बहुत अहम सवाल कंटेंट की गुणवत्ता को लेकर है

By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: February 3, 2026 06:18 IST2026-02-03T06:18:29+5:302026-02-03T06:18:29+5:30

गालियों के इस्तेमाल और चुटकुलों की तो बात ही छोड़ दीजिए बहुत सारे कंटेंट यौन प्रवृत्ति के इर्द-गिर्द घूम रहे हैं और दुर्भाग्यजनक पक्ष यह है कि ऐसे कंटेंट को हजारों-लाखों व्यूज भी मिल रहे हैं.

budget 226 most important question quality content revolves around sexual orientation not mention use profanity and jokes | बहुत अहम सवाल कंटेंट की गुणवत्ता को लेकर है

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Highlightsव्यूज के लालच में ऐसे कंटेंट तैयार करना प्रारंभ कर दिया जिसे आप शाब्दिक पोर्नोग्राफी कह सकते हैं.इस तरह के गंदे कंटेंट पर किसी न किसी तरह काबू पाया जाए! सवाल है कि कैसे काबू पाएंगे?यदि सरकार कोशिश भी करना चाहे तो इसे बंदिश के रूप में प्रचारित किया जाता है.

बजट में कंटेंट क्रिएटर्स को दिया गया प्रोत्साहन निश्चय ही सराहनीय है और यह उम्मीद की जानी चाहिए कि इससे भारत की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक तथा पर्यटन संपत्तियों के डिजिटल डॉक्युमेंटेशन में मदद मिलेगी. पंद्रह हजार सेकेंडरी स्कूलों तथा पांच सौ महाविद्यालयों में कंटेंट क्रिएटर लैब्स भी स्थापित किए जाने हैं. निश्चय ही इससे कंटेंट की गुणवत्ता बढ़ेगी. हाल के वर्षों में कंटेंट क्रिएशन ने आमदनी के नए स्रोत खोेले हैं और युवाओं को इसका लाभ भी मिला है. मगर एक गंभीर सवाल है कि कंटेंट की गुणवत्ता क्या है? निश्चित रूप से बेहतरीन गुणवत्ता वाले और जानकारियों से भरपूर कंटेंट तैयार हो रहे हैं मगर एक बड़ा वर्ग ऐसा है जिसने ज्यादा व्यूज के लालच में ऐसे कंटेंट तैयार करना प्रारंभ कर दिया जिसे आप शाब्दिक पोर्नोग्राफी कह सकते हैं.

गालियों के इस्तेमाल और चुटकुलों की तो बात ही छोड़ दीजिए बहुत सारे कंटेंट यौन प्रवृत्ति के इर्द-गिर्द घूम रहे हैं और दुर्भाग्यजनक पक्ष यह है कि ऐसे कंटेंट को हजारों-लाखों व्यूज भी मिल रहे हैं. इसलिए यह बहुत जरूरी है कि इस तरह के गंदे कंटेंट पर किसी न किसी तरह काबू पाया जाए! सवाल है कि कैसे काबू पाएंगे?

जिन सोशल प्लेटफार्म पर ये कंटेंट रहते हैं, वो प्लेटफॉर्म किसी की बात ही कहां सुनते हैं. वे तो इतने बड़े हो चुके हैं कि दुनिया की कई सरकारों को भी चुनौती देते नजर आते हैं. क्या कोई सरकार आज हिम्मत कर सकती है कि वह ऐसे प्लेटफॉर्म की स्क्रीनिंग कर सके? यदि सरकार कोशिश भी करना चाहे तो इसे बंदिश के रूप में प्रचारित किया जाता है.

कहा जाता है कि सरकार अपनी आलोचना बर्दाश्त नहीं करना चाहती इसलिए बंदिश लगाना चाह रही है. इस तरह गंदे कंटेंट को भी एक आड़ मिल जाती है. ऐसे में सरकार के लिए यह बड़ी चुनौती है. मगर इस चुनौती को स्वीकार करना ही पड़ेगा ताकि सोशल प्लेटफार्म पर गंदगी को रोका जा सके.

कंटेंट ऐसा होना चाहिए जो जानकारी और ज्ञान को बढ़ा सके. चुटकुले वाले कंटेंट में भी कोई आपत्ति नहीं है लेकिन जब कोई कंटेंट परोसने वाला स्त्री-पुरुष संबंधों की प्रक्रिया को लेकर अभद्र भाषा में बात करता है तो उसे क्रिएटर तो कतई नहीं कहा जा सकता है. आज रील्स की दुनिया ऐसी ही गंदगी से भरी पड़ी है. इस पर हमें अंकुश लगाना ही होगा. 

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