Artificial Intelligence: एआई की वैश्विक दुनिया में छाप छोड़ता भारत
By अभिषेक कुमार सिंह | Updated: February 19, 2026 05:47 IST2026-02-19T05:47:18+5:302026-02-19T05:47:18+5:30
Artificial Intelligence: जहां तक भारत की बात है, तो यह देश पहले से आईटी क्षेत्र में मजबूत है. ऐसे में स्वाभाविक है कि देश में एआई को एक नए अवसर के रूप में देखा जा रहा है.

सांकेतिक फोटो
Artificial Intelligence: कृत्रिम बुद्धिमता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस- एआई) इस समय दुनिया की चिंताओं में शामिल होने वाला सबसे बड़ा मुद्दा है. इन्हीं चिंताओं के बीच भारत में एआई इम्पैक्ट समिट का आयोजन हुआ है, जिसमें तमाम शीर्ष नेता, नीति-निर्माता, अरबपति कारोबारी, इंजीनियर, तकनीशियन हिस्सा ले रहे हैं. तकनीक की दुनिया में एआई का आगमन एक क्रांतिकारी परिवर्तन की तरह हुआ है. लंबे समय तक छिटपुट प्रयासों के बाद करीब साढ़े तीन साल पहले नवंबर 2022 में चैटजीपीटी के लॉन्च के साथ इस तकनीक ने इंसानी संवादों की भाषा समझने और निर्देशों का पालन करते हुए समस्याएं सुलझाने और कंटेंट बनाने की जो अभूतपूर्व क्षमता दिखाई, वह आज इस मोड़ पर आ गई है कि हर कोई इसकी चर्चा कर रहा है.
इसकी सहूलियतों के बाहर हालांकि अभी इसकी समस्याओं को लेकर दुविधाओं-जटिलताओं की कमी नहीं है, लेकिन जिस तरह की हलचल विश्व स्तर पर इस तकनीक ने पैदा की है, उसी का परिणाम है कि भारत में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के मंच पर दुनिया भर के विशेषज्ञ और नीति-निर्माता एक साथ जुट गए.
जहां तक भारत की बात है, तो यह देश पहले से आईटी क्षेत्र में मजबूत है. ऐसे में स्वाभाविक है कि देश में एआई को एक नए अवसर के रूप में देखा जा रहा है. इसी दृष्टिकोण से इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के इंडिया एआई मिशन के तहत आयोजित इस समिट में 140 से अधिक देशों को आमंत्रित किया गया है.
‘जिम्मेदार बुद्धिमत्ता’ की थीम पर आधारित इस आयोजन को सिर्फ तकनीकी चर्चा का मंच कहना पर्याप्त नहीं होगा. बल्कि एआई के वास्तविक उद्देश्य, उस पर नियंत्रण और विकास पर वैश्विक विमर्श के कई पहलुओं पर एक स्पष्ट नजरिया हासिल करने का यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब एआई स्वास्थ्य, कृषि, परिवहन और अन्य क्षेत्रों में क्रांति ला रहा है.
वैश्विक स्तर पर एआई अपनाने की होड़ तेज है जिसमें अमेरिका, चीन, भारत और सऊदी अरब जैसे देश शामिल हैं. भविष्य में सफलता नीतियों, निवेश, युवा प्रशिक्षण और नवाचार पर निर्भर करेगी. इस समिट का उद्देश्य भारत को एआई में अग्रणी बनाना और युवाओं को बड़े पैमाने पर इसके लिए तैयार करना है.
साथ ही ऐसे वैश्विक नियमों की जरूरत है, जो विकासशील देशों की भागीदारी सुनिश्चित कर सकें. एआई मानवता की सेवा करे, इसके लिए एआई समिट जैसे संवाद जरूरी हैं. असल प्रश्न यह है कि क्या यह समिट भारत के लिए केवल एक आयोजन भर है या यह उस बड़े परिवर्तन का संकेत है, जिसमें भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता के वैश्विक भविष्य को आकार देने वाला प्रमुख देश बन सकता है.
आज जब दुनिया तेजी से डिजिटल और स्वचालित प्रणालियों की ओर बढ़ रही है, कृत्रिम बुद्धिमत्ता उस परिवर्तन का केंद्रीय तत्व बन चुकी है. यह केवल एक तकनीकी नवाचार नहीं है, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन, आर्थिक विकास, रोजगार संरचना और सामाजिक व्यवस्था को पुनर्परिभाषित करने वाली तकनीक बन गई है.
ऐसे समय में भारत द्वारा इस तरह के वैश्विक सम्मेलन की मेजबानी करना इस बात का संकेत है कि देश केवल तकनीक का उपभोक्ता बनकर नहीं रहना चाहता, बल्कि वह इसके निर्माता, नियंत्रक और नीति-निर्धारक के रूप में भी अपनी भूमिका स्थापित करना चाहता है.
वैसे तो यूरोप में ऐसे कुछ आयोजन पहले भी हो चुके हैं, लेकिन यह पहला मौका है जब किसी विकासशील राष्ट्र में इतने बड़े स्तर पर एआई समिट का आयोजन हुआ है. इसका एक उद्देश्य यह भी है कि विकासशील देशों की आवाज को वैश्विक एआई गवर्नेंस में मजबूती से उठाया जा सके.