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जन्म के बाद डिजिटल जनगणना खुद ही अपडेट और मृत्यु होगी तो नाम खुद ही डाटा से डिलीट?

By प्रमोद भार्गव | Updated: March 9, 2026 20:12 IST

जन्म के बाद डिजिटल जनगणना खुद ही अद्यतन हो जाएगी और जब किसी की मृत्यु होगी तो उसका नाम खुद ही डाटा से डिलीट हो जाएगा.

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ठळक मुद्देजनगणना में बच्चे के जन्म, माता-पिता, जाति और जन्म स्थान की जानकारी समेत 16 भाषाओं में 36 प्रश्नों के उत्तर दर्ज हो जाएंगे. बालक जब 18 साल का होगा तो खुद ही उसका नाम चुनाव आयोग के पास चला जाएगा.नतीजतन उसका मतदाता पहचान पत्र बनने के साथ मतदाता सूची में भी नाम स्वमेव दर्ज हो जाएगा.

दुनिया की सबसे बड़ी आबादी की जनगणना की अंतिम तैयारी के रूप में अब गृह मंत्री अमित शाह ने टूल (औजार) भी जारी कर दिए हैं. कोविड महामारी के कारण 2021 में टाली गई जनगणना 2027 में शुरू होगी. ई-बाजार, ई-आवेदन आदि के बाद अब ई-जनगणना यानी डिजिटल गिनती होगी. इस गिनती में जाति की गिनती भी साथ-साथ होगी. इसमें जन्म और मृत्यु दोनों ही डिजिटल जनगणना से जुड़े होंगे. हर जन्म के बाद डिजिटल जनगणना खुद ही अद्यतन हो जाएगी और जब किसी की मृत्यु होगी तो उसका नाम खुद ही डाटा से डिलीट हो जाएगा.

सेंसर रजिस्टर यानी जनगणना में बच्चे के जन्म, माता-पिता, जाति और जन्म स्थान की जानकारी समेत 16 भाषाओं में 36 प्रश्नों के उत्तर दर्ज हो जाएंगे. बालक जब 18 साल का होगा तो खुद ही उसका नाम चुनाव आयोग के पास चला जाएगा, नतीजतन उसका मतदाता पहचान पत्र बनने के साथ मतदाता सूची में भी नाम स्वमेव दर्ज हो जाएगा.

फिर जब किसी की मौत हो जाएगी तो ऑनलाइन जनगणना के डाटा से उस शख्स का नाम खुद ही डिलीट भी हो जाएगा. इस तरह से जनगणना का डाटा हमेशा खुद अद्यतन होता रहेगा. राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) की प्रक्रिया पर करीब 12000 करोड़ रुपए खर्च होंगे. डिजिटल जनगणना की घोषणा 1 फरवरी 2021 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने की थी.

जनगणना-2021 में नागरिकों को गणना में शामिल होने की एक बेहतर और अनूठी ऑनलाइन सुविधा दी गई है. भारत सरकार के केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों को ऑनलाइन स्व-गणना का अधिकार देने के लिए नियमों में परिवर्तन किए हैं. जनगणना (संशोधन)-2022 के अनुसार परंपरागत तरीके से तो जनगणना घर-घर जाकर सरकारी कर्मचारी करेंगे ही,

लेकिन अब नागरिक स्व-गणना के माध्यम से भी अनुसूची प्रारूप भर सकता है. इसके लिए पूर्व नियमों में ‘इलेक्ट्रॉनिक फार्म’ शब्द जोड़ा गया है, जो सूचना प्रौद्योगिकी कानून 2000 की धारा दो की उप धारा (एक) के खंड आर में दिया गया है. इसके अंतर्गत मीडिया, मैग्नेटिक, कम्प्यूटर जनित माइक्रोचिप या इसी तरह के अन्य उपकरण में तैयार कर भेजी या संग्रहित की गई जानकारी को इलेक्ट्रॉनिक फार्म में दी गई जानकारी माना जाएगा. यानी एंड्राॅयड या आईओएस प्लेटफार्म पर अपनी गिनती दर्ज की जा सकेगी, जो कि आजकल घर-घर में उपलब्ध है.

इस ऑनलाइन प्रविष्टि के अलावा घर-घर जाकर भी जनगणना की जाएगी. इसमें कोई दो राय नहीं कि ऑनलाइन प्रयोग अद्वितीय है. लेकिन देश की जनता के स्थायी और निरंतर गतिशील पंजीकरण के दृष्टिगत अब जरूरी है कि ग्राम पंचायत स्तर पर जनगणना की जवाबदेही सौंप दी जाए.

गिनती के विकेंद्रीकरण का यह नवाचार जहां हर 10 साल में होने वाली जनगणना की बोझिल परंपरा से मुक्त होगा, वहीं देश के पास प्रतिमाह प्रत्येक पंचायत स्तर से जीवन और मृत्यु की गणना के सटीक व विश्वसनीय आंकड़े मिलते रहेंगे.  

टॅग्स :डिजिटल इंडियाअमित शाह
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