दिव्यांगों के नाम पर भ्रष्टाचार तो सबसे ज्यादा शर्मनाक!
By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: February 14, 2026 05:50 IST2026-02-14T05:50:05+5:302026-02-14T05:50:05+5:30
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल वही संस्थाएं चलेंगी जो वास्तव में दिव्यांगों के पुनर्वास के लिए कार्य कर रही हैं.

सांकेतिक फोटो
वैसे तो भ्रष्टाचार किसी भी तरह का हो, उसे शर्मनाक ही माना जाना चाहिए लेकिन ऐसे लोगों की कमी नहीं है जिनके लिए शर्म कोई मायने नहीं रखती. उन्हें तो बस भ्रष्टाचार का मौका चाहिए! अब दिव्यांग कल्याण संस्थाओं का ही उदाहरण लें तो पिछले एक साल में 363 संस्थाओं पर महाराष्ट्र दिव्यांग कल्याण विभाग ने कार्रवाई करते हुए उनका पंजीयन रद्द किया. यदि हम पिछले 13 वर्षों का आंकड़ा देखें तो कम से कम 900 संस्थाओं पर कार्रवाई की गई है. जाहिर सी बात है कि कहीं न कहीं कोई गड़बड़ी के पुख्ता सबूत रहे होंगे, तभी इस तरह की कार्रवाई की गई.
विभाग ने कहा भी है कि जिन संस्थाओं का पंजीकरण रद्द किया गया है उन संस्थाओं ने लाभार्थियों की झूठी संख्या दिखाई और कानून के अनुसार दिव्यांगों को दी जाने वाली सुविधाएं वास्तविक रूप से नहीं दी गईं, केवल कागजों पर दिखाया गया. कर्मचारियों को नियमानुसार वेतन भी नहीं दिया गया, जबकि सरकार से वेतन अनुदान प्राप्त किया गया.
इस तरह सरकारी सहायता का दुरुपयोग किया गया. सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल वही संस्थाएं चलेंगी जो वास्तव में दिव्यांगों के पुनर्वास के लिए कार्य कर रही हैं. इसे सरकार की अच्छी पहल के रूप में देखा जाना चाहिए लेकिन यह भी समझना होगा कि केवल पंजीकरण रद्द करने से समस्या का निदान होने वाला नहीं है. गड़बड़ी करने वाली संस्थाओं की गहराई से जांच की जानी चाहिए.
जितनी राशि का घोटाला किया गया हो, वह राशि ब्याज सहित वसूलना चाहिए और गड़बड़ी करने वाले लोगों को जेल के सीखचों के पीछे पहुंचाना चाहिए. निश्चित रूप से बहुत सारी संस्थाएं दिव्यांगों के कल्याण के लिए बहुत अच्छा काम कर रही हैं और उनकी सराहना भी की जानी चाहिए लेकिन गड़बड़ी करने वालों को बिल्कुल ही नहीं बख्शा जाना चाहिए, चाहे वे भले ही कितने भी ज्यादा ताकतवर हों.
यह अच्छी बात है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अख्तियार कर रखी है और दिव्यांग कल्याण विभाग के सचिव के पद पर तुकाराम मुंढे जैसे नियमपसंद अधिकारी को बिठा रखा है.
मुंढे ने कहा है कि नियमों का उल्लंघन करने वाली संस्थाओं के विरुद्ध अपात्रता की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी. इसलिए यह उम्मीद की जानी चाहिए कि फर्जीवाड़ा करने वाले बख्शे नहीं जाएंगे और कानून के अनुसार दिव्यांगों को दी जाने वाली सुविधाओं का लाभ वास्तविक लाभार्थियों को मिल सकेगा.