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Budget 2025 Expectations: बजट से आम आदमी को राहत और सुधारों की उम्मीद?, ऐतिहासिक बजट होगा

By डॉ जयंती लाल भण्डारी | Updated: January 31, 2025 05:56 IST

Budget 2025 Expectations: आगामी बजट में चार फीसदी के स्तर पर पहुंचाते हुए अर्थव्यवस्था को धीमी विकास की मार से उबारने की रणनीति के साथ भी आगे बढ़ती दिख सकेंगी.

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ठळक मुद्दे2025-26 तक जीडीपी के 4.5 फीसदी के स्तर पर रखते हुए खजाने को मजबूत करने की डगर पर भी बढ़ेंगी.दो मत नहीं कि वर्ष 2025-26 का बजट तैयार करते समय चुनौतियां  सामने रही हैं. चालू वित्त वर्ष 2024-25 में खपत और व्यय में कमी से विकास दर घट गई है. मध्यम वर्ग के निजी उपभोग में कमी आई है.

Budget 2025 Expectations: इन दिनों पूरे देश की निगाहें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के द्वारा एक फरवरी को प्रस्तुत किए जाने वाले आगामी वित्त वर्ष 2025-26 के केंद्रीय बजट की ओर लगी हुई हैं. सीतारमण का यह लगातार सातवां पूर्ण बजट होगा, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है. उम्मीद की जा रही है कि वर्ष 2025-26 का बजट एक ऐसा ऐतिहासिक बजट होगा, जिसमें खपत और व्यय बढ़ाकर घटी हुई विकास दर बढ़ाने, गरीब, युवा, महिलाओं, किसान और मध्यम वर्ग के लिए राहत के प्रभावी प्रावधानों के साथ आर्थिक सुधारों के साथ सामाजिक मोर्चे पर बड़े ऐलान दिखाए देंगे. वित्त मंत्री चालू वित्त वर्ष में जो पूंजीगत व्यय  जीडीपी का 3.4 प्रतिशत है, उसे आगामी बजट में चार फीसदी के स्तर पर पहुंचाते हुए अर्थव्यवस्था को धीमी विकास की मार से उबारने की रणनीति के साथ भी आगे बढ़ती दिख सकेंगी.

उम्मीद है कि नए बजट के माध्यम से वित्त मंत्री आर्थिक डगर पर अटके पड़े सुधारों को आगे बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने, उद्योग जगत की लाॅजिस्टिक्स लागत घटाने, रोजगार सृजित करने वाले मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर फोकस करने, रिफॉर्म, परफॉर्म एंड ट्रांसफॉर्म के मंत्र से अर्थव्यवस्था को तेजी से आगे बढ़ाने तथा 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य के मद्देनजर बुनियादी रणनीतियां प्रस्तुत करते हुए दिखाई देंगी. इन सबके साथ-साथ वित्त मंत्री राजकोषीय घाटे को वित्त वर्ष 2025-26 तक जीडीपी के 4.5 फीसदी के स्तर पर रखते हुए खजाने को मजबूत करने की डगर पर भी बढ़ेंगी.

इसमें दो मत नहीं कि वर्ष 2025-26 का बजट तैयार करते समय चुनौतियां  सामने रही हैं. चालू वित्त वर्ष 2024-25 में खपत और व्यय में कमी से विकास दर घट गई है. मध्यम वर्ग के निजी उपभोग में कमी आई है. वैश्विक परिदृश्य पर जो सैन्य संघर्ष और आर्थिक गुटबाजी की चुनौतियां हैं, वे वैश्विक जीडीपी को नुकसान पहुंचा सकती हैं. इन कारणों से वैश्विक व्यापार और वैश्विक विकास दर में गिरावट आएगी.

इन चुनौतियों के बावजूद इस समय वित्त मंत्री सीतारमण की मुट्ठियों में विभिन्न वर्गों को राहत देने और विकास की विभिन्न योजनाओं के लिए प्रभावी आवंटन हेतु कर संग्रहण संबंधी मजबूत परिदृश्य मौजूद है. विगत एक दशक से आयकर रिटर्न भरने वाले आयकरदाताओं की संख्या और आयकर की प्राप्ति में लगातार वृद्धि हुई है.

चालू वित्त वर्ष 2024-25 में अप्रैल से दिसंबर 2024 तक आयकर सहित प्रत्यक्ष कर संग्रहण करीब 16 लाख करोड़ रुपए रहा है, जो कि पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 16 फीसदी से भी ज्यादा है. ऐसे में उम्मीद है कि वित्त मंत्री आगामी बजट के तहत गरीब, युवा, महिलाओं, किसानों और मध्यम वर्ग के कल्याण के नए उपायों के साथ विकास योजनाओं पर भी अपने आवंटन को केंद्रित करते हुए दिखाई दे सकती हैं.

टॅग्स :बजट 2025निर्मला सीतारमणनरेंद्र मोदी
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