कोविड-19 प्रतिबंध हटेंगे तो दुख से मिली शिक्षा हमें दूसरों की मदद करना सिखाएगी

By भाषा | Published: July 22, 2021 04:46 PM2021-07-22T16:46:43+5:302021-07-22T16:46:43+5:30

Learning from grief will teach us to help others if COVID-19 restrictions are lifted | कोविड-19 प्रतिबंध हटेंगे तो दुख से मिली शिक्षा हमें दूसरों की मदद करना सिखाएगी

कोविड-19 प्रतिबंध हटेंगे तो दुख से मिली शिक्षा हमें दूसरों की मदद करना सिखाएगी

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टोरंटो, 22 जुलाई (वार्तालाप) कोविड-19 ने कई नुकसान और कई मौतें की हैं। दुनिया भर में मौतों की संख्या लगभग चालीस लाख तक पहुंच गई है, और इनमें से 26,000 मौतें कनाडा में हुई हैं।

कैनेडियन ग्रीफ़ एलायंस के शोक काउंटर का अनुमान है कि तीस लाख से अधिक कनाडाई शोकग्रस्त हैं। कनाडाई ऐसे अनगिनत अन्य नुकसानों का सामना कर रहे हैं जो मृत्यु या मृत्यु से संबंधित नहीं हैं।

इस बात पर चिंता प्रकट की गई है कि महामारी और उसके कारण लगे प्रतिबंधों का दुख पर गंभीर रूप से नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। कुछ तो यह भी कहते हैं कि दुख की सुनामी आ सकती है।

इसे समझते हुए, हमने कनाडा के लोगों के दुख के बारे में कई अध्ययन किए हैं। एक अध्ययन के कुछ परिणामों की चर्चा यहां की गई है। इसके अलावा, हम इस बारे में कुछ सुझाव देते हैं कि दुःख को बेहतर ढंग से कैसे समझा जाए और शोक मनाने वालों को ढांढस बंधाया जाए।

दुख की सुनामी?

हमने 900 से अधिक फ़्रैंकोफ़ोन (ज्यादातर क्यूबेक में) का अध्ययन पूरा किया, जिन्होंने महामारी के दौरान किसी की मृत्यु का अनुभव किया।

मार्च और मई 2021 के बीच प्रोजेक्ट, कोविड्यूइल (फ्रांसीसी में दुइल का अर्थ है शोक) ने लोगों का सर्वेक्षण किया।

अधिकांश प्रतिभागी (77 प्रतिशत) मौत की तरफ बढ़ रहे व्यक्ति के साथ नहीं रह पाए, जबकि कई दुखीजन (65 प्रतिशत) अपने प्रियजन की मृत्यु के बाद लोगों को इकट्ठा नहीं कर पाए। छिहत्तर प्रतिशत लोग अंतिम संस्कार की वह रस्में पूरी नहीं कर पाए जो वह करना चाहते थे।

हमारे अध्ययन से पता चला है कि जटिल दु: ख या लंबे समय तक दु: ख की अनुभूति, जो लंबे समय तक किसी नुकसान में फंस जाने पर होती है, उतनी अधिक नहीं है जितनी कुछ भविष्यवाणियों में आशंका थी। लेकिन यह गैर-महामारी के समय की तुलना में अधिक है।

शोक सहायता के सार्वजनिक स्वास्थ्य मॉडल से पता चलता है कि पांच से 10 प्रतिशत पीड़ितों को जटिल दु: ख विकसित होने का खतरा है। हमारे अध्ययन से पता चला है कि लगभग 15 प्रतिशत प्रतिभागियों को जटिल दुःख हो सकता है।

चूंकि कनाडा के पीड़ितों का कोई ज्ञात अध्ययन नहीं है, इसलिए हमें अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों पर निर्भर रहना पड़ता है। हमारे अध्ययन में भाग लेने वालों का 15 प्रतिशत पूर्व-महामारी अनुमानों से अधिक है। हालांकि, यह रेखांकित करना महत्वपूर्ण है कि उन संख्याओं का मतलब है कि 85 प्रतिशत जटिल दु: ख के जोखिम में नहीं हैं।

बढ़ी हुई संख्या के बावजूद, क्या महामारी के दौरान दुःख को वास्तव में सुनामी माना जा सकता है?

