अफगानिस्तान में तालिबानी संगठनों और अफगान लड़ाकों के बीच जंग, 85 फीसदी हिस्से पर कब्जा, सैनिक ईरान भागे

By सतीश कुमार सिंह | Published: July 9, 2021 06:56 PM2021-07-09T18:56:19+5:302021-07-09T22:10:00+5:30

11 सितंबर तक अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के मद्देनजर हाल के हफ्तों में तालिबानियों ने दर्जनों जिलों पर कब्जा जमाया।

Taliban claims to control 85 percent of Afghanistan US troops war Taliban organizations and Afghan fighter 85 percent  | अफगानिस्तान में तालिबानी संगठनों और अफगान लड़ाकों के बीच जंग, 85 फीसदी हिस्से पर कब्जा, सैनिक ईरान भागे

अफगान सैनिक और सरकारी अधिकारी ईरान भाग गए हैं। (file photo)

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Highlights तालिबानियों ने अफगान सेना की एक पोस्ट को बम से उड़ा दिया।अफगानिस्तान और ईरान के बीच व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र है। अफगानिस्तान से वापस लौटने के बाद तालिबान का आतंक चरम पर पहुंच गया है।

काबुलः अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद अफगानिस्तान में तालिबानी संगठनों और अफगान लड़ाकों के बीच जमकर जंग छिड़ी है। 

इस बीच  खबर है कि तालीबानी आतंकियों ने अफगान की एक पोस्ट को बमबारी में ध्वस्त कर दिया। इस पोस्ट को बम से उड़ाने का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो को पोस्ट करते हुए पत्रकार बिलाल सालवेरी ने बताया कि तालिबानियों ने अफगान सेना की एक पोस्ट को बम से उड़ा दिया।

तालिबान का आतंक चरम

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में बताया कि अफगानिस्तान का इस्लाम-काला क्षेत्र अफगानिस्तान और ईरान के बीच व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र है। तालिबानियों ने यहां भी कब्जा कर लिया है और अफगान सैनिक और सरकारी अधिकारी ईरान भाग गए हैं। वहीं खबर है कि अमेरिकी सैनिकों के अफगानिस्तान से वापस लौटने के बाद तालिबान का आतंक चरम पर पहुंच गया है।

चरमपंथी संगठन ने शुक्रवार को दावा करते हुए कहा है कि उसने अफगानिस्तान के करीब 85 फीसदी हिस्से पर कब्जा जमा लिया है। इसमें ईरान से सटे सीमांत इलाके भी शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की ओर से सैनिकों की वापसी का बचाव किए जाने के कुछ घंटों बाद ही तालिबान ने यह दावा किया।

तालिबान ने कहा कि उसने ईरान से लगती सीमा पर मौजूद कस्बे इस्लाम काला पर कब्जा जमा लिया है।रूस में तालिबान के एक डेलिगेशन ने दावा किया कि उसने अफगानिस्तान के कुल 398 जिलों में से 250 पर कब्जा जमा लिया है। हालांकि इस दावे की पुष्टि अब तक नहीं की गई है। वहीं इस मामले में अफगानिस्तान सरकार की ओर अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने आया है।

सभी अफगान सुरक्षा बल इलाके में मौजूद

इस मामले में तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि उनका इस्लाम काला कस्बे पर कब्जा हो गया है।वहीं सरकारी अधिकारियों का कहना है कि तालिबान के साथ संघर्ष जारी है। अफगानिस्तान के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि सभी अफगान सुरक्षा बल इलाके में मौजूद हैं।

तालिबान के कब्जे से इलाकों को छुड़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इससे पहले बाइडन ने कहा कि अमेरिकी सेना का मिशन 31 अगस्त को समाप्त हो जाएगा। दो दशकों के बाद अमेरिकी सैनिकों की अफगानिस्तान से वापसी हो रही है। इस बीच तालिबान ने देश में हिंसा का तांडव बढ़ा दिया है।

