Pakistan failed to capture 19 wanted LeT militants even 12 years after 26/11 attacks | 26/11 हमलाः 12 साल बाद भी लश्कर के 19 वांछित आतंकवादियों को पकड़ने में नाकाम पाकिस्तान
जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज सईद और जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर के खिलाफ कार्रवाई करना भी शामिल था।

Highlightsपाकिस्तान को फरवरी 2021 तक ‘ग्रे’ सूची में रखने के फैसले के बाद किया गया।मुंबई आए लश्कर के 10 आतंकवादियों ने एक साथ हमला कर 166 लोगों की हत्या कर दी थी।

लाहौरः  मुंबई में हुए 26/11 हमलों के 12 वर्षों बाद, पाकिस्तान ने प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैयबा के 19 आतंकवादियों को इस वारदात को अंजाम देने के लिये “सर्वाधिक वांछित आतंकवादियों” की सूची में रखा तो जरूर लेकिन उन्हें पकड़ने के लिये उसने कोई गंभीर प्रयास नहीं किये और न ही उन सात आतंकियों को दंडित करने की कोई कोशिश की जो यहां मुकदमे का सामना कर रहे हैं।

सुरक्षा एजेंसियों को यहां इन 19 सर्वाधिक वांछित आतंकवादियों के पते-ठिकाने की कोई जानकारी नहीं। उनमें से कुछ पाकिस्तान में छिपे हैं और अन्य के बारे में माना जाता है कि वे देश छोड़कर भाग गए हैं। ये आतंकवादी या तो हमलावरों द्वारा इस्तेमान नावों के चालक दल के सदस्य थे या फिर 26/11 हमले के लिये आर्थिक मदद करने वाले।

लश्कर के इन 19 आतंकवादियों को सूची में शामिल करने का कदम संभवत: पेरिस स्थित वैश्विक धन शोधन व आतंकी वित्त पोषण निगरानी संस्था के पाकिस्तान को फरवरी 2021 तक ‘ग्रे’ सूची में रखने के फैसले के बाद किया गया।

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ने पाकिस्तान के छह प्रमुख दायित्वों को पूरा करने में विफल रहने पर यह फैसला किया था। पाकिस्तान जिन दायित्वों को पूरा करने में विफल रहा उनमें भारत के दो सर्वाधिक वांछित आतंकवादी- जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज सईद और जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर के खिलाफ कार्रवाई करना भी शामिल था।

संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) के अधिकारियों ने ‘पीटीआई’ को बताया कि सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान में 1200 सर्वाधिक वांछित/प्रमुख आतंकवादियों की सूची तैयार की है जिससे उन्हें पकड़ने में विभिन्न प्राधिकारों के बीच बेहतर समन्वय रहे।

पाकिस्तान की शीर्ष जांच एजेंसी एफआईए 2009 से मुंबई आतंकी हमले की जांच कर रही है और इस भयावह हमले में शामिल 19 “सर्वाधिक वांछित आतंकवादियों” की तलाश कर रही है।

नवंबर 2008 में समुद्र के रास्ते कराची से मुंबई आए लश्कर के 10 आतंकवादियों ने एक साथ हमला कर 166 लोगों की हत्या कर दी थी और 300 से ज्यादा लोगों को घायल कर दिया था। सुरक्षा बलों ने नौ आतंकवादियों को मार गिराया था जबकि जिंदा पकड़े गए एक मात्र आतंकवादी अजमल कसाब को भारत में मुकदमे के बाद फांसी दे दी गई थी।

26/11 आतंकी हमले का मामला 2009 से ही रावलपिंडी/इस्लामाबाद की आतंकवाद रोधी अदालतों में लंबित है।

मुंबई हमला मामले में मौजूदा स्थिति के बारे में ‘पीटीआई’ से बात करते हुए एफआईए के मुख्य अभियोजक चौधरी अजहर ने कहा, “भारत द्वारा मामले के साक्ष्यों और अपने 24 गवाहों को बयान दर्ज करने के लिये पाकिस्तान भेजने से इनकार किये जाने के बाद इस मामले में कार्यवाही रुक गई। भारत जब तक इस मुद्दे पर सहयोग नहीं करेगा मामला आगे नहीं बढ़ सकता।”

व्यवहारित रूप से बीते दो सालों से इस मामले में कोई सुनवाई नहीं हुई।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

Web Title: Pakistan failed to capture 19 wanted LeT militants even 12 years after 26/11 attacks

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