अपने निवेश लक्ष्य से बहुत पीछे है ईवी सेक्टर?, 2,23,119 करोड़ रुपए का निवेश

By निशांत | Updated: February 28, 2026 05:25 IST2026-02-28T05:25:53+5:302026-02-28T05:25:53+5:30

आईईईएफए की 25 फरवरी 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार 2020 से 2025 के बीच भारत के इलेक्ट्रिक ट्रांसपोर्ट सेक्टर में 2,23,119 करोड़ रुपए यानी लगभग 25.6 अरब डॉलर का निवेश हुआ. यह राशि उल्लेखनीय है.

EV sector far behind investment target Investments worth ₹223119 crore in India's electric transport sector 2020 and 2025 blog Nishant Saxena | अपने निवेश लक्ष्य से बहुत पीछे है ईवी सेक्टर?, 2,23,119 करोड़ रुपए का निवेश

सांकेतिक फोटो

Highlights 2030 तक निर्धारित लक्ष्यों के लिए अनुमानित 12.5 लाख करोड़ रुपए की आवश्यकता का यह केवल 18 प्रतिशत है. लगभग 82 प्रतिशत पूंजी, करीब 10.27 लाख करोड़ रुपए अब भी जुटाए जाने हैं. बसों में 40 प्रतिशत और दो व तीन पहिया वाहनों में 80 प्रतिशत ईवी हिस्सेदारी का लक्ष्य रखा है.

सड़क पर इलेक्ट्रिक गाड़ियां दिख रही हैं. तीन-पहिया ईवी ने शहरों की लास्ट माइल डिलीवरी बदल दी है. प्रीमियम इलेक्ट्रिक कारें अब स्टेटस सिंबल भी हैं. लेकिन कागज पर रखे आंकड़े एक अलग कहानी कहते हैं.इंस्टीट्यूट फाॅर एनर्जी इकोनाॅमिक्स एंड फाइनेंशियल एनालिसिस यानी आईईईएफए की 25 फरवरी 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार 2020 से 2025 के बीच भारत के इलेक्ट्रिक ट्रांसपोर्ट सेक्टर में 2,23,119 करोड़ रुपए यानी लगभग 25.6 अरब डॉलर का निवेश हुआ. यह राशि उल्लेखनीय है.

लेकिन 2030 तक निर्धारित लक्ष्यों के लिए अनुमानित 12.5 लाख करोड़ रुपए की आवश्यकता का यह केवल 18 प्रतिशत है. अर्थात लगभग 82 प्रतिशत पूंजी, करीब 10.27 लाख करोड़ रुपए अब भी जुटाए जाने हैं. भारत ने 2030 तक निजी कारों में 30 प्रतिशत, वाणिज्यिक वाहनों में 70 प्रतिशत, बसों में 40 प्रतिशत और दो व तीन पहिया वाहनों में 80 प्रतिशत ईवी हिस्सेदारी का लक्ष्य रखा है.

इन लक्ष्यों के लिए विनिर्माण क्षमता, चार्जिंग अवसंरचना और वित्तीय ढांचे में बड़े पैमाने पर निवेश आवश्यक है. रिपोर्ट के अनुसार 2020 से 2025 के बीच निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में गया. इसके बाद सरकारी सब्सिडी और प्रोत्साहन, और फिर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर. विनिर्माण निवेश में आंतरिक संसाधनों की हिस्सेदारी 1,59,701 करोड़ रुपए रही,

इसके बाद ऋण 36,738 करोड़ रुपए और इक्विटी 6,455 करोड़ रुपए. सरकारी योजनाओं, जिनमें एफएएमई सहित केंद्र और राज्यस्तरीय नीतियां शामिल हैं, के तहत वित्त वर्ष 2020 से 2024 के बीच 18,251 करोड़ रुपए वितरित किए गए. इसने शुरुआती मांग को प्रोत्साहित किया. लेकिन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की रफ्तार पर्याप्त नहीं. 2020 में 5,151 सार्वजनिक चार्जर थे,

जो 2025 तक बढ़कर 39,485 हो गए. फिर भी 2030 लक्ष्यों के लिए अनुमानित 20,600 करोड़ रुपए की आवश्यकता के मुकाबले 2020 से 2025 तक वास्तविक निवेश केवल लगभग 9.6 प्रतिशत रहा.
रिपोर्ट एक एकीकृत ईवी वित्त मंच का प्रस्ताव करती है, जिसमें आंशिक क्रेडिट गारंटी, रेसिडुअल वैल्यू सुरक्षा, बैटरी एज ए सर्विस और को-लेंडिंग ढांचा शामिल हो.

रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि जैसे-जैसे बिक्री मात्रा और प्रदर्शन डेटा बढ़ेगा, जोखिम प्रीमियम घट सकता है. इससे पूंजी का पुनर्चक्रण संभव होगा और एक स्व-प्रेरित निवेश चक्र विकसित हो सकता है. भारत की ईवी कहानी अब केवल नीति घोषणाओं की नहीं, यह वित्तीय संरचना की परीक्षा है. 2.23 लाख करोड़ रुपए ने आधार तैयार किया है, लेकिन 2030 की मंजिल तक पहुंचने के लिए पूंजी का प्रवाह सस्ता, संरचित और भरोसेमंद होना होगा.

Web Title: EV sector far behind investment target Investments worth ₹223119 crore in India's electric transport sector 2020 and 2025 blog Nishant Saxena

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