आत्मनिर्भरता के लिए उद्योगों पर दिया ध्यान

By प्रमोद भार्गव | Updated: February 2, 2026 05:46 IST2026-02-02T05:46:11+5:302026-02-02T05:46:11+5:30

भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद अगले वित्त वर्ष में भारत के तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाने की बुनियाद रख दी है. इस समय भारत उद्योग, प्रौद्योगिकी और दवाओं के कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भर है,

budget 2026 Focus industries self-reliance blog Pramod Bhargava | आत्मनिर्भरता के लिए उद्योगों पर दिया ध्यान

file photo

Highlightsदुर्लभ खनिजों के उत्खनन को बढ़ावा देने के द्वार खोले जा रहे हैं.गलियारा बनाए जाने के लिए 10 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. भारत इन खनिजों के लिए अब तक चीन पर निर्भर था.

नए आम बजट से उम्मीद की जा रही थी कि यह आयकर की सारिणी में छूट और पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर लोकलुभावन बजट होगा. लेकिन यह इसके विपरीत आत्मनिर्भरता के लिए उद्योग केंद्रित बजट है, जिसके स्थायी और रोजगार देने वाले परिणाम आने में थोड़ा समय लगेगा. इस बजट ने तमाम आर्थिक उथल-पुथल और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद अगले वित्त वर्ष में भारत के तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाने की बुनियाद रख दी है. इस समय भारत उद्योग, प्रौद्योगिकी और दवाओं के कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भर है,

किंतु यह बजट कालांतर में चीन को चुनौती बनने वाला है, क्योंकि इसमें अमेरिका की निगाहें वेनेजुएला के तेल, डेनमार्क के ग्रीनफील्ड और आर्कटिक के दुर्लभ खनिजों पर टिकी हैं. चीन और रूस आर्कटिक क्षेत्र में खनिज उत्खनन में लग गए हैं. भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ खनिज के साथ कृषि भी है.

अतएव ईयू से जो संधि हुई है, उसके तहत भारत को स्टील, एल्युमीनियम, सीमेंट, पेपर, ग्लास, तेल रिफाइनरी और खाद के निर्यात का लाभ  मिलेगा. इस दृष्टि से भारत भूमि को कुदरत ने अटूट प्राकृतिक संपदा दी हुई है. इस संपदा का उत्खनन और उसका उपयोग देश के लोगों के लिए हो, इस नजरिये से दुर्लभ खदुर्लभ खनिजों के उत्खनन को बढ़ावा देने के द्वार खोले जा रहे हैं.निजों के उत्खनन के लिए बजट में ओडिशा, केरल और आंध्रप्रदेश के बीच गलियारा बनाए जाने के लिए 10 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. इसके अंतर्गत राष्ट्रीय जलमार्ग भी बनाए जाएंगे.

साथ ही वस्त्र, खेलकूद सामग्री, जैविक दवाओं, कंटेनर, इलेक्ट्रॉनिक्स के उत्पादन को बढ़ावा दिया गया है. रसायन पार्क विकसित होंगे. सेमीकंडक्टर मिशन दो की शुरुआत की जाएगी. चूंकि सरकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता को बढ़ावा देने के उपाय निरंतर कर रही है, इस हेतु सेमीकंडक्टर की उपलब्धता जरूरी है. इस दृष्टि से यह उत्पादन और निर्माण के ढांचागत विकास को स्थापित करने का महाबजट है.

दुर्लभ खनिजों के उत्खनन की सुविधा हेतु संसद के मानसून सत्र में माइंस और मिनरल्स संशोधन विधेयक पहले ही पारित हो चुका है. इस नए कानून से व्यवसायियों को लीज पर खनन करने के लिए बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के लीथियम, कोबाल्ट, निकल, हीरा जैसे दुर्लभ खनिजों के उत्खनन की सुविधा भी मिल गई है. भारत इन खनिजों के लिए अब तक चीन पर निर्भर था,

लेकिन चीन ने इनके निर्यात पर रोक लगा दी थी. यही वे खनिज हैं, जो क्वांटम कम्प्यूटर, इलेक्ट्रिक कारों की बैटरी और अंतरिक्ष उपकरणों में काम आते हैं. हालांकि ट्रम्प द्वारा लगाए गए अनर्गल टैरिफ के बाद चीन ने भारत को उपरोक्त खनिज देने का वादा किया हुआ है और ईयू से समझौते के बाद दुर्लभ खनिजों के आयात-निर्यात का दायरा विस्तृत हो गया है,

फिर भी भारत ने अब खनिज क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का अभियान चलाया हुआ है. क्योंकि भारत की धरती पर इस नजरिए से प्रचुर मात्रा में धरती के गर्भ में हर तरह के खनिज मौजूद हैं. इसीलिए भारत अब अपनी शर्तों पर विकसित देशों के साथ व्यापार भी करेगा. इस बजट से इस व्यापार को मजबूती मिलेगी. इसके अलावा बजट में जैविक औषधीय दवाओं के उत्पादन के लिए 40 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान है.

बायोफार्मा के क्षेत्र में भारत को वैश्विक हब बनाया जाएगा. सरकार आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण को बढ़ावा देगी. इन दवाओं का निर्माण इसलिए जरूरी है क्योंकि ये रोग को जड़ से दूर करती हैं. सात द्रुत गति के रेल गलियारे बनेंगे. पटना और वाराणसी में जहाजों की मरम्मत के कारखाने खुलेंगे. छोटे नगरों में तीर्थस्थल विकसित होंगे. इस उपाय से छोटे नगरों में धार्मिक पर्यटन बढ़ेगा. इससे स्थानीय लोगों को धर्म संबंधी रोजगार मिलेंगे.

Web Title: budget 2026 Focus industries self-reliance blog Pramod Bhargava

कारोबार से जुड़ीहिंदी खबरोंऔर देश दुनिया खबरोंके लिए यहाँ क्लिक करे.यूट्यूब चैनल यहाँ इब करें और देखें हमारा एक्सक्लूसिव वीडियो कंटेंट. सोशल से जुड़ने के लिए हमारा Facebook Pageलाइक करे