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भरत झुनझुनवाला का ब्लॉग: मंदी मिटाने के लिए अपने देश की पूंजी को बाहर जाने से रोकें

By भरत झुनझुनवाला | Updated: July 27, 2020 11:21 IST

सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग के दिग्गज टी. मोहनदास पाई ने भारत से अमीरों के पलायन के कुछ कारण बताए हैं. पहला कारण टैक्स व्यवस्था का आतंक बताया है

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ठळक मुद्देपिछले चार वर्षो से हमारी जीडीपी की विकास दर लगातार गिर रही थीइस विषम परिस्थिति में देश का एक वर्ग और कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं हमें आशा दिला रही हैं

पिछले चार वर्षो से हमारी जीडीपी की विकास दर लगातार गिर रही थी, ऊपर से कोविड ने एक और बड़ा झटका दे दिया है. इस विषम परिस्थिति में देश का एक वर्ग और कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं हमें आशा दिला रही हैं कि हम विदेशी निवेश हासिल कर आगे बढ़ सकते हैं.

चीन से नाराजगी के कारण चीन को छोड़कर जाने को उद्यत बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भारत में आकर्षित किया जा सकता है. लेकिन इस दिशा में अभी तक का रिकॉर्ड सफल नहीं है. एक रपट के अनुसार चीन से लगभग 46 बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने बाहर जाने का फैसला किया है.

उनमें से करीब 24 वियतनाम गईं और केवल 2 भारत में आई हैं. दरअसल इस सुझाव के पीछे मानसिकता यह है कि भारत का आर्थिक विकास विदेशी पूंजी को आकर्षित करके ही आगे बढ़ सकता है. इनका कहना है कि हमें कोविड के दौरान चीन की बदनामी का लाभ उठाते हुए विदेशी निवेश को और ताकत लगा कर आकर्षित करना चाहिए. लेकिन हम इस सत्य की अनदेखी कर रहे हैं कि हमारे देश की अपनी पूंजी स्वयं बड़ी मात्ना में बाहर जा रही है.

एक अनुमान के अनुसार लगभग 5000 अमीर लोग हर साल भारत छोड़कर दूसरे देशों की नागरिकता अपना रहे हैं. वे अपने साथ अपनी पूंजी को भी भारत से ले जा रहे हैं. एक तरफ हमारी पूंजी बाहर जा रही है जबकि हम दूसरी तरफ विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के प्रयास में लगे हैं.

सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग के दिग्गज टी. मोहनदास पाई ने भारत से अमीरों के पलायन के कुछ कारण बताए हैं. पहला कारण टैक्स व्यवस्था का आतंक बताया है. उनके अनुसार देश के अमीर टैक्स अधिकारियों द्वारा प्रताड़ित किए जा रहे हैं और भयभीत हैं. दूसरी तरफ मेरे जानकार मुंबई के एक उद्यमी ने बताया कि भारत सरकार ने अमीरों द्वारा देश के बैंकों के साथ कपट करने पर साहसिक और सराहनीय कदम उठाए हैं.

पूर्व में अमीर लोग बैंकों से ऋण लेकर देश छोड़कर चले जाते थे जैसे विजय माल्या. लेकिन अब सरकार ने इस प्रकार के बैंक के घपले पर भारी नियंत्नण किया है. भारत सरकार ने अमीरों द्वारा देश के साथ जो कपट एवं र्दुव्‍यवहार किया जा रहा था, उस पर अंकुश लगाने का सार्थक प्रयास किया है. लेकिन संभवत: यह एक सीमा से अधिक बढ़ गया है.

जैसे कक्षा में बच्चों को अनुशासित करना जरूरी है लेकिन एक सीमा से अधिक अनुशासन कर दिया जाए तो वे अपने को प्रताड़ित और अपमानित समझते हैं. बच्चे यदि कक्षा में बात करें और उन्हें कड़ी सजा दी जाए तो उचित नहीं होता है.  इस समस्या का उपाय यह है कि टैक्स अधिकारियों का बाहरी मूल्यांकन किया जाए. उनके द्वारा जिन लोगों का असेसमेंट किया जाता है, उन लोगों से अधिकारी का गुप्त सर्वे कराया जाए.  

मोहनदास पाई ने अमीरों के पलायन का दूसरा कारण देश में जीवन की गुणवत्ता में गिरावट बताया है. उनका कहना है कि शहरों में वायु प्रदूषण बढ़ रहा है, यातायात की समस्याएं बढ़ रही हैं. एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचने में कठिनाई होती है इत्यादि. यहां सरकार को अपनी पर्यावरण नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए.

सरकार का उद्देश्य है कि पर्यावरण की अड़चनों को कम करके देश के आर्थिक विकास को गति दी जाए. लेकिन इसका प्रभाव ठीक इसके विपरीत हो रहा है. कारण यह कि आर्थिक विकास को हासिल करने के प्रयास में जब सरकार जंगलों इत्यादि को काटती है तो उससे प्रदूषण बढ़ता है, जिसके कारण अमीर देश से पलायन कर रहे हैं और उनके पलायन से विकास दर में गिरावट आ रही है.

आर्थिक विकास हासिल करने के गलत रास्ते को अपनाने के कारण सरकार आर्थिक विकास दर में गिरावट को बुला रही है. सरकार को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील होना होगा.

टॅग्स :इकॉनोमी
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