16वीं वार्षिक रिपोर्टः देश में विदेशी छात्रों की संख्या बढ़ना सुकूनदेह
By डॉ जयंती लाल भण्डारी | Updated: April 9, 2026 05:29 IST2026-04-09T05:29:29+5:302026-04-09T05:29:29+5:30
16th Annual Report: वर्ष 2030 तक भारत आने वाले विदेशी छात्रों की संख्या में हर साल लगभग आठ प्रतिशत की दर से वृद्धि का अनुमान है. गौरतलब है कि जहां वर्ष 2022 में 39 हजार से अधिक विदेशी छात्र भारत आए थे.

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16th Annual Report: हाल ही में वैश्विक उच्च शिक्षा सेवाओं का मूल्यांकन करने वाली ख्याति प्राप्त अग्रणी कंपनी ब्रिटेन स्थित क्यूएस क्वाक्वेरेली साइमंड्स द्वारा प्रकाशित 16वीं वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 में वर्ल्ड यूनिवर्सिटी की रैंकिंग में भारतीय शैक्षणिक संस्थानों का अभूतपूर्व प्रदर्शन रहा है. भारत ने इस साल विभिन्न विषयों और संकाय क्षेत्रों में शीर्ष 50 में से 27 स्थान हासिल किए हैं, जो कि वर्ष 2024 में दर्ज किए गए 12 स्थानों की तुलना में दोगुने से भी अधिक हैं. वास्तव में यह रैंकिंग भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली की बढ़ती वैश्विक साख और भविष्य की संभावनाओं को दर्शाती है.
रिपोर्ट के मुताबिक इस समय भारत एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय शिक्षा गंतव्य देश बनने की ओर अग्रसर है. साथ ही वर्ष 2030 तक भारत आने वाले विदेशी छात्रों की संख्या में हर साल लगभग आठ प्रतिशत की दर से वृद्धि का अनुमान है. गौरतलब है कि जहां वर्ष 2022 में 39 हजार से अधिक विदेशी छात्र भारत आए थे.
वहीं वर्तमान में लगभग 200 देशों के 72 हजार से अधिक विदेशी छात्र भारत के उच्च शिक्षा संस्थानों में अध्ययनरत हैं. अब केंद्र सरकार ने ‘स्टडी इन इंडिया’ पहल के तहत 2030 तक प्रतिवर्ष दो लाख विदेशी छात्रों को आकर्षित करने का लक्ष्य रखा है. यह संकेत है कि सरकार भारत को केवल प्रतिभाओं के आपूर्तिकर्ता के रूप में नहीं, वरन वैश्विक शिक्षा केंद्र के रूप में स्थापित करने की राह पर आगे बढ़ा रही है.
यह बात भी महत्वपूर्ण है कि अब हर साल बड़ी संख्या में गुणवत्तापूर्ण कौशल, अनुसंधान सुविधाओं और उच्च शिक्षा के बाद विदेश में ही करियर के अवसरों को पाने के मद्देनजर विदेशों में उच्च शिक्षा के लिए जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या लगातार घट रही है. हाल ही में संसद में बताया गया कि वर्ष 2023 में 9.08 लाख भारतीय छात्र विदेशों में उच्च शिक्षा के लिए गए थे,
वर्ष 2024 में यह संख्या गिरकर 7.7 लाख पर आ गई और वर्ष 2025 में यह संख्या और घटकर 6.26 पर पहुंच गई. उम्मीद करें कि सरकार पश्चिम एशिया युद्ध से बदलती हुई दुनिया में भारत को एआई तथा भविष्य की टेक्नोलॉजी पर आधारित वैश्विक और डिजिटल शिक्षा का ऐसा सस्ता और गुणवत्तापूर्ण हब बनाने की राह पर आगे बढ़ेगी, जिससे भारत से उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने वाले छात्रों की संख्या में और कमी आए तथा विदेश से उच्च शिक्षा के लिए भारत आने वाले छात्रों की संख्या में और वृद्धि हो.