बिहार के जेलों में रहने वाले कैदी अब कर रहे हैं यूपीएससी/ बीपीएससी और सरकारी नौकरियों की तैयारी, पढ़ने और उच्च शिक्षा लेने की संख्या में हुई है उल्लेखनीय वृद्धि

By एस पी सिन्हा | Updated: February 22, 2026 16:19 IST2026-02-22T16:19:17+5:302026-02-22T16:19:17+5:30

बताया जाता है कि इग्नू और एनआईओएस के माध्यम से 2025 में 1,354 से अधिक बंदियों ने शिक्षा से जुड़कर साक्षरता और उच्च शिक्षा में रुचि दिखाई है, साथ ही कौशल विकास के तहत 3,902 कैदियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया है। 

Prisoners in Bihar jails preparing for UPSC/BPSC and government jobs, and there has been a significant increase in the number of them studying and pursuing higher education | बिहार के जेलों में रहने वाले कैदी अब कर रहे हैं यूपीएससी/ बीपीएससी और सरकारी नौकरियों की तैयारी, पढ़ने और उच्च शिक्षा लेने की संख्या में हुई है उल्लेखनीय वृद्धि

बिहार के जेलों में रहने वाले कैदी अब कर रहे हैं यूपीएससी/ बीपीएससी और सरकारी नौकरियों की तैयारी, पढ़ने और उच्च शिक्षा लेने की संख्या में हुई है उल्लेखनीय वृद्धि

पटना:बिहार के कैदी अब जेल में रहकर ही यूपीएससी/ बीपीएससी और सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे हैं। यह सुनकर थोड़ा आश्चर्य होगा, लेकिन है यह सौ फीसदी सच। दरअसल, राज्य की जेलों में सुधारात्मक पहल के तहत कैदियों के पढ़ने और उच्च शिक्षा लेने की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो देश में सर्वोच्च मानी जा रही है। ऐसे में यहां यह कहा जा सकता है कि जेल अब केवल सजा काटने की जगह नहीं रह गई है, बल्कि नई शुरुआत का दरवाजा बन रही है। बताया जाता है कि इग्नू और एनआईओएस के माध्यम से 2025 में 1,354 से अधिक बंदियों ने शिक्षा से जुड़कर साक्षरता और उच्च शिक्षा में रुचि दिखाई है, साथ ही कौशल विकास के तहत 3,902 कैदियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया है। 

2025 में बिहार के जेलों ने शिक्षा और पुनर्वास के क्षेत्र में ऐसा रिकॉर्ड बनाया है, जिसने उसे पूरे देश में सर्वोच्च स्थान पर पहुंचा दिया है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग के माध्यम से 10वीं में 1256 और 12वीं में 183 बंदियों का नामांकन कराया गया है। उच्च शिक्षा में बेऊर केंद्रीय जेल (पटना) अव्वल है, जहां 327 कैदियों ने दाखिला लिया। 10वीं कक्षा में सबसे ज्यादा रुचि मुजफ्फरपुर सेंट्रल जेल (142 कैदी) और 12वीं में जिला जेल अररिया के कैदियों ने दिखाई है। कंप्यूटर साक्षरता के तहत 1,443 कैदियों को एनआईईएलआईटी के जरिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। 

यह आंकड़ा देश में सबसे अधिक है और इसने बिहार की जेलों को सुधारात्मक मॉडल के रूप में स्थापित कर दिया है। उच्च शिक्षा के मोर्चे पर भी राज्य आगे है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के माध्यम से 1565 बंदियों का नामांकन कराया गया है, जबकि 2025 में ही 1354 बंदियों को उच्च शिक्षा से जोड़ा गया है। जॉब ओरिएंटेड ट्रेनिंग पर भी जोर दिया गया है। 2025-26 में 3902 सजायाफ्ता और विचाराधीन बंदियों को अलग-अलग ट्रेंडों में स्किल ट्रेनिंग दिया गया। 

कंप्यूटर शिक्षा के क्षेत्र में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और अन्य एजेंसियों के माध्यम से 1443 बंदियों को प्रशिक्षित किया गया। इसका सीधा फायदा यह होगा कि रिहाई के बाद उन्हें रोजगार के अवसर मिलेंगे और दोबारा अपराध की संभावना घटेगी। जानकारी के मुताबिक, राज्य की सभी 59 जेलों में मानसिक और शारीरिक संतुलन के लिए आर्ट ऑफ लिविंग के साथ पांच सालों का समझौता किया गया है। 

दूसरी ओर अपराध पीड़ित कल्याण न्यास के माध्यम से 2025 में पीड़ित परिवारों को दो करोड़ 73 लाख नौ हजार 590 रुपए की सहायता राशि देने की प्रक्रिया चल रही है। इससे पहले बजट सत्र के दौरान गंभीर श्रेणी के अपराधियों के लिए वीरान पहाड़ पर जेल बनाने का ऐलान किया गया था। राज्य के उपमुख्यमंत्री सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने 20 फरवरी को खुद ही इसको लेकर विधानसभा में ऐलान किया था। 

सम्राट चौधरी के मुताबिक अपराधियों के लिए हाई सिक्योरिटी जेल पहाड़ पर बनेंगे, जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं होगा। यहां आने-जाने के लिए सिर्फ एक ही रास्ता होगा और इस रास्ते में चप्पे-चप्पे पर पैनी नजर रखी जाएगी। आंकड़ों के मुताबिक बिहार की जेलों में 61,891 कैदी बंद हैं, जिनमें से 59,270 पुरुष और 2621 महिलाएं हैं। 

राज्य के केंद्रीय कारागारों में से आदर्श केंद्रीय कारागार, बेउर (पटना) में 2,360 कैदियों की स्वीकृत क्षमता के मुकाबले 5,841 कैदी हैं। इस जेल में क्षमता के मुकाबले ढाई गुना अधिक कैदी हैं। बिहार की अधिकांश जेलों में क्षमता से कहीं अधिक कैदी बंद हैं, जिससे व्यवस्था और कैदियों दोनों पर दबाव बढ़ा है। बिहार में 59 जेल हैं जिसमें आठ सेंट्रल जेल हैं। बिहार के जेलों में क्षमता से 173 प्रतिशत अधिक बंदी हैं।

Web Title: Prisoners in Bihar jails preparing for UPSC/BPSC and government jobs, and there has been a significant increase in the number of them studying and pursuing higher education

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