मर्दों के लिए दाढ़ी बढ़ाना जरूरी

खबर ये भी है कि तालिबान ने जिन इलाकों पर कब्जा कर लिया है उन पर तालीबानी कानून भी लागू करना शुरू कर दिया है। इसमें कहा गया है कि कोई भी महिला घर के बाहर अकेले नहीं निकल सकती है। इसके अलावा मर्दों के लिए दाढ़ी बढ़ाना जरूरी कर दिया गया है।

वहीं तालिबान की ओर से खदेड़े जाने के बाद सुरक्षा बल के तीन सौ सैनिक अपने देश की सीमा पार कर ताजिकिस्तान में पहुंच गए। ताजिकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा की राज्य समिति ने तीन सौ अफगान सैनिकों के आने की पुष्टि की है।

अफगानिस्तान पर किसका शासन हो, इसे नजरअंदाज न किया जाए : जयशंकर

भारत ने अफगानिस्तान में बढ़ती हिंसा पर चिंता व्यक्त करते युद्धग्रस्त देश में रक्तपात में तत्काल कमी लाने का शुक्रवार को आह्वान किया और कहा कि देश में किसे शासन करना चाहिए, यह ‘‘वैध पहलू’’ महत्वपूर्ण है तथा इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस के अपने समकक्ष सर्गेइ लावरोव के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘निश्चित तौर पर हम अफगानिस्तान में घटनाओं से चिंतित हैं।’’

उनकी यह टिप्पणी तब आयी है जब 11 सितंबर तक अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के मद्देनजर हाल के हफ्तों में तालिबानियों ने दर्जनों जिलों पर कब्जा जमाया और ऐसा माना जा रहा है कि देश के एक तिहाई हिस्से पर उसका नियंत्रण है। रूस की तीन दिवसीय यात्रा पर आये जयशंकर ने कहा, ‘‘हमारा जोर इस बात पर है कि हिंसा रूकनी चाहिए। अफगानिस्तान में हालात का समाधान हिंसा नहीं हो सकती। आखिर में अफगानिस्तान पर कौन शासन करता है यह इसका वैध पहलू है। मुझे लगता है कि इसे नजरअंदाज नहीं किए जाना चाहिए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘30 साल से अधिक समय से अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता लाने पर चर्चा के लिए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन हुए, समूह बने, कई रूपरेखा पेश की गयी। अगर हम अफगानिस्तान और उसके आसपास शांति चाहते हैं तो भारत और रूस के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे यह सुनिश्चित करने के लिए साथ मिलकर काम करें कि आर्थिक, सामाजिक क्षेत्र में प्रगति बरकरार रखी जाए। हम एक स्वतंत्र, सम्प्रभु और लोकतांत्रिक अफगानिस्तान बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’’

दिलचस्प बात यह है कि जयशंकर की मॉस्को यात्रा ऐसे समय हो रही है जब बृहस्पतिवार को तालिबान प्रतिनिधिमंडल भी यहां की यात्रा कर रहा है ताकि यह आश्वासन दिया जा सके कि अफगानिस्तान की जमीन पर बढ़ते उसके नियंत्रण से क्षेत्रीय देशों को उनसे कोई खतरा नहीं है।

रूसी समाचार एजेंसी ‘तास’ की खबर के अनुसार तालिबान के प्रवक्ता मोहम्मद सोहेल शाहीन ने कहा कि उनकी टीम ‘‘यह आश्वासन देने के लिए मास्को आई है कि हम रूस या पड़ोसी देशों पर हमला करने के लिए किसी को भी अफगान क्षेत्र का उपयोग करने की अनुमति नहीं देंगे।’’

अफगानिस्तान में शांति एवं स्थिरता का एक प्रमुख पक्षकार भारत राष्ट्रीय शांति एवं सुलह प्रक्रिया का समर्थन कर रहा है। अमेरिका के तालिबान के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद से भारत वहां बदल रहे राजनीतिक हालात पर करीबी नजर रख रहा है। भारत ने कहा है कि वह परिवर्तन के दौरान अफगानिस्तान को लगातार समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है।

(इनपुट एजेंसी)

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