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Irrfan Khan Birth Anniversary: क्रिकेटर बनना चाहते थे इरफान, जानें उनसे जुड़ी कुछ अनसुनी बातें

By प्रतीक्षा कुकरेती | Published: January 7, 2021 02:12 PM2021-01-07T14:12:07+5:302021-01-07T14:12:20+5:30

इरफ़ान खान सिनेमा का एक ऐसा चेहरा है जिसने बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक अपने अभिनय की छाप छोड़ी है. अपनी आँखों से ही एक्टिंग करने वाले इरफ़ान ने हर किसी को अपनी कला से प्रभावित किया. जब जब वो बड़े पर्दे पर आते उनकी बेचैन आंखें और बेहद शर्मीली सी मुस्कुराहट का हर कोई दीवाना बन जाता. अगर आज इरफ़ान जिंदा होते तो वो अपना 54 th बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे होते. मगर अफ़सोस  साल 2020 ने कई फिल्मी हस्तियों के साथ ही उन्हें हमसे छीन लिया. आज इरफ़ान खान को उनके जन्मदिन पर याद करते हुए इस विडियो में हम आपको बताएँगे उनसे जुड़ी कुछ अनसुनी बातें. 

 

 

 भारतीय अभिनेताओं की जब जब बात होगी तो इरफान के बिना पूरी नहीं हो पाएगी. 7 जनवरी 1967 को जयपुर में जन्मे इरफान एक मुस्लिम पठान परिवार से थे. उनका पूरा नाम साहबजादे इरफान अली खान था. इरफान के पिता की छोटी सी दुकान थी. वे टायर का व्यापार करते थे.  ये बात बहुत ही कम लोग जानते है की इरफान बचपन से ही क्रिकेटर बनना चाहते थे लेकिन माता-पिता के दवाब के चलते ऐसा नहीं हो पाया.  एमए की पढ़ाई के साथ ही साथ ही इरफान खान ने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से डिम्लोमा किया, यहाँ उन्हें स्कालरशिप मिली और इसके बाद वह एक ऐसे सफर पर चल दिए.जो यादगार बन गया.

 

साल 1988 में NSD के फाइनल ईयर में मीरा नायर ने उन्हें सलाम बॉम्बे में अहम् किरदार के लिए चुना. बस फिर यही से बड़े बड़े सपनों के साथ इरफ़ान ने दिल्ली से  मुंबई का रुख किया. हालांकि इस फिल्म में रोल छोटा था.  मीरा  ने उनसे वादा किया था की वो अपनी अगली फिल्म में उन्हें बतौर लीड एक्टर  साइन करेंगी. इरफ़ान ने खुद कईइंटरव्यू  में बताया था की फिल्म सलाम बॉम्बे में उस छोटे  से रोल के लिए वो बहुत रोये थे पर इरफ़ान को इंडस्ट्री में ब्रेक मिल गया.

 

अगर रिपोर्ट्स की मानें तो मुंबई आने के बाद अपना पेट पालने के लिए , उन्होंने एयर-कंडीशनर रिपेयरमैन का काम भी किया. कहा जाता हैं कि उन्होंने सबसे पहले एक्टर राजेश खन्ना का AC ठीक किया था. इरफ़ान ने साथ साथ कई टीवी सीरियल  में भी काम किया. साल 1990 में उन्होंने फिल्म डॉक्टर की मौत में काम किया. इस फील्म को खूब सराहा गया. इसके बाद इरफ़ान ने बॉलीवुड को कई बेहतरीन फ़िल्में दी  'मक़बूल', 'हासिल' नेम सेक 'पान सिंह तोमर' लंच बाक्स रोग', 'हैदर', 'सात खून माफ', 'लाइफ इन मेट्रो', 'तलवार', 'डी डे हिंदी मीडियम' जैसी फिल्मों से इरफ़ान ने लोगों के दिलों में जगह बनाई. इरफ़ान खान का हर एक किरदार यादगार रहा है. उनके अभिनय की एक खासियत थी वो हर एक किरदार की गहराई तक उतर जाते थे.

 

 

ये बात सभी को हैरान करती है कि इरफान पठान परिवार से होने के बावजूद शाकाहारी थे. उनके पिता उन्हे हमेशा इस वजह से ताना भी मारते थे. वे अक्सर कहते कि पठान परिवार में ब्राह्मण पैदा हो गया. इरफान ने कई मंचों पर खुद अपने संघर्ष की कहानी सुनाई थी. जब उन्होंने एनएसडी में प्रवेश किया तभी उनके पिता का निधन हो गया. इसके बाद इरफान को घर से आर्थिक मदद मिलना बंद हो गई. फिर  एनएसडी से मिलने वाली फेलोशिप के जरिए उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की. इरफान खान की एनएसडी में सुतापा सिकंदर से मुलाकात हुई. वप पहली ही नज़र में सुतापा से प्यार कर बैठे और फिर 23 फरवरी 1995 में दोनों ने शादी कर ली. तब तक इरफान बॉलीवुड में स्टैबलिश नहीं हो पाए थे, लेकिन इसके बाद भी इरफान के संघर्ष के दिनों में सुतापा हमेशा उनके साथ खड़ी रहीं. 

 

 

बॉलीवुड के साथ-साथ इरफान  ने हॉलीवुड में भी काफी काम किया. उन्होंने 'स्पाइडर मैन', 'जुरासिक वर्ल्ड' और 'इन्फर्नो' जैसी फिल्मों में काम किया और उनकी काफी तारीफ भी हुई. एक इंटरव्यू में हॉलीवुड अभिनेता टॉम हैंक्स ने उनकी सराहना करते हुए कहा था कि इरफान की आंखें भी अभिनय करती हैं. 

 

फिल्म 'हासिल' में निगेटिव रोल में नजर आए इरफान खान  को उस साल का 'बेस्ट विलेन' का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था. इरफान खान को फिल्म 'पान सिंह तोमर' के लिए नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था. साल 2011 में भारत सरकार की तरफ से उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था. 

 

29 अप्रैल 2020 को कैंसर जैसी गंभीर बोमारी से लड़ने के बाद उन्होंने हम सबको हमेशा के लिए अलविदा कह दिया. भले ही वो आज हमारे बीच नहीं है मगर वो हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेंगे. कहते है ना Legend Never Dies

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