशत टैरिफ की घोषणा हुई है. विशेषज्ञ मान रहे हैं कि ट्रम्प ने यह घोषणा करके इस बात की कोशिश की है कि भारत के साथ जो तनावपूर्ण स्थिति पैदा हुई है, उसे दूर किया जाए. लेकिन ट्रम्प तो ट्रम्प हैं. वे तो चित भी हमारी और पट भी हमारी वाली नीति के प्रबल समर्थक हैं. वे दुनिया को यह दिखाने से स्वाभाविक रूप से परहेज करेंगे कि अमेरिका कोई नरमी बरत रहा है.

इसलिए उन्होंने 18 प्रतिशत टैरिफ की घोषणा के साथ ही यह भी कहा कि भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद करने, अमेरिकी सामान पर शून्य टैरिफ और 500 अरब डॉलर का अमेरिकी सामान खरीदने पर सहमति जताई है. इधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी टैरिफ कटौती की घोषणा का स्वागत किया है लेकिन उन्होंने ऐसी कोई जानकारी नहीं दी है जिसके बारे में ट्रम्प ने सार्वजनिक घोषणा की है.

अब सवाल है कि क्या भारत पूरी तरह से रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा? ऐसा लगता नहीं है. थोड़ी कमी तो हुई है लेकिन पूरी तरह तेल की खरीदी बंद हो जाएगी, यह मानना मुश्किल है क्योंकि परंपरागत रूप से रूस ही भारत का सच्चा दोस्त है. भारत यह कैसे भूल सकता है कि 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ जंग में अमेरिका ने पाकिस्तान का साथ दिया था और मौजूदा दौर में भी उसने पाकिस्तान को अपनी गोद में बिठा रखा है. इसके ठीक विपरीत हर मौके पर रूस हमारे साथ खड़ा रहा है. आज भी रक्षा सौदों में हमारा सबसे बड़ा साझीदार रूस ही है.

जहां तक अमेरिकी सामान पर शून्य टैरिफ का सवाल है तो कुछ सामानों पर ऐसा हो सकता है ताकि ट्रम्प अपनी पीठ थपथपा सकें लेकिन हर सामान पर शून्य टैरिफ करने से भारत को क्या मिलेगा? और तीसरी बात 500 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान की खरीदी का तो प्रश्न ही नहीं उठता है. अभी यह खरीदी 50 अरब डॉलर से भी कम है. इसमें इतना उछाल कैसे आ सकता है?

इसलिए यह साफ लग रहा है कि ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर जो घोषणा की है, उसमें बहुत कुछ संदेह के घेरे में है. यह भी कहा गया है कि दोनों देशों के बीच एफटीए भी जल्दी ही साइन होने वाला है. यह अच्छी बात है लेकिन दोनों देशों के बीच जो संदेह की स्थिति पैदा हुई है, उसमें विश्वसनीयता कैसे लौटेगी? यानी विश्वसनीयता का संकट बना हुआ है. भारत को भी फूंक-फूंक कर कदम रखना होगा क्योंकि ट्रम्प का मिजाज पहाड़ी मौसम की तरह है. कब बदल जाए, कुछ पता नहीं!  

Web Title: India-US deal snow melted but credibility crisis did not end

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