शोक साक्षरता

दुःख को समझना और फिर उसे सामान्य करना, फ्रंटलाइन स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ताओं से लेकर बच्चों और शिक्षकों के साथ-साथ महामारी के दौरान किसी की मृत्यु का अनुभव करने वाले सभी को लाभान्वित कर सकता है।

दु: ख साक्षरता आंदोलन का उद्देश्य हर किसी की दुःख को पहचानने की क्षमता को बढ़ाना और खुद को और दूसरों की सहायता करने में अधिक कुशल बनाना है।

जैसे-जैसे महामारी प्रतिबंध हटाए जा रहे हैं, हम में से प्रत्येक को नए तरीकों से दुःख महसूस हो सकता है। शायद हमें किसी ऐसे व्यक्ति के साथ समय बिताने का मौका मिले, जिसका साथी मर गया, या हम ऐसे कार्यस्थल पर लौटकर जाएं, जहां हमारे सहकर्मी जीवित नहीं रहे। ऐसे में दुख से मिली शिक्षा हमें इन संभावनाओं का अनुमान लगाने और उनमें शामिल होने में मदद कर सकती है।

दुख से निपटना

हम यहाँ कनाडा में लोगों के दुःख का बेहतर जवाब देने के लिए क्या कर सकते हैं? सबसे पहले, हमें अपने स्वयं के दुःख को पहचानने और स्वीकार करने के साथ ही स्वयं से शुरुआत करने की आवश्यकता है। दुःख के इर्द-गिर्द इतनी शर्म और मलाल है - क्या मैं इसे सही कर रहा हूँ की भावना? - विशेष रूप से असंभव सामाजिक मानदंड को देखते हुए जो हमें कहता है कि हमें उत्पादक और खुश रहने की जरूरत है।

हम मानवीय स्थिति के एक अनिवार्य घटक से विमुख हो गए हैं: नुकसान के लिए हमारी सन्निहित प्रतिक्रियाओं का सम्मान करना। इन दबावों का मुकाबला करने के लिए, हमें इस ज्ञान को एकीकृत करने की आवश्यकता है कि दुःख नुकसान की एक सामान्य, स्वाभाविक प्रतिक्रिया है और इसमें शर्मिंदा होने की कोई बात नहीं है।

हमें अपने व्यक्तिगत दुःख को नम्रता के साथ स्वीकार करना सीखना चाहिए और दुःख की प्रकृति को समझना चाहिए, विशेष रूप से अंतर्मुखी होकर। जब हम दूसरों का समर्थन करने के लिए बाहर की ओर मुड़ते हैं तो हम अपनी करुणा और विनम्रता का लाभ उठा सकते हैं।

एक महत्वपूर्ण बात यह जानना है कि इस काम में घबराहट और असहजता महसूस होना स्वाभाविक है।

हमने सामूहिक रूप से एक समस्याग्रस्त सामाजिक रस्म को अपनाया है जो वास्तव में पीड़ितों को आहत करती है। शोक करने वालों के दृष्टिकोण से, सहायता का भाव आमतौर पर जल्दी ही समाप्त हो जाता है और वे परित्यक्त महसूस करते हैं या अपने आसपास के लोगों से चुप्पी का अनुभव करते हैं।

परिवार, दोस्तों, सहकर्मियों और पड़ोसियों के साथ, उस व्यक्ति की स्मृति साझा करें जिसकी मृत्यु हो गई है। दुखी व्यक्ति को उनके नुकसान की याद दिलाने के डर से व्यक्ति के बारे में बात करने से न डरें।

वे इसके बारे में बहुत जागरूक हैं क्योंकि वे हर दिन वास्तविकता जीते हैं। ऐसे में यह कहना ठीक है कि आप नहीं जानते कि क्या कहना है और आप उनके लिए वहां आए हैं।

प्रतिबंधों में ढील और मिलने जुलने की क्षमता में वृद्धि के साथ, हमें महामारी के प्रभाव को बेहतर ढंग से समझने और प्रतिक्रिया देने और अपने सामूहिक और व्यक्तिगत दुख का पता लगाने की आवश्यकता है। कनाडा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोक साक्षरता विकसित करने के लिए एक बदलाव की आवश्यकता है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

Web Title: Learning from grief will teach us to help others if COVID-19 restrictions are lifted

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