The tendency to stop without a request to declare a terrorist should stop: India | आतंकवादी घोषित करने के अनुरोध पर अकारण रोक लगाने की प्रवृत्ति बंद होनी चाहिए : भारत
आतंकवादी घोषित करने के अनुरोध पर अकारण रोक लगाने की प्रवृत्ति बंद होनी चाहिए : भारत

(योषिता सिंह)

संयुक्त राष्ट्र, 12 जनवरी भारत ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से कहा कि आतंकवादी या आतंकवादी संगठन पर पाबंदी लगाए जाने की राह में अड़ंगा लगाने की प्रवृत्ति बंद होनी चाहिए। भारत ने परोक्ष रूप से चीन का हवाला दिया, जिसने जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित कराने के भारत के प्रयासों को बार-बार बाधित करने की कोशिश की थी।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, ‘‘हमें इस लड़ाई में दोहरा मापदंड नहीं अपनाना चाहिए। आतंकवादी सिर्फ आतंकवादी हैं। अच्छे या बुरे आतंकवादी नहीं होते। जो ऐसा मानते हैं उनका अपना एजेंडा है और जो उन्हें छिपाने का काम करते हैं वह भी दोषी हैं।’’

उन्होंने डिजिटल तरीके से बैठक को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘हमें आतंकवाद रोधी और पाबंदी से निपटने के लिए समितियों के कामकाज में सुधार करना होगा। पारदर्शिता, जवाबदेही और कदम उठाया जाना समय की मांग है। बिना किसी कारण के सूचीबद्ध करने के अनुरोध पर रोक लगाने की प्रवृत्ति बंद होनी चाहिए। यह हमारी सामूहिक एकजुटता की साख को ही कम करता है।’’

जयशंकर, प्रस्ताव 1373 (2001) को अंगीकृत किए जाने के बाद ‘‘20 साल में आतंकवाद से लड़ाई में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और आंतकवादी कृत्यों के कारण अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को खतरा’’ विषय पर यूएनएससी की मंत्रिस्तरीय बैठक को संबोधित कर रहे थे।

इस महीने 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में भारत के अस्थायी सदस्य के तौर पर दो साल के कार्यकाल की शुरुआत के बाद से मंत्री ने इसे पहली बार संबोधित किया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में पांच सदस्य स्थायी और 10 अस्थायी सदस्य हैं।

जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की पाबंदी के तहत लोगों और संगठनों के नाम सूची में शामिल करने और बाहर करने का काम ‘‘राजनीतिक या धार्मिक आधार पर विचार किए बिना’’ निष्पक्षता के साथ होना चाहिए। इस संबंध में प्रस्तावों के गुण-दोष के आधार पर निर्णय किया जाना चाहिए।’’

पाकिस्तान में रह रहे आतंकवादी अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करवाने के लिए भारत को करीब 10 साल तक मशक्कत करनी पड़ी। ऐसा इसलिए कि पाकिस्तान के सदाबहार सहयोगी चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 अलकायदा प्रतिबंध समिति के तहत अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के भारत के प्रयासों में बार-बार अडंगा डाला।

अंतत: मई 2019 में भारत को तब बड़ी कूटनीतिक कामयाबी मिली जब चीन द्वारा प्रस्ताव पर रोक हटाए जाने के बाद संयुक्त राष्ट्र ने अजहर के खिलाफ पाबंदी लगा दी।

पिछले साल पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 अलकायदा प्रतिबंध समिति के तहत चार भारतीय नागरिकों को आतंकवादी घोषित करवाने का प्रयास किया था।

पाकिस्तान के प्रयास को अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और बेल्जियम ने नाकाम कर दिया क्योंकि आतंकवादी घोषित करवाने के लिए मामले में पाकिस्तान कोई साक्ष्य पेश नहीं कर सका।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टी एस तिरुमूर्ति ने ट्वीट किया था, ‘‘पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद पर 1267 समिति का राजनीतिकरण करने के प्रयास को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने नाकाम कर दिया। हम पाकिस्तान के प्रयासों पर रोक लगाने वाले परिषद के सदस्यों का शुक्रिया अदा करते हैं।

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Web Title: The tendency to stop without a request to declare a terrorist should stop: India

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