देश से प्रतिभा पलायन को रोकने की चुनौती?, विदेशों में बस रहे हैं हजारों भारतीय?

By ऋषभ मिश्रा | Updated: February 5, 2026 05:49 IST2026-02-05T05:49:44+5:302026-02-05T05:49:44+5:30

भारत से नागरिकता त्यागने की प्रवृत्ति किस तेजी से बढ़ रही है, इसकी पुष्टि संसद में प्रस्तुत विदेश मंत्रालय के आंकड़ों से भी होती है.

challenge stopping brain drain country Thousands of Indians are settling abroad blog Rishabh Mishra | देश से प्रतिभा पलायन को रोकने की चुनौती?, विदेशों में बस रहे हैं हजारों भारतीय?

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Highlightsजनसंख्या के कारण भारत की प्रति व्यक्ति आय विकसित देशों ही नहीं, कई विकासशील देशों की तुलना में भी काफी कम है.असुरक्षित वातावरण के चलते हर साल बड़ी संख्या में तकनीकी पेशेवर विदेश का रुख कर लेते हैं. सिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर की समस्याओं के साथ असुरक्षित वातावरण के चलते हर साल बड़ी संख्या में तकनीकी पेशेवर विदेश का रुख कर लेते हैं.

देश तेजी से आगे बढ़ रहा है. भारत आज दुनिया में चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था है. इसके बावजूद बड़ी संख्या में हर साल तमाम लोग भारत छोड़कर विदेशों में बस रहे हैं. बीते तीन साल में हर साल दो लाख से ज्यादा भारतीयों के देश छोड़ने के आंकड़े न सिर्फ चौंकाने वाले हैं, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर रहे हैं कि आखिर इसके पीछे वे कौन से कारण हैं जो भारतीयों को अपनी नागरिकता छोड़ने के लिए आकर्षित या विवश कर रहे हैं. दरअसल बड़ी जनसंख्या के कारण भारत की प्रति व्यक्ति आय विकसित देशों ही नहीं, कई विकासशील देशों की तुलना में भी काफी कम है.

ऐसे में बेहतर जीवन की तलाश भारतीयों को देश से बाहर बसने के लिए आकर्षित करती है. अधिकतर लोग बढ़िया करियर और ज्यादा सैलरी की तलाश में ही विदेश का रुख करते हैं. दिल्ली, मुंबई, गुरुग्राम, नोएडा जैसे शहरों में खराब हवा तो वहीं बेंगलुरु और पुणे में ट्रैफिक जाम की दिक्कत, कमजोर पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर की समस्याओं के साथ असुरक्षित वातावरण के चलते हर साल बड़ी संख्या में तकनीकी पेशेवर विदेश का रुख कर लेते हैं. भारत से नागरिकता त्यागने की प्रवृत्ति किस तेजी से बढ़ रही है, इसकी पुष्टि संसद में प्रस्तुत विदेश मंत्रालय के आंकड़ों से भी होती है,

जिसके अनुसार पिछले पांच वर्षों 2020 से 2024 के बीच नौ लाख भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़ी है. इसमें साल 2022 से तो यह संख्या दो लाख प्रति वर्ष से अधिक है. हालांकि विदेश में बसने के बाद भी बड़ी संख्या में भारतीय अपनी नागरिकता नहीं छोड़ना चाहते हैं. लेकिन वह जिस देश में काम करते है, वहां और बेहतर मौकों की तलाश के लिए उन्हें उस देश की नागरिकता लेनी पड़ती है.

अब चूंकि भारत में दोहरी नागरिकता का प्रावधान नहीं है, इसलिए उनकी भारतीय नागरिकता अपने आप चली जाती है. अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा जैसे देशों में दोहरी नागरिकता की सुविधा है. अनेक देशों में वहां की नागरिकता लेने पर तमाम अन्य सुविधाएं मिल जाती हैं.

ऐसे में जो लोग विकसित देशों में काम करते हैं, वे भारत के मुकाबले अधिक आकर्षक पासपोर्ट लेना पसंद कर लेते हैं. भारतीयों के विदेशों में बसने की प्रवृत्ति ‘ब्रेन-ड्रेन’ (प्रतिभा पलायन) के रूप में भी परिभाषित की जाती है. जिससे देश को कुशल कार्यबल का नुकसान होता है.

Web Title: challenge stopping brain drain country Thousands of Indians are settling abroad blog Rishabh Mishra

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